Monday, November 20th, 2017 08:47 AM
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इंटरनेशनल लेवल के लिए भारत में यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई गाइडेंस एवम सपोर्ट नहीं होता  -मोहित नाटानी 




इंटरनेशनल लेवल के लिए भारत में यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई गाइडेंस एवम सपोर्ट नहीं होता  -मोहित नाटानी Education & Career

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बड़े लोग हमेशा अपने हमें यह कहते रहते है कि यहीं सहीं समय है अभी अच्छे से पढ़ाई कर लो, जो भी सिखना चाहते हो सीख लो। वह ऐसा अपने अनुभव से यह सब करने के लिए के बार-बार हमें टोकते हैं लेकिन कुछ लोग अलग होते है। वो लोग कभी सहीं समय का इंतजार नहीं करते है जो समय है वहीं सही और सब कुछ है। इसका उदाहरण हमारे साथ है। उज्जैन के रहने वाले मोहित नाटानी गुजरात से आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहे हैं। मोहित ने हाल ही में इंटरनेशनल आर्किटेक्चर डिजाइन कॉनटेस्ट, सिंगापुर में आयोजित हुआ जिसमें उन्होंने पार्टिसिपेट किया| जहां अपने ही दम पर इंडिया की तरफ से अंतराष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर रहे। अंतराष्ट्रीय स्तर पर मोहित का यह पहला कॉम्पिटीशन नहीं था। इससे पहले भी वह 1 इंटरनेशनल और 3 नेशनल कॉम्पिटीशन जीत चुके हैं। मोहित नाटानी Youthens News के ऑफिस में एक खास मुलाकात में गेस्ट एडिटर के रूप में अपने  अनुभव को सांझा किया| साथ ही यूथ को भी आर्किटेक्चर का कोर्स करते वक्त कैसे अपना भविष्य बनाना चाहिए यह भी एक्सपर्ट के तौर पर बताया।

मोहित ने बताया कि इंटरनेशनल आर्किटेक्चर डिजाइन कॉम्पिटीशन जो हुआ उसमें खुुद से ही पार्टिसिपेट किया था। इस कॉम्पिटीशन में जो स्टूडेंट्स पहले और दूसरे स्थान पर आए है वे काफी एक्सपर्ट हो चुके है वे लोग जानते है कि इस कॉम्पिटीशन में कैसे जगह मिलती हैं। इंडोनेशिया और जर्मनी के स्टूडेंट्स हमेशा यूनिवर्सिटी की तरफ से पार्टिसिपेट करते हैं तो वहां के स्टूडेंट्स को सीनियर्स का गाइडेंस मिल जाता है और साथ ही यूनिवर्सिटी की तरफ से सपोर्ट भी मिलता है। वहीं दूसरी ओर हमारे इंडिया में स्टूडेंट्स को इस बारे में पता ही नहीं है और पता भी रहता है तो सपोर्ट नहीं मिलने की वजह से वह पार्टिसिपेट नहीं करते है। कॉलेज वालों की तरफ से यह एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी की तरह है इस वजह से सपोर्ट नहीं करते है। अपने यहां यूनिवर्सिटी का फोकस सिर्फ कोर्स पूरा करना होता  है। एक तरह से इंडिया के बाहर एकेडमिक हैवी हो रहा है लेकिन अपने इंडिया में नहीं है। कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेट करके खुद को एक्सप्लोर कर सकते है। कॉलेज में हम सीमित दायरे तक रह जाते है।

मोहित ने बताया कि, “कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेट करके खुद की ही एक टेक्निक डवलप कर ली है। बिल्डिंग देख कर बता सकता हूं कि यह बिल्डिंग किस आर्किटेक्ट की है। वर्ल्ड लेवल पर जो भी आर्किटेक्ट है उनकी एक टेक्निक हैं। आज 5 साल का कोर्स करने के बाद जब स्टूडेंट्स मार्केट में उतरते है तो वह सक्सेस नहीं  हो पाते है क्योंकि उन्हें मार्केट की समझ नहीं होती है।

अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत खड़ा हो सकता है

जैसा हम लोग काम करते है वैसा ही सभी लोग काम करते है। फर्क इतना है कि प्रजेंटेशन का तरीका। टोक्यो, जापान, इंडोनेशिया, जर्मनी इन सभी की 3डी ड्राइंग में काफी अच्छी पकड़ है। उन्होंने 3डी के माध्यम से अपने कॉनसेप्ट को काफी अच्छे से प्रजेंट किया था। हम डिटेल्स करते है, लेकिन बाहर के लोग सिर्फ कॉनसेप्ट पर काम करते है। दरअसल, इंडिया में सिर्फ कोर्स पर ध्यान दिया जाता है ना ही इस तरह से सिखाया जाता है।

खुद से कम्पीट करता हूं

मै हमेशा खुद से कम्पीट करता हूं। अगर उदाहरण के तौर पर किसी का काम देखना है तो मुझे इंडिया का नहीं बाहर का काम देखना हैं। सिंगापुर कॉम्पिटिशन में जब पार्टिसिपेट किया था तब उस चीज़ को समझने के लिए पिछले 10 सालों की पार्टिसिपेंट्स के बारे में पढ़ा, इसके बाद समझा कि मुझे किस लेवल का काम करना है। तो अगर आप किसी भी कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेट कर रहे हो तो पहले यह देखों आपके सामने कौन है, उस कॉम्पिटिशन के पहले विनर्स के बारे में जानों तो आपको समझ आ जाएगा कि आपको किस तरह का काम करना है। एक तरह से सेल्फ मोटिवेशन होता है। इस तरह मुझे अपने बारे में पता चलता है कि मैं कहा स्टेंड कर रहा हूं। इस तरीके से मैं आगे रहने के लिए अपने को ही कम्पीट करता हूं।

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प्री प्लानिंग बहुत जरूरी है

1 साल पहले ही डिसाइड कर लिया था कि मुझे इंटर्नशिप कहां करना हैं। इसके लिए मैंने वियतनाम में अप्लाए भी कर दिया था| जिसकी जनवरी से 6 महीने की ट्रेनिंग रहेंगी। बहुत सारे कॉम्पीटीशन होते है उनमें पार्टिसिपेट करता हूं फिर उसमें देखता हूं कि कैसे क्या काम करना है और फाइनलाइज़ कैसे करना है। सेकेंड ईयर से मैंने पहले इंटरनेशनल कॉम्पीटीशन में पार्टिसिपेट किया था। जिसमें नीदरलैंड पीपल शो अवार्ड के लिए नॉमिनेट हुआ था। जिसके बाद यह एक हेबिट बन गई और खुद को एक्स्प्लोर करने का मौका भी मिला।

आर्किटेक्चर में स्कोप

आर्किटेक्चर को इंडिया में बहुत कम लोग जानते है कि वो क्या होता है। इंजीनियर और आर्किटेक्चर दोनों अलग चीज है। इंडिया के बाहर इस फिल्ड में बहुत स्कोप है। गुजरात में इस चीज का बहुत बूम है और लोगों को पता हैं। जब तक लोग अवेयर नहीं होंगे तब इस फिल्ड का कोई फ्यूचर नहीं होगा। डेवलपमेंट के साथ इनोवेशन भी जरूरी है। सिंगापुर से कंपेयर करते है तो वहां भी बिल्डिंग है, लेकिन सस्टेनेबल डेवलेपमेंट को मैनेटेन करते है। वहां पर आर्किटेक्चर को लाइसेंस के लिए कम से कम 5 साल का अनुभव होना जरूरी है। तब लाइसेंस दिया जाता है। इस तरह से वहां पर आर्किटेक्चर बनना बहुत टफ है। यहां पर अगर इंटर्नस काम करते है तो स्टाइपेंड नहीं मिलता उसके बाद भी क्या ग्यारंटी। वहीं बाहर इंटर्नस को 2000 डॉलर स्टाइपेंड के तौर पर देना होते है। तो इस तरह से फिल्ड में करियर बनाने के लिए अवेयरनेस बहुत जरूरी है।

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कॉम्पिटिशन की स्टेप बाय स्टेप तैयारी करें 

कई बार ऐसा भी होता है कि रजिस्ट्रशन फीस बहुत ज्यादा होती तो पार्टिसिपेट नहीं कर पाते है तो उन कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेट करों जहां फीस ना हो और फिर ऐसे एक अमाउंट एकठ्ा करें। जिसके बाद नेशनल लेवल पर कम्पीट करें। फिर इंटरनेशल पर करें। पढ़ कर कभी प्रेक्टिकल नॉलेज नहीं मिल पाता है और जब फिल्ड में निकलते है तब समझ नहीं पाते है। तो इस तरह के कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेट करने से खुद को एक्सप्लोर करने के साथ कॉन्टेक्ट भी बढ़ेगे। जो इस फिल्ड में जरूरी भी है।

(मोहित नाटानी गेस्ट एडिटर के  रूप में  Youthens News  के साथ|)

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