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Wednesday, December 13th, 2017 08:37 PM
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Fortune 2017 प्रतिष्ठित लिस्ट में 5 युवा भारतीयों ने बनाई जगह




Fortune 2017 प्रतिष्ठित लिस्ट में 5 युवा भारतीयों ने बनाई जगहBusiness

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इस वर्ष फॉर्च्यून 40 अंडर में 40 लिस्ट में पांच भारतीयों के नाम शामिल हैं। फॉर्च्यून की लिस्ट में बिज़नेस की दुनिया के सबसे प्रभावशाली युवाओं की वार्षिक रैंकिंग की जाती है। इसमें लिस्ट किए गए युवा 40 वर्ष के अंदर के ही गिने जाते हैं। फॉर्च्यून 40 अंडर हर साल जारी की जाती हैं। इस बेहद प्रतिष्ठित सूची में उन लोगों को जगह दी गई है जिन्होंने अपने काम से अन्य को प्रोत्साहित किया है।

फॉर्च्यून की 2017 ‘40 अंडर 40’ की सूची सर्वाधिक प्रभावी युवा लोगों की सालाना सूची हैं। इस सूची में फ्रांस के 39 साल के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रोन पहले पायदान पर हैं। मैक्रोन नेपोलियन के बाद सबसे युवा नेता हैं। इन्होंने मई मे राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की। भारतीय सूची के मूल लोगों में 26 साल की दिव्या नाग, 31 साल के ऋषि शाह, 32 साल के शारदा अग्रवाल तथा सैमसोर्स की सीईओ तथा संस्थापक लीला जाना शामिल है, 38 वर्षीय वरादकर सूची में पाचवें पायदान पर हैं। उनके पिता का जम्न भारत में हुआ था।

सूची में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग दूसरे स्थान पर हैं। उनके बाद एयरबीएनबी के के मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा सह-संस्थापक ब्रायन चेसकी, नाथन ब्लेचारासाइक, जोइ गेबिया चौथे तथा टेनिस स्टार सेरेना विलयम्स सातवें स्थान पर हैं।

दिव्या नाग 27 वें पायदान की जरूरत हैं। वह एपल की महत्वकांक्षी रिसर्चकिट और केयर किट कार्यक्रम को देखती हैं और संबंधित लोगों को स्वास्थ्य संबंधित एप के विकास के लिये प्रोत्साहित करती हैं। फार्चून के अनुसार, दिव्या ने स्टेम सेल शोध स्टार्टअप की स्थापना की और चिकित्सा क्षेत्र में निवेश को गति दी।

ऋषि शाह तथा शारदा अग्रवाल 10 साल से अधिक समय से स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी कंपनी आउटकम हेल्थ का जिम्मा संभाल रही हैं। सूची में शाह तथा शारदा 38वें स्थान पर हैं, दोनों ने 40,000 से अधिक डाक्टरों के कार्यालयों में टच स्क्रीन और टैबलेट लगाया जो संबंधित चिकित्सा सूचना तथा संबंधित जानकारी देता हैं।

फार्चून की सूची में लीला 40वें स्थान पर हैं। भारतीय प्रवासी की पुत्री लीला का गैर-सरकारी संगठन सैमासोर्स इस साल 1.5 करोड़ डॉलर हासिल करने के रास्ते पर है। वह वैश्विक स्तर पर गरीबी समाप्त करने के लिये काम पर जोर देती हैं न कि परमार्थ कार्यों पर।

 

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