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Monday, September 24th, 2018 08:35 PM
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भुखमरी से जूझ रहा है ये देश, भूख लगने पर बच्चे चबा रहे हैं ये नुकसानदायक चीज




भुखमरी से जूझ रहा है ये देश, भूख लगने पर बच्चे चबा रहे हैं ये नुकसानदायक चीज



अब तक लीबिया, नाइजीरिया, सुडान, यमन और सीरिया जैसे देश ही भुखमरी के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब इस लिस्ट में दुनिया के एक ऐसे देश का नाम भी जुड़ गया है, जो बहुत विकसित है, बावजूद इसके यहां हर साल पांच में से एके बच्चा भूख से तड़प रहा है। ये देश और कोई नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया है।

नाम सुनकर शायद आप भी चौंक गए होंगे। लेकिन ये सच है। यहां हर दिन बच्चे भूख से बिलख रहे हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि भूख लगने पर यहां के बच्चे कागज तक चबाने के लिए मजबूर हैं। बीते 12 महीनों में ऑस्ट्रेलियाई बच्चों में से 20 फीसदी से ज्यादा भूखे रह रहे हैं।

ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ है एबीसी डॉट नेट एयू में। इस रिपोर्ट के अनुसार बीते 12 महीनों में हर पांच में से एक ऑस्ट्रेलियाई बच्चा भूखा रहा है। फूडबैंक की रिपोर्ट कहती है कि यहां बीते साल कई स्थितियों में बच्चों को भूखा रहना पड़ा है। इसमें से 18 फीसदी बच्चों को बिना ब्रेकफास्ट के ही स्कूल जाना पड़ा है।

29 फीसदी माता-पिता रहते हैं भूखे-

बच्चे अगर भूखे हों, तो आखिर माता-पिता को कैसे भूख लग सकती है। ऐसी ही कुछ स्थिति इन दिनों ऑस्ट्रेलिया की है। यहां 29 फीसदी माता-पिता भूखे रह रहे हैं, ताकि उनके बच्चों को भोजन मिल सके। फूडबैंक द्वारा 1 हजार माता-पिता पर किए गए सर्वे में पता चला कि 15 साल से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई बच्चों का 22 फीसदी ऐसे परिवार में रहता है, जो बीते 1 साल मे कभी न कभी खाने से वंचित रहे। वहीं 11 फीसदी को सप्ताह में कम से कम एक बार रात में बिना खाना खाए सोना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 9 फीसदी को दिन में कम से कम एक बार बिना भोजन के रहना पड़ा।

बच्चे ज्यादा भूखे-

फूडबैंक विक्टोरिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाव मैकनामारा के अनुसार व्यस्कों की तुलना में बच्चे ज्यादा भूखे पाए गए हैं। कुछ बच्चे कागज खा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह अपनी भूख मिटा सकें। यहां तक की माता-पिता खुद कहते हैं कि अगर उन्हें भूख लगती है तो उन्हें कागज चबाना होगा। डाव कहते हैं कि समाज का ये मुश्किल दौर हमारे लिए बहुत मुश्किल है।

जिलांग फूड रिलीफ सेंटर के मुख्य कार्यकारी कोलिन पीबल्स ने कहा है कि पिछले तीन सालों में सेवाओं की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हमारे पास एक सात साल की लड़की आई, जिसने पांच दिनों में कुछ भी नहीं खाया था।

वाकई में आज हमारे समाज में सबसे कमजोर हमारे बच्चे, हमारा भविष्य पीडि़त है। ये उन पर जुल्म है। ऐसे में सरकार को उनकी इस पीड़ा से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास जल्द से जल्द शुरू करने चाहिए।

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