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Wednesday, December 13th, 2017 08:19 PM
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थोक में कमाई, फिर भी ताजमहल परेशान




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प्रेम की विश्वप्रसिद्ध इमारत ताजमहल परेशान है। देश को सर्वाधिक मुद्रा देने वाले आगरा शहर को सुविधाओं के नाम पर हर सरकार ने ठगा ही है, तभी तो ताज देखने पहुंचने वाले पर्यटक गर्मी में नंगे पैर घूमते हैं, पीने का ठण्डा पानी तक मिला या नहीं, भगवान भरोसे। बीमार पर्यटक को इलाज की सुविधा मयस्सर नहीं, चाहें तो वहीं दम तोड़ दे। बैठने के लिए बेंच हैं, लेकिन अपर्याप्त। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र पर एक भी सुविधा ऐसी नहीं जो सुखदेय हो। न अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा है और न ताजमहल के पीछे सौंदर्य कायम रखने के लिए यमुना में बैराज भी नहीं।

ताजमहल की महत्ता क्या है, बताने की जरूरत नहीं। भारत भ्रमण पर आने वाला हर तीसरा पर्यटक आगरा आता है क्योंकि उसे ताजमहल देखना है। हर साल करीब पचास करोड़ की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा यही स्मारक कमाकर देता है। पर्यटन से विदेशी मुद्रा की कमाई का यह करीब चालीस फीसदी है। अगर आगरा किला, एत्माद्दौला, सिकंदरा, फतेहपुर सीकरी, दयालबाग जैसे अन्य टूरिस्ट स्पॉट भी जोड़ लें तो देशी-विदेशी पर्यटकों से कमाई का आधे से ज्यादा आगरा कमाकर देता है। लेकिन सौतेलापन ही है उसके साथ। सुविधाएं मांगने पर उसे हर बार धोखा ही मिला है। आगरा अरसे से अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा मांग रहा है, लेकिन राजनीतिक पैरोकारी की कमजोरी ने उसकी मांग को पूरा नहीं होने दिया।

पिछलेे वर्ष अखिलेश यादव सरकार ने वादा किया। जमीन के लिए सर्वेक्षण हुआ, हिरनगांव नामक क्षेत्र चिह्नित हुआ। सरकार ने पैसा अवमुक्त नहीं किया क्योंकि दिल्ली में राजनीति तेज हो गई थी। दिल्ली में ताकतवर होटल और अन्य पर्यटन इकाइयों की मजबूत लॉबी नहीं चाहती थी कि आगरा में अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा बने। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा पर आरोप लगे कि वह नहीं चाहते कि मांग पूरी हो। असल में, आगरा में अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा बनने से टूरिस्ट आगरा में ठहरने लगता और दिल्ली से अच्छा खासा बिजनेस छिन जाता। यह लॉबी सालों से सिर्फ पर्यटक को आगरा घुमाकर ले जाती है और रात में दिल्ली में ठहराती है। इससे पर्यटक से कमाई का ज्यादातर हिस्सा दिल्ली की जेब में आ जाता है।

– सात प्रतिशत बढ़ी पर्यटकों की संख्या
साल 2016 के जून में माह आगरा में पर्यटकों की संख्या लगभग डेढ़ लाख रही, जबकि हर वर्ष यह संख्या 70,000 से 90,000 रहती थी। आगरा में पर्यटन के लिए आने वाले विदेशियों का प्रतिषत लगभग सात प्रतिशत बढ़ गया। पर्यटन समिति की मानें तो यदि थोड़ी सुविधाएं बढ़ाई जाएं तो तो यह प्रतिशत इस वर्ष 8 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

– सरकार दे साथ तो 8 से 10 प्रतिशत बढ़ जाएगा व्यवसाय
2014 की में ताजमहल के माध्यम से 45 करोड़ रूपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की थी। 2016 में यह वृद्धि लगभग सात प्रतिशत तक हुई, यानि पिछले वर्ष आगरा टूरिज्म को प्राप्त मुद्रा लगभग 50 करोड़ रूपये। 2017 के लिए पर्यटन विभाग का अनुमान है कि यदि सौन्द्रर्यीकरण और व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाए तो यह प्रतिशत लगभग 8 से 10 प्रतिशत पहुंच सकता है। बदली सरकार से यह उम्मीद है कि आगरा के पर्यटन को बतौर शहर नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के फायदे पर देख सुधार करेगी।

टूरिज्म स्पेशलिस्ट डॉ. लवकुश मिश्रा कहते हैं, आगरा के लिए दिल्ली लॉबी ने एक्सप्रेस वे बनवा दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग को सिक्स लेन करा दिया ताकि पर्यटक आसानी से आगरा पहुंच जाए, घूमे और चैड़ी सड़कों से आसानी से दिल्ली लौट भी आए। हवाईअड्डा बनवा देते तो टूरिस्ट सीधे आगरा पहुंचता और वहीं ठहर जाता। डॉ. भीमराव अंबेडकर विभाग में इतिहास के प्रोफेसर डॉ. बीडी शुक्ला का कहना है कि  आगरा तो इतिहास ने बहुत कुछ दिया है। पर्यटक चाहे तो यहां तीन-चार दिन तक आसानी से घूमे और ठहरे लेकिन दिल्ली की ताकतवर लॉबी ऐसा नहीं चाहती।

विभाग ने पुरातत्व और पर्यटन विभाग की मदद से प्रयास किए। स्टेशनों पर पर्यटकों से संपर्क किया गया, आग्रह हुआ कि वह यहीं ठहरें लेकिन आउटपुट नहीं मिला। टूरिस्ट दिल्ली में उतरता है और वहीं होटल आदि सारी बुकिंग कराता है। आगरा आने पर उसके पास फैसला करने के लिए कुछ नहीं होता।

पर्यटन व्यवसायी राकेश सिंह सेंगर बताते हैं कि अभियानों के दौरान कुछ पर्यटकों ने अफसोस जाहिर किया। बौले कि हमें मालूम होता तो यहीं बुकिंग कराते। आईटी एक्सपर्ट उपेंद्र अवस्थी कहते हैं कि इंटरनेट की दुनिया की मदद लेने का विचार भी हुआ लेकिन वहां भी दिल्ली लॉबी के आक्रामक प्रचार ने आगरा के व्यवसायियों का हौसला तोड़ दिया। हालांकि कुछ व्यवसायी अभी भी हार नहीं मान रहे। पर्यटन संस्थाओं की नई बन रहीं वेबसाइट्स कोशिश कर रही हैं कि पर्यटकों के बीच आगरा का प्रचार किया जाए।

   लेखक – वर्षा पंवार

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