page level


Sunday, February 18th, 2018 11:50 PM
Flash

मात्र 6 मिनट में हो जाते है 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन, अद्भुत है ये मंदिर




मात्र 6 मिनट में हो जाते है 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन, अद्भुत है ये मंदिरSpiritual




भगवान शिव सभी के प्रिय होते हैं लोग उन्हें खुश करने के लिए उपवास रखते हैं, दूध चढ़ाते हैं पूजा अर्चना करते हैं। इसके अलावा लोग शिवजी के 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन भी करते हैं। कहते हैं अपनी ज़िन्दगी में इंसान को इन 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन कर लेना चाहिए। लेकिन इनके दर्शन कर पाना काफी मुश्किल होता है और आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन कर पाना हर किसी के लिए संभव भी नहीं है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर आप एक ही जगह पर 12 ज्योर्तिंलिंग के दर्शन मात्र 6 से 7 मिनट में कर सकते हैं।

आपको सुनकर आश्चर्य लगा होगा लेकिन हमारे भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जहां पर शिवजी के 12 ज्योर्तिलिंग एक साथ विराजमान है। इस महाशिवरात्री के पावन पर्व पर हम आपको इस मंदिर के बारे में बताएंगे भी और इस मंदिर के दर्शन भी कराएंगे साथ ही इस मंदिर के 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन भी कराएंगे।

जिस मंदिर की बात हम कर रहे हैं वो भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित हैं। इंदौर के परदेशीपुरा में स्थित गेंदेश्वर द्वादश ज्योर्तिलिंग मंदिर में शिवजी के 12 ज्योर्तिलिंग की प्रतिकृति मौजूद हैं जिनके दर्शन आप मात्र 6 मिनट में कर सकते हैं। इस मंदिर के बारे में और भी ख़ास बातें मंदिर के पंडित श्री विश्वजीत शर्माजी ने यूथेन्स न्यूज को बताई। जिन्हें हम आपको बताने वाले हैं।

12 ज्योर्तिलिंग और चारों धाम

पंडित विश्वजीतजी शर्मा ने बताया कि इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 14 जनवरी 2002 में हुई थी। इस मंदिर की स्थापना श्याम सुंदर विजयवर्गीय जी ने अपने पिताजी गेंदालाल विजयवर्गीयजी की स्मृति में की थी। वो एक शिव मंदिर बनाना चाहते थे लेकिन बाद में ये इतना भव्य मंदिर बन गया कि इंदौर में ऐसा कोई मंदिर नहीं। इस मंदिर में 12 ज्योर्तिलिंग और चारों धाम हैं।

हर चीज़ का रखा गया ध्यान

पं. विश्वजीतजी ने इस मंदिर की ख़ासियत के बारे में बताया कि 12 ज्योर्तिलिंग में जिस दिशा में जो शिवलिंग है यहां पर भी उसी दिशा में वही शिवलिंग है। जिस तरह का छत्र जिस शिवलिंग पर है वैसा ही इस मंदिर में भी है। और तो और शिवलिंग का रंग भी एक जैसा ही रखा गया है।

15 सालों से रोज हो रही तांडव आरती

पं. विश्वजीतजी ने बताया कि यहां पर कि 15 सालों से यहां रोज विशेष पूजा अर्चना होती है। भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। रोज 15 सालों से यहां रात 8 बजे से 9 बजे तक विशेष आरती की जाती है जिसे तांडव आरती कहा जाता है। इस तांडव आरती में एक घंटे तक 1 पांव पर खड़े रहकर भगवान शिव की आरती की जाती है।

धूमधाम से मनाई जाती है शिवरात्री

शिवरात्री के बारे में बताते हुए पंडित विश्वजीतजी कहते हैं कि यहां पांच दिनों तक शिव विवाह महोत्सव मनाया जाता है। पांच दिनों तक जिस रह शादी का आयोजन किया जाता है रस्में की जाती है उसी तरह मंदिर में भी शिवजी की शादी का आयोजन किया जाता है। शादी के दौरान पहले दिन मिट्टी से भगवान श्री गणेशजी की मूर्ति बनाई जाती है और उनका पूजन किया जाता है। दूसरे मां महाकाली की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजन किया जाता है।

तीसरे दिन भगवान शिव को हल्दी और मेहंदी लगाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि जो भी कुंवारी कन्या इस दिन भगवान शिव को हल्दी और मेहंदी लगाकर वही हल्दी मेहंदी खुद को लगाती है तो अगली शिवरात्री का उसका विवाह जरूर हो जाता है। शिवरात्री के दिन सुबह 4 बजे से भगवान शिव की भस्म आरती की जाती है। स्वर्ण कलश से अभिषेक किया जाता है। 51 हजार शिवलिंग का निर्माण किया जाता है। रात्री में 8 बजे 12 ज्योर्तिलिंग को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है और तांडव आरती की जाती है। साथ ही गन्ने के रस से भगवान का अभिषेक किया जाता है।

पूरे इंदौर का इकलौता अद्भुत मंदिर

इंदौर में सिर्फ ये अकेला मंदिर है जहां 12 ज्योर्तिलिंग और चारों धाम है। साथ ही इस मंदिर में नाकोड़ा भैरव भी विराजमान है जो इंदौर में कहीं नहीं है। पंडित विश्वजीत का कहना है कि ये नाकोड़ा भैरव पूरे इंदौर में कहीं भी शिवालय में विराजमान नहीं हैं।

पंडित विश्वजीत से हुई पूरी बातचीत और इस मंदिर में स्थित 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन आप नीचे दिए गए वीडियो में कर सकते हैं। ये जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताइए और इस वीडियो और पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाइए।

यह भी पढ़ें

ऐसा मंदिर जहां न पंडित, न श्रद्धालु बल्कि खुद देवी करती हैं भगवान शिव का “अभिषेक”

एक बेटी के पिता भी थे शिवजी जिससे शादी करना चाहता था राक्षस

क्या है भगवान शिव के बाघ की खाल धारण करने का रहस्य, जानिए

नंदी कैसे बने भगवान शिव की सवारी, जानिए इससे जुड़े रहस्य

Sponsored