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Thursday, August 16th, 2018 05:53 AM
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IIM रायपुर का तीसरा HR शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक समाप्त हुआ




IIM रायपुर का तीसरा HR शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक समाप्त हुआEducation & Career



आईआईएम रायपुर ने अपने तीसरे एचआर शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन भी महत्वाकांक्षी प्रबंधकों को नए विचार प्रदान किए गए। इस साल के संस्करण का विषय ‘डिजिटल युग में एचआरएम: तालमेल औप क्षमका निर्माण’ था और दिन के वक्ताओं ने कुछ आकर्षक विचार प्रस्तुत किए जिन्होंने युवाओं को चकित कर दिया। दिन के कार्यक्रमों में दो पैनल चर्चाएं और एक समापन सत्र शामिल थे।

दिन की पहले पैनल ने ऐसे विषय पर चर्चा की जो हाल ही में बहुत चर्चित कर रहा है – ‘मानव संसाधन में डिजिटलकरण: संगठनात्मक स्थिरता के लिए एक नई सफलता’। पैनल का संचालन राष्ट्रीय मानव संसाधन नेटवर्क के महानिदेशक श्री धनंजय सिंह ने किया, और अन्य शामिल सदस्य थे श्री जतिंदर साल्वान, हेड एचआर, सोसिएट जेनेरेल ग्रुप, सुश्री सास्वती सिन्हा, हेड एचआर, चेइल वर्ल्डवाइड इंक (सैमसंग),और श्री संजय वर्मा, सीपीओ और ग्लोबल हेड एचआर, यूनिपार्ट्स समूह। पैनल ने बहुत सारी रोचक जानकारी साझा की, और दर्शक इस विकासशील दुनिया में प्रासंगिक और चुस्त रहने की आवश्यकता जैसे विचारों से विशेष रूप से आकर्षित हुए। श्री धनंजय सिंह ने यह समझाते हुए चर्चा शुरू की, कि “सक्रिय रणनीति विश्लेषण का महत्व जहां एचआर रणनीति निर्माण और कार्यान्वयन में रणनीति भागीदार हों”।

पैनल ने यह भी चर्चा की कि कैसे कर्मचारियों जुड़ाव का संबंध ऊर्जात्मक रिश्ते का है और कैसे सक्रिय और प्रतिक्रियाशील उपायों को अपनाने की आवश्यकता है ताकि यह ऊर्जा एक ही दिशा में संरेखित हो। सुश्री सास्वती सिन्हा ने “अनलर्निंग, रिलर्निंग और लर्निंग अगेन” के महत्व के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन पेशेवरों को एसएमएसी (सोशल, मोबाइल, एनालिटिक्स, क्लाउड) और वीयूसीए (अस्थिर, अनिश्चित, परिसर, संदिग्ध) दुनिया में फिट होने के लिए लगातार स्वयं के पुर्नअविष्कार की जरूरत है। श्री संजय वर्मा ने कहा कि कार्य जनसांख्यिकी बदल रही है और उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एचआर अब “ग्रांडमदर या संगठन के मूल्य सहेजने वाला विभाग नहीं हैं। दुनिया एक आदर्श बदलाव से गुजर रही है। अपेक्षाएं बदल रही हैं और यह समय एचआर के लिए अवसरों की एक बड़ी पेशकश प्रदान करता है।” श्री जतिंदर साल्वान ने न सिर्फ लोगों का स्तर ऊपर उठाने की बात की बल्कि प्रौद्योगिकी को उनके स्तर तक कम करने की एक दिलचस्प अवधारणा पर भी बात की। उन्होंने कर्मचारियों और उपभोक्ताओं पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला।श्री धनंजय सिंह ने यह कहते हुए चर्चा समाप्त की और कहा कि “रोबोट मनुष्यों को प्रतिस्थापित नहीं करेंगे बल्कि मनुष्यों के अंदर के रोबोटों को प्रतिस्थापित करेंगे”।

चर्चा के बाद शिखर सम्मेलन की अंतिम पैनल चर्चा, ‘श्रमिक स्वचालन के माध्यम से कॉर्पोरेट परिवर्तन’ विषय पर हुई। यह विषय वक्ताओं और दर्शकों दोनों के लिए विशेष रुचि वाला साबित हुआ, और शामिल सभी लोगों ने अनुभव का आनंद लिया। पैनल के लिए मॉडरेटर श्री अनिल कुमार मिश्रा, सीएचआरओ, Magicbricks.com थे और पैनलिस्टों में शामिल थे – सुश्री देबोलिना दत्ता, वीपी एचआर और सीएसआर, श्नाइडर इलेक्ट्रिक ल्यूमिनस इंडिया, श्री प्रवीण कामथ, जीएम और एचआर हेड, ग्लोबल डिलिवरी इनेबलमेंट, विप्रो लिमिटेड, श्री नरेश कुमार पिनिसेटी, प्रेसिडेंट एचआर, दीपक फर्टिलाइजर्स और पेट्रोकेमिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, और श्री धर्म रक्षित, हेड एचआर, हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड। चर्चा इंटरैक्टिव थी और समकालीन तकनीकी प्रगति जैसे बिग डेटा, हडूप, एयरबीएनबी, आईबीएम वाटसन, सिलिकॉन चिप्स इत्यादि के उदाहरणों से भरी थी।

सुश्री देबोलिना दत्ता ने कहा कि स्वचालन अनावश्यक, नीरस काम को कुशलता से कर देगा, लेकिन संगठनों को एक तकनीक का चयन करने के लिए सही प्रेरणा की आवश्यकता है न की प्रवृत्तियों का पालन करने की। श्री प्रवीण कामथ ने कोक और पेप्सी के चालक रहित ट्रक और रोबोटिक सर्जिकल हाथों के उदाहरणों के माध्यम से चित्रित किया कि “कुछ भी जो सायक्लिक, लीनियर या नॉनलीनियर है वह बॉट्स द्वारा किया जा सकता है लेकिन जैविक, भूमि-विषयक या भावनात्मक कुछ भी नहीं “।

श्री नरेश कुमार पिनिसेटी ने कहा, “लोगों की रक्षा करो और नौकरी की नहीं” उन्होंने समझाया कि अगर लोगों को हटा दिया तो स्वचालन और तकनीक भी काम नहीं करेगी। उन्होंने प्रदर्शन प्रबंधन एप्लिकेशन डार्विन बॉक्स, और अमेज़ॅन के वेयरहाउसिंग के लिए इस्तेमाल किए गए किवा रोबोट के बारे में भी बात की। श्री धर्म रक्षा ने लगातार स्तर सुधारने और “बाधाओं” को अनुकूलित करने की आवश्यकता पर जोर देकर चर्चा आगे बढ़ाई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी कैसे काम को और सुविधाजनक बनाती है। अंततः श्री अनिल कुमार मिश्रा ने यह कहते हुए चर्चा समाप्त की, कि भले ही कुछ नौकरियां समाप्त हो जाएंगी, लेकिन उच्च स्तरीय नौकरियों के लिए यह एक बड़ा अवसर होगा।

पैनल चर्चा के अंतिम सत्र में पद्म श्री प्रो. प्रीतम सिंह, पूर्व निदेशक, आईआईएम लखनऊ द्वारा संबोधित किया गया, जहां उन्होंने दर्शकों को ओलंपियन का जुनून रखने और अपने खुद के रिकॉर्ड तोड़ने के की कोशिश करते रहने के लिए प्रेरित किया – “उत्कृष्टता एक गंतव्य नहीं है, उत्कृष्टता एक यात्रा है”। उन्होंने चीजों को अलग तरह से देखने वाले एक महान रणनीतिकार के रूप में भगवान कृष्ण के,और ध्यान लगाने के लिए अर्जुन के गुणों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने इस बारे में बात की कि एचआर प्रबंधकों को समग्र जानकारी प्राप्त करने और न केवल प्रशिक्षण पर बल्कि कर्मचारियों के पूर्ण निखार पर भी ध्यान केंद्रित करने के लिए कैसे काम करना चाहिए। उन्होंने अंत में कहा- “एकमात्र पेशा जहां आप गुलाम नहीं हैं, वह है जिसके आप मास्टर हैं”।

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