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कर्नाटक चुनाव 2018: 1985 से अब तक सत्ता में वापस नहीं लौटी कोई पार्टी




कर्नाटक चुनाव 2018: 1985 से अब तक सत्ता में वापस नहीं लौटी कोई पार्टीPolitics



कर्नाटक में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है, वहीं अब कर्नाटक सरकार के बारे में कई बातें हो रही हैं। ये चुनाव वाकई में महत्वपूर्ण हैं, वो इसलिए क्योंकि इन चुनावों को अगले साल होने वाले लोकसभा का सेमिफाइनल माना जा रहा है, वहीं इसलिए भी क्योंकि अगर यहां पर भी कांग्रेस हार जाती है तो भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी सिर्फ पंजाब प्रांत तक ही सीमित रह जाएगी और पूरे देश में बीजेपी की सत्ता काबिज हो जाएगी।


बीजेपी के लिए भी ये चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जब से बीजेपी की सरकार आई है, तब से वह कांग्रेस मुक्त भारत की बातें कर रही हैं, ऐसे में कांग्रेस को पीछे छोड़कर बीजेपी अपनी मनोवैज्ञानिता का प्रमाण देना चाहती है।

1985 में बनी थी जनता दल सरकार-

बात अगर इतिहास की करें तो 1985 में जनता दल पार्टी ने अपनी सरकार बनाई थी। इसके पांच साल बाद ये पार्टी अपनी सरकार बनाने में नाकामयाब रही। इसके बाद 1989 में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 178 सीटें जीतकर सरकार बनाई और फिर पांच साल तक नई-नई सरकारें आती रहीं। कांग्रेस के हालात 1994 में बदतर हो चुके थे। जितनी सीटें जीतकर वो सत्ता में आई थी, इस साल 34 सीटों पर ही सिमट गई। इस साल जनता दल फिर बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। इस चुनाव में जेडीएस ने 115 सीटें जीतकर सत्ता में अपनी जगह बनाई।

इसके बाद अलगा विधानसभा चुनाव साल 1999 में हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस को 132 सीटें मिली थी और उसने फिर बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की लेकिन उसके बाद 2004 विधानसभा चुनाव में फिर कांग्रेस 65 सीटों पर सिमट गई।

2004 में बनी थी गठबंधन सरकार-

2004 में ऐसा पहली बार हुआ कि यहां गठबंधन सरकार बनी। इस समय किसी भी पार्टी को राज्य में बहुमत नहीं मिला था। तब बीजेपी 79 सीटों के साथ जीतकर देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। लेकिन कांग्रेस जिसने 65 सीट जीते थे उसने जनता दल सेक्युलर जिसने 58 सीटें जीती थी उसके साथ गठबंधन में सरकार बनाई और धर्मसिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। यह पहला मौका था जब राज्य में गठबंधन सरकार बनी।

2008 में राज्य में बीजेपी ने 110 सीटें जीती थी। बीजेपी बहुमत के आंकड़े से 3 सीटे पीछे रही लेकिन उसको छह निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन मिला और उसने राज्य में सरकार बनाई। अब आखिरी विधानसभा चुनाव 2013 की बात करें तो कांग्रेस ने 122 सीटों के साथ बहुमत की सरकार बनाई थी। राज्य में सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री की कमान मिली।

एक बार भी जनता ने नहीं चुनी सरकार-

इन आंकड़ों को जानने के बाद ये बात तो स्पष्ट है कि 1985 से अब तक कोई भी पार्टी सत्ता में वापस नहीं लौटी है। हर साल सत्ता में बदलाव हो रहा है। लेकिन कर्नाटक से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू ये है कि अब तक जितनी भी सरकारें बनी हैं, किसी को भी राज्य की जनता द्वारा नहीं चुना गया है।

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