Monday, November 20th, 2017 09:15 AM
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किसान के बेटे ने घर में बनाया उडनखटोला




किसान के बेटे ने घर में बनाया उडनखटोला

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राजेश कुमार, हिसार. यदि हौसला हो तो सपनों की उड़ान भरने के लिए पंख अपने आप लग जाते हैं। फिर उसके सामने बड़ी से बड़ी बाधा बहुत छोटी नजर आती हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है हिसार के गांव ढाणी मोहब्बतपुर निवासी बीटेक के छात्र कुलदीप टाक ने। 23 वर्षीय कुलदीप ने देसी जुगाड़ से उडऩे वाली अनोखी फ्लाइंग मशीन तैयार की है। ये मशीन 1 लीटर पेट्रोल में करीब 12 मिनट तक आसमान में उड़ती है। इसे पैराग्लाइडिंग फ्लाइंग मशीन या मिनी हैलीकॉप्टर का नाम दिया गया है।

कुलदीप ने 3 साल की कड़ी मेहनत के बाद पैराग्लाइडिंग फ्लाइंग मशीन को आसमान में उड़ाने में सफलता पाई है। मशीन दिखने में भले ही साधारण लगती हो, लेकिन ये उड़ान गजब की भरती है। ढाणी मोहब्बतपुर निवासी कुलदीप के पिता प्रहलाद सिंह टाक गांव में खेतीबाड़ी करते है। चंडीगढ़ से बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब कुलदीप इसी प्रोजैक्ट पर कार्य कर रहा है। फ्लाइंग मशीन को बनाने में गांव आर्यनगर निवासी सतीश कुमार का भी योगदान रहा।

टंकी फुल हो तो 1 घंटे की उड़ान

कुलदीप ने बताया कि मशीन को तैयार करने में करीब अढ़ाई लाख रुपये का खर्च आया है। इस फ्लाइंग मशीन से किसी को खतरा नही है। मशीन में बाइक का 200 सीसी इंजन लगाया गया है। इसके अलावा लकड़ी का पंखा लगा हैं। साथ ही साथ छोटे टायर लगाए हैं। ऊपर पैराग्लाइडर लगाया गया है जो उड़ान भरने और सेफ्टी के साथ लैंडिंग करवाने में सहायक है। यह मशीन 10 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है। गांव चौधरीवाली से आसपास के गांवों में कुलदीप ने अब तक करीब 2 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरी है। मशीन पेट्रोल से उड़ती है जिसमें 5-6 लीटर का टैंक है। पूरी फ्लाइंग मशीन में स्थानीय स्तर के सामान का प्रयोग किया गया है। यानी कुल मिलाकर इस मशीन की टंकी फुल होने के बाद आप 1 घंटे तक आसमान में उड़ सकते हैं।

पिता बोले, रातभर लगा रहता था

कुलदीप ने बताया कि उसके इस सपने को साकार करने में उसके परिवार का सबसे बड़ा योगदान है। उसके पिता प्रहलाद सिंह टाक व सहयोगी सतीश आर्यनगर ने भी उसकी मेहनत को हौसला दिया। पिता प्रहलाद सिंह खेत में रहते है। कुलदीप के पिता प्रहलाद सिंह टाक ने बताया कि उसका बेटा देर रात इस मशीन को बनाता रहता था। उसके मना करने के बावजूद भी कुलदीप मशीन को पूरा करने में लगा रहा। करीब 6 माह पहले गोवा में पायलट की 3 माह ट्रेनिंग की थी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी कुलदीप का फ्लाइंग मशीन बनाने का जुनून कम नहीं हुआ। वहीं कुलदीप के सहयोगी सतीश आर्यनगर ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि कुलदीप उन्हें हवा में जरूर सैर कराएगा।

सहयोगी सतीश ने बताया हालांकि इससे पहले भी उसने एक एयरक्राफ्ट तैयार किया था, लेकिन वो ट्रायल के दौरान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बावजूद भी उसने हिम्मत नहीं हारी। फिर से पैराग्लाडिंग फ्लाइंग मशीन बनाने का निर्णय लिया और आज वो इसमें कामयाब हो ही गया। फिलहाल इस मशीन में केवल 1 ही व्यक्ति बैठ सकता है, लेकिन कुलदीप ने दावा किया है कि कुछ ही माह में ये मशीन 2 लोगों को लेकर उड़ेगी, जिसमें सबसे पहले वो अपने पिता को बैठाएगा।

कुलदीप की मां कमला ने बताया कि बेटे को हवा में उड़ता देखकर बहुत खुशी हो रही है बेटे ने बड़े साल मेहनत की आखिर अब जाकर इसका फायदा मिला है। हमें काफी उम्मीद है की हमरा बेटा और भी ऊंची उड़ान भरेगा।

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