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Tuesday, September 18th, 2018 11:12 PM
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इन लोगों ने Ecofriendly Ganesh बनाकर बचाया पर्यावरण, आप भी लें सीख




इन लोगों ने Ecofriendly Ganesh बनाकर बचाया पर्यावरण, आप भी लें सीखSpiritual



हर साल की तरह इस साल भी गणेशजी के आगमन की तैयारियां बड़ी जोरों-शोरों से हो रही हैं। हर साल पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए ईकोफ्रेंडली गणेश बनाने की अपील की जाती है। लेकिन आज भी कई मूर्तियों को प्लास्टर ऑफ पेरिस और रसायनिक रंगों के इस्तेमाल से तैयार किया जाता है, इसलिए इन मूर्तियों का विर्सजन समुद्री जीवन को काफी नुकसान पहुंचाता है। लेकिन पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिए कई लोगों ने अद्भुत तरीके से ईकोफ्रेंडली गणेश की मूर्ति स्थापित की , जो पर्यावरण के लिए अनुकूल है तो आइए आज हम आपको देश के कई हिस्सों में स्थापित हुईं उन ईकोफ्रेंडली मूर्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सुरक्षित पर्यावरण के लिए एक मिसाल है। आप भी इन लोगों से सीख लेते हुए अगले साल से इन आइडियाज को अपनाकर ईकोफ्रेंडली मूर्ति तैयार करवा सकते हैं और अपने पर्यावरण को बचा सकते हैं।

प्लांटा गणेश-
दत्ताद्रि कोठ़ुर नाम के एक शिल्पकार बताते हैं कि इस बार उन्होंने भगवान गणेश की ऐसी मूर्तियां बनाई हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से काफी सेफ है। ये सभी मूर्तियां चिकनी मिट्टी से बनी हैं। इन मूर्तियों की खास बात ये है कि इनमें पेड़ के बीज हैं। अब आप भी सोच रहे होंगे कि ये कैसे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाएगा। तो बता दें कि त्योहार के खत्म होने पर इन मूर्तियों पर पानी डाले जाने पर ये मिट्टी में घुल जाएगी और पौधों के रूप में बड़े हो जाएंगे।

ईकोफ्रेंडली गणेश प्रतिमा बना रहे हैं मुंबैया शिल्पकार, आप भी अपना सकते हैं ये तरीका

कैंडी रैपर गणेशा-

पिछले साल मुंबई के मलाद में एक पंडाल में कैंडी रैपर गणेशा को स्थापित किया गया। देखने वाले दंग थे कि आखिर इस तरह की ईकोफ्रेंडली मूर्ति आखिर बनाई कैसे गई। इस साल बालाकुल्ला वेस्ट के एक समाज ने इन लोगों से सीख लेते हुए कैंडी रेप गणेश स्थापित करने का आइडिया लिया और विभिन्न रंगों में कैंडी रैप को गणेशजी का नया रूप दिया।

फिश फ्रेंडली गणेशा-

मुंबई के एक एनजीओ द्वारा इजाद किया गया ईकोफ्रेंडली गणेश बनाने का ये तरीका वाकई कमाल है। स्प्राउट्स इनवायरमेंटल ट्रस्ट ने गणेशजी की ऐसी मूर्ति तैयार की है, जिसके विसर्जित होने के बाद मछलियां इन्हें खा सकेंगी। इकोलॉजिस्ट आनंद पेंधारकर का कहना है कि इन मूर्तियों को क्ले और मछलियों के खाने जैसे मक्का, पालक, गेहूं , सब्जी और पाउडर जैसे भोजन के साथ तैयार किया गया है। मूर्तियों को आकार देने के लिए बायोडिग्रेडेबल कार्बनिक कलर्स जैसे हल्दी, चंदन और गेरू का इस्तेमाल किया है।

गन्ना गणेश-

तमिल नाडु के मुलुंड के एक परिवार ने गन्ने के गणेशजी बनाकर सभी लोगों के लिए एक मिसाल कायम की है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार ये परिवार हर साल गन्ने से बने गणेशजी की पूजा करता है। खास बात से है कि ये ही गन्ना विसर्जन के दिन सभी लोगों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। पिछले साल इस परिवार ने दो दन गन्नों से गणेशजी की पूर्ति तैयार कर इसकी पूजा की थी।

फिटकरी के गणेश-

पुणे स्थित एक कलाकर विवेक कमबल ने फिटकरी से ईकोफ्रेंडली गणेश की मूर्ति तैयार की। अच्छी बात ये है कि फिटकरी पानी में जल्दी घुल जाती है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता।

मसाला गणेश-

मुंबई की एक कम्यूनिटी ने मसालों और समाचार पत्रों से 9 फुट लंबी गणेशजी की मूर्ति तैयार करके समाज को एक नया आइडिया दिया है। मलाद में श्री साईं दर्शन मंडल के लोगों ने 190 किलो की इस प्रतिमा को 9 किग्रा लौंग, 20 किलो दालचीनी, 6 किलो मिर्च और 1 किलो सरसों के बीजों का इस्तेमाल कर गणेशजी की मूर्ति तैयार की है।

आप भी इन लोगों के अद्भुत आइडिया को अपनाकर अगले साल से ऐसे ही ईकोफ्रेंडली गणेश स्थापित कर पर्यावरण को प्रदूषित कर एक नई मिसाल कायम कर सकते हैं।

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