Saturday, November 18th, 2017 08:07 PM
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‘‘आत्महत्या परेशानी का हल नहीं’’ अभियान चलाने वाली बाइकर सना इकबाल की मौत




‘‘आत्महत्या परेशानी का हल नहीं’’ अभियान चलाने वाली बाइकर सना इकबाल की मौत

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सना इकबाल भारत की मशहूर वुमेन बाइकर में से एक थी। हाल ही में उनकी हैदराबाद में एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई। इस दुनिया में वह भले ही जरूर नहीं रहीं लेकिन उनके द्वारा किया गया काम आज भी युवाओं को उतना ही प्रोत्साहित करेगा जितना उनके रहते किया है। सना इकबाल ने देश में खुदकुशी और डिप्रेशन के खिलाफ मुहिम चलाई थी। जिसका मुख्य मकसद था युवाओं को उस अवसाद और डिप्रेशन से बाहर लाना जो इस वजह से आत्महत्या कर रहे हैं। कभी वह खुद भी इन सभी चीजों का शिकार रह चुकी, जो खदु भी आत्महत्या करने वाली थी लेकिन इसे उन्होंने राह नहीं चुनते हुए एक नई राह चुनी थी जिसके साथ युवाओं को भी नई राह दिखाई।

सना इकबाल ने एक बार इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वह अपनी इस तरह की रोज की जिंदगी से परेशान हो कर बाइक लेकर आत्महत्या करने के लिए निकल गई थी। लेकिन रास्ते में एक बाइक सवार ने मुझ से कहा था कि आप बहुत अच्छी बाइक चलाती है। उस तारीफ के बाद से मुझमें एक बार फिर से मेरा खोया आत्मविश्वास लौट आया। इसके बाद मैंने अपनी ड्राइविंग पर ज्यादा ध्यान दिया था।’’

38000 किमी तक सफर तय किया

बाइकर सना इकबाल जो खुद इसका शिकार थी उससे उभर कर उन्होंने कम से कम देश के 44 से ज्यादा शहरों में 38 हजार किमी तक सफर तय कर ‘‘सुसाइड इज नॉट द सॉल्यूशन फॉर डिप्रेशन मतलब खुदकुशी डिप्रेशन का समाधान नहीं है’’ यह मुहिम चलाई थी। सना ने कई जगहों पर जाकर लोगों को इस बारें में अवेयर किया था। कॉलेजों में जाकर स्पीच दी थी। दूसरों को सिखाया जिंदगी खूबसूरत है और खुदकुशी परेशानी का हल नहीं है।

घरेलू उत्पीड़न की शिकार भी हुई

सना इकबाल की 27 साल की उम्र में शादी हो गई थी। एक साल तक चली यह शादी जिसके बाद टूट गई थी। इसका मुख्य कारण था घरेलू हिंसा, पति के द्वारा टार्चर किया जाना। उसके बाद उन्होंने तलाक ले लिया था। तलाक के कुछ दिन बाद ही उन्हें एक बेटा हुआ जिसके वजह से उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट ट्रेनर की नौकरी छोड़ दी थी।

खुदकुशी डिप्रेशन का समाधान नहीं

सना ने मनोविज्ञान की पढ़ाई की थी। खुद को डिप्रशेन से बाहर निकालने के बाद उन्होंने इससे जुड़ा एक अभियान चलाया था। ताकि लोगों की मदद कर सकें। उनकी की गई पढ़ाई उन्हें अपने इस अभियान में काफी काम आई। जिसके द्वारा लोगों की काउंसिलिंग करने लगी और उस डिप्रेशन से बाहर निकालने में मदद की। कल तक जो लोगों की जिंदगी को बचाने ने निकली थी वह आज हम लोगों के बीच नहीं हैं। लेकिन उनके यह विचार युवाओं को जरूर याद रहेंगे।

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