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Friday, May 25th, 2018 10:14 PM
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अघोरियों के बारे में ये बातें नहीं जानते हैं आप, इस किताब में खुलेंगे कई राज




अघोरियों के बारे में ये बातें नहीं जानते हैं आप, इस किताब में खुलेंगे कई राजSpiritual



इस दुनिया में कई चीज़ें ऐसी होती हैं जो हमारी आंखों के सामने होती है लेकिन हमें दिखती नहीं। भूत-प्रेत, जादू-टोना, तंत्र-मंत्र ये सब दिखते नहीं है लेकिन इनका असर जरूर होता है। इस बात को कुछ लोग मानते हैं और कुछ लोग नहीं मानते। अक्सर लोग कहते हैं कि अघोरियों के पास कई तरह की सिद्धियां होती है। वो हमसे अलग होते हैं, वो काफी रूष्ट होते हैं, शमसानों में रहते हैं, मुर्दे खाते हैं। इसके अलावा भी तरह-तरह की बातें हैं जो अघोरियों के बारे में लोग कहते हैं लेकिन इसकी असलियत क्या है इस बात को कोई नहीं जानता।

अघोरियों की दुनिया की क्या हकीकत है इस बात को बहुत अच्छे से इंदौर की रहने वाली लेखक कविता शर्मा ने अपनी किताब ‘हिरण्यगर्भ’ में बताया है। ये किताब मुख्य रूप से अघोरियों के बारे में हैं। इस किताब में अघोरियों और उनकी दुनिया से जुड़ी दुर्लभ जानकारियां हैं जो बड़ी मेहनत के बाद उन्हें मिली है। इस किताब के बारे में कुछ ख़ास बातें कविताजी ने यूथेन्स न्यूज को बताई। तो आइए जानते हैं इस किताब की कुछ ख़ास बातें।

इस किताब को लिखने का आइडिया कैसे आया

इस किताब को लिखने का आइडिया कैसे आया। इस सवाल का जवाब देते हुए कविता जी ने कहा कि हमारे समाज में अघोरियों के बारे में काफी भ्रांतियां हैं। लोग कहते हैं कि अघोरी मुर्दे खाते हैं, मृत शरीर के साथ संबंध बनाते हैं जैसी कई भ्रांतियां लोगों ने फैलाई हैं जिन्हें सुनकर काफी बुरा लगता है। अघोरी हमारे देश की संस्कृति का एक अहम हिस्सा हैं और उनके बारे में इस तरह की भ्रांतियां फैलती देख मैंने मन बनाया कि उनके बारे में जो भी सही उसे लिखा जाए।

इस किताब पर कैसे रिसर्च की

इस किताब को लिखना कोई आसान काम नहीं है। इस किताब के लिए उन्होंने कैसे रिसर्च की और कितनी मेहनत की इस बात का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि मैं इसके लिए देश के सुदूर प्रांतों में जा कर कई गुप्त रूपसे साधना करने वाले अघोरियों से मिलीं। अघोरी सामान्यतः महिलाओं से दूर ही रहते हैं लेकिन काफी विनती के बाद उन्होंने इस काम के लिए अपनी सहमति दी। अगर आप उनके पास जाते हैं और उनकी सहमति के बिना कुछ भी रिकॉर्ड करने की या वीडियो बनाने की कोशिश करते हैं तो आप ऐसा नहीं कर पाते हैं उनके पास ऐसी एनर्जी होती है कि जब तक उनकी सहमति नहीं होती वो आदेश नहीं देते तब तक आप चाहें लाख कोशिश कर लें आप उनके फोटो भी नहीं खींच सकते।

रिसर्च करने के बाद बदला नजरिया

कविता जी ने अघोरियों पर काफी रिसर्च की उनसे काफी बातें जानी और ये सब करने के बाद उनका नजरिया अघोरियों के प्रति पूरी तरह बदल गया। हम लोग अक्सर सोचते हैं कि अघोरी रूष्ठ होते हैं, तांत्रिक होते हैं, जादू-टोना करते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। कविताजी ने बताया कि असली अघोरी काफी विनम्र होते हैं वो औरत को छूते भी नहीं हैं और जिस रूप को आप को सुना है उससे वे काफी अलग हैं। आप रामकृष्ण परमहंस के बारे में तो जानते ही होंगे। वे एक साधु की तरह हैं लेकिन वे एक अघोरी भी हैं। आप अघोरी को देखकर ये नहीं कह सकते कि वो अघोरी हैं।

अघोर पंथ एक सीक्रेट सैक्ट है। वे बारह वर्षों तक कड़ी साधना करते हैं अकेले रहते हैं। उस समय इन्हें जो मिलता है वो उससे अपना गुजारा करते हैं यहां तक कि अगर कुछ न मिले तो वे मिट्टी घोलकर ही पी जाते हैं। इनकी साधना जैसे-जैसे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे ये और भी ज़्यादा नम्र होते जाते हैं। अघोरियों के पास इतनी शक्ति होती है कि वे दुनिया बदलने की ताकत रखते हैं।

लोग अक्सर सोचते हैं कि अघोरी जो होते हैं वो बुरे कामों के लिए जादू-टोने का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कविता जी ने बताया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। जो असली अघोरी होते हैं वो अपनी सिद्धियों का प्रयोग कभी भी बुरा काम करने के लिए नहीं करते हैं। कविता जी ने बताया कि अघोरियों को लोग अधिक क्रोध करने वाला मानते हैं कि वो हर किसी को श्राप दे देते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। अघोरी जो होते हैं वो काफी कठिन तपस्या करके अघोरी बनते हैं और उसके बाद लोग उनके पास आते हैं और उनकी महत्वपूर्ण चीज़ें चुराकर ले जाते हैं लोग उनके साथ छल करते हैं इसलिए वे आम लोगों से काफी रूखें रहते हैं।

हिरण्यगर्भ का क्या मतलब है

इस किताब का शीर्षक हिरण्यगर्भ है जिसका मतलब बताते हुए कविताजी कहती हैं कि हिरण्यगर्भ दो शब्दों से बना है ‘हिरण्य’ और ‘गर्भ’। हिरण्य का अर्थ है सोना और गर्भ का मतलब है कोख जिसका पूरा मतलब है सोने की कोख। हिरण्यगर्भ का दूसरा मतलब होता है प्रथम गर्भ। प्रथम गर्भ आपकी नज़रों में मां का गर्भ होता है लेकिन प्रथम गर्भ तो पिता से उत्पन्न होता है। प्रकृति का जन्म भी आदिपुरुष शिव से हुआ था। जो शिव से उत्पन्न हुआ उसका शिव में लौटना हिरण्यगर्भ है।

इस किताब में अघोरियों से जुडे कई राज हैं जिन्हें आप इस किताब में पढ़ सकते हैं। इस किताब की क़ीमत 575 रूपए है। अगर आप इसे खरीदना चाहते हैं तो आप youthenspublication@gmail.com पर ईमेल करके संपर्क कर सकते हैं।

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