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Wednesday, August 15th, 2018 12:15 PM
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जानते हैं नंदी के कान में क्यों मांगते हैं “वरदान”, इसके पीछे है ये मान्यता




जानते हैं नंदी के कान में क्यों मांगते हैं “वरदान”, इसके पीछे है ये मान्यताSpiritual



सावन का महीना चल रहा है। ऐसे में लोग हर रोज शिवमंदिर जरूर जाते होंगे। आपने अक्सर देखा होगा कि लोग जब भी शिव मंदिर में जाते हैं, वहां उनकी शिवलिंग के सामने मौजूद नंदी के कान में कुछ कहते हैं। ताकि उसकी मनोकामना पूरी हो सके। लेकिन कभी आपने सोचा है कि शिवजी के मङ्क्षदर में जाकर लोग नंदी के ही कान में क्यों कुछ कहते हैं, शिवजी से क्यों नहीं। तो इस परंपरा के पीछे भी एक मान्यता है, जिसके बारे में हम आपको बताते हैं।

जहां भी शिव मंदिर होता है वहां नंदी की स्थापना जरूर होती है। क्योंकि नंदी भगवान शिव के परम भक्त हैं। इसलिए जब भी कोई भक्त यिाव मंदिर आता है तो नंदी के कान में कुछ कहता है। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव तपस्वी हैं और वे हमेशा समाधि में रहते हैं। ऐसे में उन तक हमारे मन की बात नहीं पहुंच पाती है। इसलिए नंदी ही आपके बात भगवान शिव तक पहुंचाते हैं।

शिवपुराण के अनुसार, शिलाद नाम के एक मुनि थे, जो ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने उनसे संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद मुनि ने संतान भगवान शिव की प्रसन्न कर अयोनिज और मृत्युहीन पुत्र मांगा। भगवान शिव ने शिलाद मुनि को ये वरदान दे दिया। एक दिन जब शिलाद मुनि भूमि जोत रहे थे, उन्हें एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा।

एक दिन मित्रा और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम आए। उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु हैं। यह सुनकर नंदी महादेव की आराधना करने लगे। प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और कहा कि तुम मेरे ही अंश हो, इसलिए तुम्हें मृत्यु से भय कैसे हो सकता है? ऐसा कहकर भगवान शिव ने नंदी का अपना गणाध्यक्ष भी बनाया।

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