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15/01/2018

झील के किनारे बीनता था कचरा, आज बन गया डल झील ब्रांड एम्बेसडर, मोदी भी हैं इनके कायल




झील के किनारे बीनता था कचरा, आज बन गया डल झील ब्रांड एम्बेसडर, मोदी भी हैं इनके कायलSocial

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देश में स्लम एरिया में रहने वाले बच्चों का जीवन नदियों का कूड़ा-कचरा बीनने में ही निकल जाता है। सच तो ये है कि उनकी आर्थिक हालत उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करती है। इनमें से कुछ ही होते हैं, जिनकी किस्मत अचानक बदल जाए और वे पॉपुलर व्यक्ति बन जाए। ऐसा ही हुआ जम्मू के रहने वाले बिलाल अहमद डार के साथ। 18 साल का बिलाल पिछले कई सालों से पढ़ाई छोड़कर एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील के किनारे कचरा बीनता है। परिवार का कमाऊ पूत है। पिछले चार साल से डल झाील पर आए सैलानियों द्वारा फेंके गए कचरे जैसे प्लास्टिक बोतल, फूड रैपर, ट्रैट्रापैक डिब्बे आदि को बीनता है, ताकि झील साफ और स्वच्छ बनी रहे। पर उसे क्या पता था कि जिन्दगी अचानक से यू टर्न ले लेगी और जिस झाील का वो कचरा बीनता है , उसी झील का ब्रांड एम्बेसडर बन जाएगा।

जी हां, श्रीनगर नगर निगम ने उनके इस काम से प्रेरित होकर डल झील और अन्य जलाशयों की बिगड़ती दिशाओं की तरफ लोगों का ध्यान एकत्रित करने के लिए बिलाल को इसका ब्रांड एम्बेसडर बना दिया है। नगरपालिका की तरफ से बिलाल के लिए महीने का आठ हजार रूपए मासिक वेतन तय किया गया है। बता दें कि बिलाल के इस काम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी काफी इंस्पायर हैं। उन्होंने अपने कार्यक्रम मन की बात में खासतौर से बिलाल की मेहनत की तारीफ की है। बिलाल कहते हैं कि जब त अधिकारी और पत्रकार हमारे गांव में नहीं पहुंचे तब तक मुझे नहीं पता था कि मोदीजी ने मेरे काम का जिक्र किया। मेरे लिए ये बहुत गौरव की बात है।

सुनिए बिलाल की कहानी-

पांच साल पहले बिलर के पिता मोहम्मद रमजान ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मां मुगली, बहन कुलसुमा, छोटी बहन रकसाना अब उसकी जिम्मेदारी हैं। घर का खर्च चलाने के लिए बिलाल ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। किस्मत तो देखिए कि वह वुलार झील पर कूड़ा -कचरा बीनकर लाता और कबाडिय़ों को बेचकर अपना पेट पालता। आज बिलाल वो काम कर रहा है जो काम सरकार सालों से नहीं कर पाई। बचपन से ही वुलर झील के प्रति बिलाल का लगाव रहा है। बिलाल कहता है कि – वुलर हमारी जिन्दगी है। यहां काम करके मैंने अपना जीवन गुजारा है और अब इसी झील की बदौलत मुझे डल झील का ब्रांड एम्बेसडर बनने का मौका मिला। बिलाल कहते हैं कि पिताजी के जाने के बाद अपने परिवार का घर-खर्च चलाने के लिए मुझे ऐसा करना पड़ा। मैंने अपने जुनून को कमाई का जरिया बनाया और झील किनारे कचरा बीनने लगा। इससे हमारी जिन्दगी में भारी बदलाव आया।

कूड़ा-कचरा बीनकर उसे बेचता था तो दिनभर के 100 रूपए कमा लेता था।

बिलाल ने कहा – कि अब मेरी पहली सैलरी मेरे खाते में आ चुकी है। अब मेरा जीवन स्तर बदलने वाला है और मैं और प्रभावी ढंग से काम कर सकता हूं।  झील के आसपास बसे लोगों से गुजारिया है कि झीलों और इसके तटों पर गंदगी न फैलाएं।

बिलाल की मेहनत के कारण ही उसके जीवन में ये बदलाव आया है और उसी पूरी उम्मीद है कि अब झीलों के पर्यावरण और परिस्थिति में बदलाव आएगा। वरना अभी तक तो झील में जानवरों के कंकाल तैरते नजर आते हैं, लेकिन मेरी मां कहती हैं कि कभी लोग इसी का पानी पीते थे और बीमार भी नहीं होते थे। अपनी यात्रा शुरू करने से पहले बिलाल ने कहा कि- अब मुझे पूरा यकीन है कि अब हर कोई छोटा-बड़ी झील को सुंदर और स्वच्छ बनाने में अपना सहयोग देगा। वुलर झील के अलावा अन्य झीलों को उनकी खोई हुई विरासत वापस मिलेगी।

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