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Thursday, December 14th, 2017 09:07 AM
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IB ने भारत सरकार को चेताया, ‘‘गुलाम देश’’ कहने वालों को देना होगा कड़ा जवाब




IB ने भारत सरकार को चेताया, ‘‘गुलाम देश’’ कहने वालों को देना होगा कड़ा जवाबWorld

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हाल ही में भारतीय खुफिया एंजेसी इंटेलीजेंस ब्यूरो ने पीएम मोदी को इस बात से चेताया है कि ‘‘सबसे ज्यादा बाल गुलाम वाले देश’’ के तौर पर भारत की छवि खराब हो सकती है। आईबी ने एक ‘‘गुप्त टिप्पणी’’ में सरकार से कहा है कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे प्रचार का ‘‘प्रतिवाद’’ करने के लिए ‘‘कूटनीतिक और सूचना आधारित विरोध’’ करना होगा। पिछले सप्ताह आईबी ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, राष्ट्रीय सुलाहकार, और रॉ को भेजी है। उन्होंने कहा है कि अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन की गुलामी दस्तावेज में भारत को ‘‘सबसे ज्यादा गुलामों वाले देश’’ के तौर पर पेश करने से भारत की छवि काफी खराब हो सकती है जिसका असर एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर भी पड़ेगा। साथ ही इसका प्रभाव 8.7 की विकास दर पर भी खासा पड़ेगा। यह रिपोर्ट खासकर बाल मजदूरी, बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी को खत्म करने के बारे में है। युनाइटेड नेशन आर्गेनाइजेशंस की संस्था आईएलओ ने ये रिपोर्ट ऑस्ट्रलिया स्थित निजी संस्था वाक फ्री फाउंडेशन के साथ मिलकर तैयार की है।

2013 में भी अंतराष्ट्रीय सर्वेक्षण में भारत को इस तरह ही पेश किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि घेरलू कामगार, ठेका मजदूर, कारखानों, यौन व्यापार, मछली मारने, खेतों इत्यादि क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के ‘‘आधुनिक गुलाम’’ बनने की आशंका रहती है। इसके बाद से भारत को लगातार कुछ इस तरह से ही पेश किया जा रहा है। आईएलओ-डब्ल्यूएफएफ की रिपोर्ट के आने के कुछ दिनों में ही आईबी ने टिप्पणी भेज दी थी। आईएलो-डब्ल्यूएफएफ की रिपोर्ट ‘‘ग्लोबल एसिटमेट ऑफ मॉडर्न स्लेवरी : फोर्स्ड लेबर एण्ड फोर्स्ड मैरिज’’ 19 सितंबर को रिपोर्ट जारी की थी।

आईएलओ-डब्ल्यूएफएफ की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘‘आधुनिक गुलामों’’ द्वारा तैयार किए गए ‘‘उत्पादों और सेवाओं को उपभोग कारोबारी प्रतीत होने वाले तरीकों से ही किया जाता है।’’ साथ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘‘उनके तैयार किए उत्पाद, खाद्य पदार्थ हम खाते हैं, उनके बनाए कपड़े हम पहनते है। और बहुत संभव है कि बहुत सारे घर जिनमें हम रह रहे है वो उन्होंने बनाए हों।’’ आईएलओ – डब्ल्यूएफएफ के सर्वे के आधार पर दक्षिण भारत के टेक्सटाइल उद्योग में गुलामी खत्म करने के लिए एनजीओ को दे रही हैं ताकि वह उत्पाद बढ़ाने में मदद करें।’’ आईबी ने अपनी टिप्प्पणी में सुझाव दिया हैं कि सरकार इन रिपोर्ट का जवाब गुलामी से जुड़े तथ्यों, आंकड़ो और बड़े सांख्यिकी आधार वाले सर्वेक्षण कराकर पुरजोर तरीके से जवाब देना होगा।

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