Thursday, September 21st, 2017 11:17:24
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एक कहानी : इनकम टैक्स की रेड… (पार्ट-5)




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एक कहानी : इनकम टैक्स की रेड… (पार्ट-1)

एक कहानी : इनकम टैक्स की रेड… (पार्ट-2)

एक कहानी : इनकम टैक्स की रेड… (पार्ट-3)

एक कहानी : इनकम टैक्स की रेड… (पार्ट-4)

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राहुल मां की बात मानकर आगे कमरे में चौरसिया जी के पास आकर बैठ जाता है। अब वहां बड़ा अच्छा माहौल हो चुका था। एक तो वो गलत घर में आ गए थे और दूसरी बड़ी बात ये थी कि ये घर उनके मास्टर जी का निकला। इसलिए ऑफ़िसर्स और घर के सदस्य कंफर्टेबल हो चुके थे। उन्होंने राहुल और अनु के बारे में पूछना शुरु कर दिया। क्या कर रहे हो? कौन-से कॉलेज में पढ़ रहे हो? आगे क्या करना है? इत्यादि। राहुल भी बड़े हाज़िर जवाब दे रहा था। उसके बड़े ख़्वाब देखकर ऑफ़िसर्स भी आश्चर्य में थे। बात अब घर की हो चुकी थी इसलिए वे भी सहमत थे। अनु को भी बाहर बुला लिया था। वो भी अपनी आगे की प्लानिंग को लेकर उनसे डिसकस करने लगी।

राहुल ने अच्छा मौका पाकर चौरसिया जी को अधिक समय वहां बिताने की रिक्वेस्ट की। ऑफ़िसर समझ नहीं पाए वो ऐसा क्यों बोल रहा है जबकि वो जल्दी ही दूसरे अनूप शर्मा के यहां जाना चाह रहे थे। फ़िर भी उन्होंने राहुल को आश्वासन दिया कि ’’कोशिश करते हैं’’

इधर राहुल की मां पिताजी को समझा रही थी कि ऑफ़िसर्स को देर तक रोका जाए तो हमारे लिए बेहतर होगा। पहले पहल तो उनको भी समझ नहीं आया किंतु बहु सरला कह रही है तो कुछ बात तो होगी ऐसा सोच वे सरला से चौरसिया से बात करने का कह बाहर कमरे में आ गए।

मास्टर जी के कमरे में पहुंचते ही चौरसिया जी आश्चर्यपूर्वक बोल उठे, ’’मास्टर जी हम जल्दी ही जाना चाहते हैं किंतु आपका पोता हमें देर तक रुकने का कह रहा है। कमाल है लोग तो हमारे जल्दी चले जाने की प्रार्थना करते हैं और यहां तो उल्टा हो रहा है।’’

मास्टर जी : हां भाई ये आजकल के नौजवान कुछ अलग ही सोचते हैं। हमारी बहू भी इनका साथ दे रही है तो थोड़ा रुक ही जाओ।

इस सारे वाकिए में हमारे शर्मा जी तो बस चुपचाप सब होता देख रहे थे जो उनकी समझ से परे ही था। इतने में सरला जी नाश्ता ले आती है। अनु और राहुल उन्हें बड़े चाव से खिलाने लग जाते हैं।

इधर शर्मा जी के घर पर इतना सब कुछ हो रहा था, उधर पूरी बिल्डिंग में हल्ला मच चुका था कि शर्मा जी के यहां इनकम टैक्स वाले आए हैं। एक कहता है, ’’अरे यार ये शर्मा जी तो बड़े छुपे रुस्तम निकले, कभी पता ही नहीं चलने दिया कि इनके पास इतना माल है।’’

दूसरा कहता है, ’’हां यार बताते तो अपने आप को इतना ईमानदार थे। आजकल तो पता ही नहीं चलता किसके पास कितना माल है।’’

इतने में तीसरा कहता है, ’’क्यों मजाक करते हो भाई, अभी कुछ दिन पहले तो शर्मा जी मुझसे बेटी की शादी के लिए कहीं से लोन की अरेंजमेंट करने का बोल रहे थे।’’

इनकी बातचीत के बीच ही एक की पत्नी बोल उठती है, ’’भैया कल सुबह पेपर में सब क्लियर हो जाएगा, कितना माल निकला वह भी पता लग जाएगा।’’

ऐसी कानाफूसी पूरी ही बिल्डिंग में चल रही थी किंतु किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो शर्मा जी के घर तक भी चले जाए।

बिल्डिंग में ही वर्मा जी की बेटी संध्या रहती है जो अनु की क्लासमेट ही नहीं अच्छी फ्रैंड भी है। वो ज्यादा पैसे वाले हैं इसलिए वर्मा जी तो नहीं जा पर रहे थे उन्होंने अपनी बेटी संध्या को कहा, ’’बेटी ज़रा पता तो लगाओ तुम्हारी फ्रैंड अनु के यहां क्या चल रहा है, पता तो लगे। किंतु ज़रा ध्यान से, वहां इनकम टैक्स वाले हैं तुमसे कुछ पूछ न लें।’’ Next Page पर पढ़ें पूरी कहानी…

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