Saturday, November 18th, 2017 05:57 PM
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30 बार फेल होकर, हैदराबाद के लड़के ने कर दिया सरकार का जरूरी काम




30 बार फेल होकर, हैदराबाद के लड़के ने कर दिया सरकार का जरूरी काम

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कहते हैं कि ‘‘लहरों से डरकर बाधा पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’’ इन्हीं पंक्तियों को यथार्थ किया है अहमदाबाद के स्टूडेंट चक्रधर आला ने। उन्होंने हाल ही में बुलेट ट्रेन के लिए लोगो बनाया है जो सिलेक्ट हो गया है मतलब अब उनका बनाया लोगो ही हर बुलेट ट्रेन पर दिखेगा। आपको ये सब बहुत आसान लग रहा होगा लेकिन चक्रधर के लिए ये काफी मुश्किल भरा था। आइए आपको बताते हैं उनके संघर्ष की कहानी…

# हमारी तरह आम छात्र

चक्रधर आला नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के सेकंड ईयर के छात्र है और यकीन मानिए ये भी आपकी और हमारी तरह आम छात्र ही है लेकिन अपने हुनर और मेहनत के दम पर ये काफी ख़ास बन गए हैं। चक्रधर ने बुलेट ट्रेन के लिए लोगो डिजाइन करके बहुत बड़ा काम किया है।

# 30 बार हुआ फेल

चक्रधर के करियर के लिए ये काफी बड़ी उपलब्धि है लेकिन ये उपलब्धि उन्हें ऐसे ही नहीं मिली। मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी भारत सरकार के लिए करीब 30 बार लोगो डिजाइन करके भेजे लेकिन उनके बनाए लोगो किसी को पसंद नहीं आए। ये 31वीं बार था जब उन्होंने सरकार के लिए लोगो बनाया और उसने सरकार का दिल जीत लिया।

# बुलेट ट्रेन पर अपना लोगो देखूंगा

चक्रधर ने बताया कि वे बेहद उत्साहित है और बुलेट ट्रेन से संबद्ध हर सरकारी दस्तावेज, लेटर हेड और सूचना पत्रों पर अपनी कृति देखने का उसे ख़ास इंतजार है। उसने कहा कि अगर कोई इस लोगो को करीब से देखेगा तो उसे ट्रेन जैसी आकृति नज़र आएगी जिसमें बनाई गई बिंदु हर स्टेशन और संबंधित मार्ग को दर्शाती हैं।

# डिजाइन में कई पहलू समाहित है

उन्होंने कहा कि उसके डिजाइन में देश की इस हाई स्पीड ट्रेन के कई पहलुओं को समाहित किया गया है। चक्रधर ने कहा, ‘‘मेरा डिजाइन दिखने में बेहद सरल है लेकिन इसमें गहरे अर्थ छिपे हैं। चीता जहां तेज गति, विश्वसनीयता और भरोसे को दर्शाता है वहीं यह लोगो उसके शरीर पर उकेरे गए रेल नेटवर्क के साथ किसी पारंपरिक ट्रेन का मानचित्र भी प्रदर्शित करता है।

# दोस्त कहते हैं ‘लोगोमेन’

आपको बता दें कि चक्रधर मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले हैं उनके पिता एक नौकरशाह हैं और उनकी माता शहर के एक स्कूल में प्रिंसीपल हैं। उसने कहा कि लोगो डिजाइन करने के प्रति धुन के कारण उसके मित्र उसे ‘लोगोमेन’ कहते हैं। उसने कहा, ‘‘मेने स्वचछ भारत और बेटी बचाओ जैसे कई कार्यक्रम का लोगो बनाया है लेकिन ट्रेननुमा चीता की डिजाइन मेरी पहली जीत है। मैं इससे बेहतर कर सकता था।’’

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