राजधानी दिल्ली के सराफा बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी के भाव धड़ाम होकर 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए हैं, जिसमें एक ही दिन में करीब 150 रुपये की कमी देखने को मिली। यह गिरावट 5.08 प्रतिशत की है जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है। बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा असर किलो वाली ईंटों पर पड़ा है। एक किलोग्राम चांदी की कीमत में सीधे 15,000 रुपये की बड़ी टूट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसका भाव 2,80,000 रुपये रह गया है।
अस्थिरता का दौर और दिल्ली का बाजार
दिल्ली, जो चांदी के कारोबार का एक प्रमुख केंद्र है, वहां फिजिकल सिल्वर यानी भौतिक चांदी की मांग हमेशा बनी रहती है। यहां की मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है, इसलिए वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों और महंगाई का सीधा असर स्थानीय कीमतों पर दिखता है। पिछले 15 दिनों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 4 फरवरी 2026 को जहां चांदी में 14.29% की भारी उछाल देखी गई थी और भाव 3,200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए थे, वहीं 13 फरवरी तक आते-आते यह गिरकर 2,800 रुपये पर आ गया। 29 जनवरी को भी बाजार में करीब 8% की तेजी थी। कीमतों में यह अनिश्चितता स्पष्ट करती है कि चांदी का बाजार अभी स्थिर नहीं है।
वैश्विक रुझान और विशेषज्ञों की राय
सिर्फ भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चांदी की चाल में भारी उठापटक जारी है। साल 2025 में चांदी ने शानदार प्रदर्शन किया था और यह तेजी 2026 की शुरुआत तक जारी रही, जब कीमतें 100 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को भी पार कर गई थीं। हालांकि, हाल के दिनों में इसमें नरमी आई है और भाव गिरकर लगभग 85 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गए हैं। कीमती धातुओं में निवेश करने वाले, विशेषकर वे लोग जो अपने रिटायरमेंट के करीब हैं, इस स्थिति को लेकर असमंजस में हैं। सवाल यह उठता है कि क्या रिटायरमेंट के समय चांदी में पैसा लगाना सुरक्षित है?
रिटायरमेंट प्लानिंग और आय का संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि रिटायरमेंट के दौरान निवेश का मुख्य उद्देश्य नियमित आय होना चाहिए, और यहीं पर चांदी मात खा जाती है। एनकोर रिटायरमेंट प्लानिंग के संस्थापक मैथ्यू आर्गल बताते हैं कि चांदी एक ‘नॉन-इनकम प्रोड्यूसिंग एसेट’ है। यानी शेयरों या बॉन्ड के विपरीत, यह न तो कोई लाभांश (डिविडेंड) देती है और न ही ब्याज। रिटायरमेंट में जब नगदी के प्रवाह (कैश फ्लो) की सख्त जरूरत होती है, तब चांदी से नियमित कमाई की उम्मीद नहीं की जा सकती।
स्कॉलर एडवाइजिंग के वित्तीय विश्लेषक इवान मिल्स का कहना है कि चांदी में निवेश करना वास्तव में निवेश से ज्यादा सट्टेबाजी जैसा है। बुजुर्गों के लिए यह एक ‘स्पेकुलेटिव डायवर्सिफायर’ की तरह है, न कि एक भरोसेमंद निवेश। रिटायरमेंट में लोग स्थिरता खोजते हैं, जो चांदी देने में अक्सर नाकाम रहती है।
ऐतिहासिक गिरावट और जोखिम
चांदी की कीमतों में होने वाला तीव्र परिवर्तन ही इसका सबसे बड़ा जोखिम है। मोनेटरी मेटल्स के प्रबंध निदेशक हिरेन चंदारिया चेतावनी देते हैं कि तनावपूर्ण बाजार स्थितियों में चांदी अक्सर शेयर बाजार के साथ ही नीचे की ओर रुख करती है। इसमें कम समय में दोहरे अंकों की गिरावट आना कोई नई बात नहीं है। भले ही इसने कुछ चक्रों में अच्छा मुनाफा दिया हो, लेकिन इसकी गिरावट भी उतनी ही तेज होती है।
एक्सिस फाइनेंशियल के अध्यक्ष क्रिस बर्कल इतिहास का हवाला देते हुए बताते हैं कि 80 के दशक की शुरुआत में चांदी 50 डॉलर के शिखर से गिरकर 5 डॉलर से भी नीचे आ गई थी। यह 90% की गिरावट थी। अगर आज के संदर्भ में देखें, तो यह ऐसा ही होगा जैसे 80 डॉलर वाली चांदी गिरकर 8 डॉलर पर आ जाए। यह किसी भी निवेशक के लिए, विशेषकर एक रिटायर्ड व्यक्ति के लिए, आर्थिक रूप से बेहद कष्टदायी हो सकता है।