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Tuesday, August 14th, 2018 07:11 PM
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इंदौर में ‘ट्रैफिक रूल्स’ क्यों फॉलो नहीं कर रहा वाहन चालक, जानें




इंदौर में ‘ट्रैफिक रूल्स’ क्यों फॉलो नहीं कर रहा वाहन चालक, जानेंSocial



आमतौर पर देखा गया है कि वाहन चालक ट्रैफिक रूल्स फॉलो नहीं करता है जिसके चलते दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही एक समस्या और सामने आती है जिसमें वाहन चालक गलियों और कॉलोनी में दूसरी गाड़ियों को ओवरटेक करता है जिससे कई बार बेकसूर इंसान भी अपनी जान खो बैठता है। इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए Youthens News की टीम ने इंदौर शहर के डीएसपी बसंत कुमार कोल से बातचीत की तो उन्होंने कहा:-

# शहर में ‘ट्रैफिक परामर्श केंद्र’ लगाया जा रहा है। इसके अंतर्गत वाहन चालक के साथ किस तरह की कार्यवाही की जाएगी?

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पुलिस प्रबंधन वाहन चालक को उसकी गलती समझाने के लिए दो प्रारूपों में काम करता है। एक Enforcement है जिसमें हम वाहन चालक के साथ चालानी कार्यवाही करते है और दूसरा प्रशिक्षण है जिसके अंतर्गत हम शैक्षणिक संस्थानों में जाकर ट्रैफिक रूल्स सिखाते है और साथ ही उन्हें दुर्घटनाओं से अवगत भी कराते है। हाल ही में हमने सम्पूर्ण एकेडमी के करीब 1200 से 1500 बच्चों को ट्राफिक रूल्स से अवगत कराया।

वहीं हम वाहन चालकों को बुला रहे है जो बार-बार नियमों का उल्लघंन कर रहे है। इस दौरान उन्हें सीसीटीवी में कैद वो वीडियो दिखाते है जो रूल्स तोड़ते वक़्त कैद हुआ था। इतना ही नहीं उन्हें वीडियो के माध्यम से यह भी दिखाया जाता है कि रूल्स तोड़ने की वजह से किस तरह का हादसा हो सकता है। उम्मीद की जाती है कि इसे देखने के बाद वाहन चालक का मन परिवर्तन होगा और वह इस तरह की गलती दोबारा नहीं करेगा।

# कई बार इस तरह के अभियान चलाए गए है लेकिन वाहन चालक आज भी नियम तोड़ रहे है, तो कमी कहाँ है?

चर्चा में आया इंदौर ट्रैफिक पुलिस वाले का यह वीडियो

दरअसल, वाहन चालक अपनी पढ़ाई तो पूरी करता है लेकिन उसे कभी भी ट्रैफिक रूल्स के बारे में नहीं पता होता है और ना ही इसकी शिक्षा दी जाती है जिसके चलते वह ट्रैफिक रूल्स को नज़रंदाज़ करता है। उसकी इसी एक गलती की वजह से कभी-कभी उसे अपनी जान भी गवानी पड़ती है।

# हेलमेट एक्सीडेंट के बाद काम आता है जिससे चोट ना लगे लेकिन एक्सीडेंट ना हो इसके लिए क्या किया जाए?

इसमें परिवार के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है क्योंकि एक बच्चा परिवार की छतरछाया में रहकर सब कुछ सीखता है। यदि माता-पिता का लालन-पालन ठीक होगा तो बच्चा ट्रैफिक रूल्स भी फॉलो करेगा। उदाहरण के तौर हम बच्चे को ये सिखाते है कि कहीं जाए तो प्रॉपर ड्रेसअप होना चाहिए लेकिन हम यह नहीं सिखाते है कि गाड़ी संभल कर चलाए और हेलमेट को पहनें।

# सभी को अपनी जान की परवाह है लेकिन फिर भी वह गाड़ी तेज़ चलता है और ओवरटेक करता है?

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ऐसा नहीं है कि सभी को अपनी जान की परवाह है क्योंकि यदि अपनी जान की परवाह होती तो वह ट्रैफिक रूल्स फॉलो करता और हादसे में घायल या अपनी जान ना देता। वाहन चालक को सोचना चाहिए कि उसके घर पर भी उसका कोई इंतज़ार कर रहा है और जिसे वह ओवरटेक कर रहा है उसके साथ किसी तरह का हादसा हो सकता है।

डीएसपी बसंत कुमार पोल से बात करकर यह तो कहा जा सकता है कि शहर में हो रहे हादसों को रोकने के लिए पुलिस प्रबंधन कई तरह के प्रयास कर रहा है लेकिन आज भी चालानों की संख्या हज़ारों में है और उनसे जमा होने वाली राशि लाखों में है। जिस दिन यह संख्या कम हो जाएगी उस दिन कहा जा सकेगा कि शहर प्रगति की ओर है।

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