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Thursday, October 18th, 2018 11:38 AM
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कश्मीर को हक से नहीं, कश्मीरियों को दिल से जीतें




कश्मीर को हक से नहीं, कश्मीरियों को दिल से जीतें



जब से देश आजाद हुआ है कश्मीर पर राजनीति हावी रही है और उसकी वजह से वह आज तक दहक रहा है। धरती का स्वर्ग कहलाने वाला कश्मीर व कश्मीरी लोग आज भी उसकी सजा भुगत रहे हैं। प्रकृति ने सम्पूर्ण धरती पर कुछ न कुछ अनमोल खजाना दे रखा है, जिसकी वजह से वे आबाद भी हुए और आज बहुत ही अच्छी स्थिति में हैं। उदाहरण के लिए अरब देश को ही लें, पूर्ण रूपेण मरुस्थल किंतु तेल के कुंओं ने उन्हें विश्व में सिरमौर बना दिया है। किंतु ये धरती का स्वर्ग कश्मीर अपने खुशहाल जमाने से काफी पीछे की तरफ आ चुका है या यूं कहें कि बर्बादी की कगार पर आ चुका है।

वजह साफ है, हमारी राजनीतिक छोटी सोच। सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे नुकसान पर हर पार्टियां वहां राजनीति करती आ रही हैं। किसी को भी इस बात की चिंता नहीं है कि वहां के लोगों की क्या स्थिति है। देश एक परिवार का रूप होता है। परिवार पर हक होता है तो अपनापन भी होता है। जब हर सदस्य की भलाई का ध्यान रखा जाता है तब परिवार एक होता है, मजबूत होता है। यही वो बात है जो परिवार को बाहरी गलत नजर और बुरी नीयत से बचाती है। किंतु हमारे परिवार की मुखिया बन जितनी भी सरकारें आईं वो सिर्फ अपनी राजनीतिक वोट-बैंक के अंक-गणित तक उलझी रहीं। वहां की जनता की समस्या क्या है, उससे सरकार का कोई सारोकार नहीं रहा। बस महज भाषणबाजी होती रहती है। उनकी इन्हीं कमजोरियों की वजह से पड़ोसी दुश्मन देशों की नजर हमेशा पड़ती रही है और आतंक का साया संपूर्ण कश्मीर पर मंडराता रहा है। जबकि एक परिवार के मुखिया की भांति सरकार को चाहिए था कि वे सिर्फ हक न जताएं बल्कि कश्मीरियों का दिल भी जीतें। उनको संपूर्ण भारत और भारतवासियों से एक कराएं, ये भावना उनके मन में जागना चाहिए। जबकि ऐसा नहीं हो रहा है।

आज स्थिति यह है कि वहां की जनता भी खिलाफ खड़ी दिखती है। वह परिवार में एक रूप होना तो चाहती है किंतु वर्तमान राजनीति ऐसा होने नहीं दे रही है। दूसरा, सबकी पहली जरूरत उनका पेट होता है, भरण-पोषण होता है, किंतु वहां उनके रोजगार के लिए कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो रही है। यदि पेट भूखा हो तो सब नैतिकता एक तरफ हो जाती है। इसी बात का फायदा आतंकवाद के अनुयायी ले रहे हैं। वहां के युवाओं को अच्छे प्रलोभन देकर उन्हें देश के खिलाफ ही जहर उगलने पर मजबूर कर रहे हैं। वर्तमान में हुई पत्थरबाजी और जनता का इकट्ठा होना इसी बात को दर्शाता है। वो तो धन्य हैं हमारे सैनिक जो वर्षों से इस स्थान को बचाते आ रहे हैं और वहां की जनता का भी ध्यान रख रहे हैं। किंतु राजनीतिक कलाबाजियों के चलते वही जनता जिसकी सुरक्षा में सैनिक लगे हैं उनके खिलाफ खड़ी दिखती है और हम सभी मूक दर्शक बनकर देख रहे हैं। पाकिस्तान हम पर नित नए आरोप लगाता रहता है, घुसपैठियों को शरण देता रहता है, आतंक मचाने में मशगूल रहता है। ये भी महज उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को ही दर्शाते हैं। वहीं चीन, अमेरिका जैसे देश अपनी विश्वव्यापी सम्प्रभुता को बनाने के लिए हमारी इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाते रहते हैं। दूसरी ओर हमारे राष्ट्रनायक भी महज बातचीत का ढोंग कर कोई ठोस कार्य नहीं कर पा रहे हैं। जबकि जरूरत कश्मीर से ज्यादा कश्मीरवासियों पर ध्यान देने की है। उनके लिए बेहतर करने की है। ताकि वे भावनात्मक रूप से अपने आप को संपूर्ण देश से जुड़ा हुआ महसूस कर सकें और शेष देशवासी भी उन्हें अपनापन महसूस करा सकें एक परिवार की भांति। फिर पाकिस्तान तो क्या दुनिया की कोई ताकत हमारे देश में आतंक नहीं फैला पाएगी और हमारे सैनिक आतंकवादियों और जनता के बीच न पिसकर सिर्फ जनता के लिए आतंक से अच्छे से लड़ पाएंगे।

जय हिंद

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