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Tuesday, June 19th, 2018 06:26 PM
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आओ खेलें “भारतीय राजनीतिक प्रीमीयर लीग”




आओ खेलें “भारतीय राजनीतिक प्रीमीयर लीग”



पिछले कुछ वर्षों से राजनीति की जो स्थिति देखने को मिल रही है वह सभी के मन को बहुत झंझोर रही है कि ये क्या हो रहा है? ये हमारे तमाम नेता क्या कर रहे हैं? नेता नाम की प्रजाति कौन सा खेल, खेल रही हैं। देश की जनता भले ही इससे बहुत खराब स्थिति में पहुंच गईं है किंतु इन नेताओं के लिए तो यह उनका खेल व कैरियर से कम नहीं है। एक ख्याल आया कि क्यों नहीं हम, जिस क्रिकेट के खेल को आईपीएल ने एक अलग पहचान दी, जनता का मनोरंजन रही है। वैसे ही एक ‘भारतीय राजनीतिक प्रीमियर लीग’ (Indian Politicial Premier League) की शुरूआत करें। नेताओं का खेल का खेल हो जाएगा किंतु यहां देशवासियों का ना सिर्फ मनोरंजन होगा बल्कि देश हित में कुछ अच्छे कार्य भी हो जाएंगे। कहावत है ‘आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है।’ वैसे ही हमारे नेतागण सुधरने वाले तो हैं नहीं, तो क्यों नही हम ही कुछ ऐसा सोचें जिससे सबका भला हो जाए।

राजनीति, पैसा, पॉवर सबकी जुगलबंदी तो हो गई है, जिसे अब हटाना अत्यधिक मुश्किल लग रहा है तो हम भी क्रिकेट के इस महाकुंभ कहे जाने वाले आईपीएल के तर्ज पर हमारे नेताओं की भी बोली लगाकर उन्हें तमाम पदों पर लाने का प्रयास करें ताकि वे उन पदों पर अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। इससे हर नेता की हक़ीकत भी सामने आ जाएगी। कौन कैसा है, कितना दम रखता है।

टीमों की तरह पार्टियां तो तैयार हैं ही, उनके माय-बाप भी तैयार हैं, उनके पास उनके खिलाड़ी भी हैं। बस जरूरत है तो अच्छे परफॉर्म करने वाले खिलाड़ियों की, उनके अच्छे प्रदर्शन की ताकि देश का भला हो सके। कुछ अच्छे और बेहतरीन निर्णय देश हित में हो सके। उनके मध्य परफॉरमेंस की कॉम्पीटिशन आयेगी तो अच्छे-अच्छे निर्णय चौकों-छक्कों की तरह ले सकेंगे और उनको उस पर रेटिंग दी जा सकेगी। वही रेटिंग उनकी वैल्यू बढ़ाएगी। अरे पैसा लेना है, राजनीति से कमाना है, तो कमा लो पर कम से कम देश का भला तो कर दो।

यूं भी हजारों-करोड़ों डकार रहे हो। हमारी खून-पसीने की कमाई पर डाका डाल रहे हो तो कम से कम हमारा भला भी तो करो। पैसा लो बेशक लो किंतु काम अच्छा और बेहतर होना चाहिए। हम जैसी आम जनता ने जिस-जिसको भी पॉवर दिया सभी ने खूब लूटा है, लूट रहे हैं। फिर चाहे नेता हो, अफसर हो या बाबा लोग हो, जिन्हें सर माथे बिठाया। कौन छोड़ रहा है हमें? हमारा तो रोज ही रेप हो रहा है। हर वह एजेंसी जो इन सब से हमें बचाती है उन सभी पर तो इन लोगों ने कब्जा कर रखा है। वे सब भी कठपुतलियों की भांति अपनी तलवार से हमारा ही गला काट रही है।

ऐसी तमाम स्थिति में क्यों न जनता जागे और सारे सूत्र अपने हाथ में लेकर एक बड़ा खेल भारतीय राजनैतिक प्रिमियर लीग ही खेल लिया जाए।

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