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Monday, September 24th, 2018 09:24 PM
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समय पर कर्ज चुकाने पर मिलेंगे ये 7 फायदें




समय पर कर्ज चुकाने पर मिलेंगे ये 7 फायदेंBusiness



क्रेडिट स्कोर के बारे में बहुत कम लागे जानते है लेकिन क्रेडिट स्कोर के बारे में सबको पता होना जरूरी है। क्योंकि भविष्य में कब इसकी जरूरत पड़ जाए यह आप भी नहीं जानते है। क्रेडित स्कोर का आंकलन पहले किए गए कर्ज के भुगतान के आधार पर किया जाता है। लोन और क्रेडिट कार्ड लेने में क्रेडिट स्कोर की भूमिका अहम होती है। आपका क्रेडिट स्कोर आपके लिए कई सारी चीजे तय करता है। हम आपको आज क्रेडिट स्कोर से जुड़े सुझाव देने जा रहे हैं जो आपका क्रेडिट स्कोर बनाने में मददगार साबित होंगे।

1. हिस्ट्री को मजबुत बनाता क्रेडिट स्कोर

क्रेडिट हिस्ट्री से आपके द्वारा लिए गए कर्ज और उसके भुगतान की जानकारी पता चलती है। अगर आप किसी कंपनी से बैंक से लोन लेते है तो वह सबसे पहले आपके द्वारा किए गए समय पर भुगतान की जानकारी जुटाती है। वहीं दूसरी ओर जिन लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती उन्हें लोन मिलने में थोड़ी दिक्कत होती है। साथ ही आप यह भी ध्यान रखें कि क्रेडिट हिस्टी बनाने के लिए सिर्फ छोटा लोन लेकर काम नहीं करें। इसके लिए आपको क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना होगा। इस तरह क्रेडिट कार्ड को जो भी कंपनी इश्यू करती है वह क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करती है। क्रेडिट ब्यूरो इसे क्रेडिट रिपोर्ट में शामिल करती है। इसके बाद कई मानकों पर स्कोर तय होता है। मानक के तौर पर आपने जो कर्ज लिया है उसे समय पर वापस कर रहे हैं, कितनी जल्दी – जल्दी लोन लेते है। तो ऐसे कुछ मानक होते है जो आपके क्रेडिट स्कोर तय करते है।

2. ईएमआई / बकाया राशि का भुगतान

वैसे क्रेडिट ब्यूरो असल किस तरह से आकलन करता है इसकी पूरी जानकारी कोई नहीं जानता लेकिन आपके द्वारा पूर्व में कर्ज भुगतान सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। अगर आपके द्वारा तय समय पर ईएमआई, क्रेडिट कार्ड का भुगतान किया समय पर भुगतान किया जाता है तो यह आपकी विश्वसनियता बढ़ातें है। आपको भविष्य में लोन मिलने में आसानी हो जाती है। आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में पिछले 3 सालों में आपका रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए। समय पर ऋण चुकाना, ईएमआई भरना। अगर आप इसे समय पर नहीं भरते है तो आगे आपको लंबे समय तक के लिए दिक्कत भी हो सकती है।

3. गारंटर हैं…

अगर आप किसी अन्य व्यक्ति को अपनी गारंटी के तौर पर प्रजेंट करते है, हस्ताक्षर करते है आप भी उसके लिए जिम्मेदार रहेंगे। अगर वह समय पर भुगतान नहीं कर पाता है, या देरी से करते है तो इसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। इसलिए अपना क्रेडिट स्कोर समय समय पर चेक करते रहे।

4. क्रेडिट अनुपात

क्रेडिट कार्ड भुगतान की कुल सीमा की जितनी लिमिट होती है उस क्रेडिट अनुपात कहते है। अगर क्रेडिट अनुपात 30-40 प्रतिशत ज्यादा है, तो ऋण देने वाली कंपनी यह समझेगी कि आपको अधिक कर्ज लेने की आदत है। कार्ड की सीमा 2 लाख रूपए है तो आप एक महीने में 80 हजार से ज्यादा खर्च न करें।

5. हार्ड इन्क्वायरी

लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने पर कंपनी या संबंधित बैंक विश्वसनियता जांचने के लिए पहले आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करती है। ऐसे आवेदनों को हार्ड इन्क्वायरी माना जाता है। इस तरह अगर बार बार आपके क्रेडिट रिपोर्ट की जांच की जाती है तो अंक भी कम होते है। इसलिए जब भी आप क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करें तो उसमें पैमाने जरूर जांचे ताकि आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर रहे।

6. लिमिट बढ़ाएं

अपना पुराना क्रेडिट कार्ड काम में नहीं आने पर आप उसे बंद करते है तो क्रेडिट हिस्ट्री की औसत अवधि और स्कोर कम होते है। अगर आपका पुरान क्रेडिट कार्ड काम नहीं आ रहा है तो पहले उसकी लिमिट बढ़ाने के लिए आवेदन करें इसके बाद अपने क्रेडिट स्कोर को मेंटेन करें फिर अपना क्रेडिट कार्ड को बंद करें।

7. रिपोर्ट की समीक्षा

क्रेडिट रिपोर्ट ब्यूरों में, ऋण देने वाली कंपनी की गलतियों, फर्जी लेनदेन और अन्य वजहों से गलत जानकारी हो सकती है। ऐसी में आपके लिए भविष्य में ऋण मिलना मुश्किल हो सकता है। इसलिए समय – समय पर ब्यूरों से अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जानकारी लेते रहें।

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