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Friday, June 22nd, 2018 09:27 PM
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अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने रचा इतिहास, ISRO ने लांच की इतनी सैटेलाइट




अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने रचा इतिहास, ISRO ने लांच की इतनी सैटेलाइटAuto & Technology



इसरो ने साल के शुरूआत में ही अंतरिक्ष की दुनिया में एक बड़ा और अनोखा इतिहास रचा है। इसरो ने आज श्रीहरीकोटा से अपनी 100वीं सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा है। यह साल की पहली लांचिंग है। इतना ही नहीं इस सैटेलाइट के साथ अन्य 30 अन्य उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में पहुंचाया गया है। इसमें भारत के 3 और 6 दूसरे देशों के 28 उपग्रह जिसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, साउथ कोरिया और फिनलैंड के सैटेलाइट्स शामिल हैं। यह मिशन देश के अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बता दें कि श्रीहरीकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV C-40 से ये उपग्रह एक साथ लांच किए गए हैं। इसरो का ये 42वां और साल का पहला मिशन है। इसरो के अनुसार PSLV C-40 रॉकेट शुक्रवार सुबह 9:28 बजे 30 उपग्रहों के साथ सफलतापूवर्क उड़ान भरी।

भारतीय उपग्रहों में एक 100 किलोग्राम का माइक्रो सैटेलाइट और एक पांच किलोग्राम का नैनो सैटेलाइट शामिल है। बाकी 28 सैटेलाइट कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के हैं। 31 उपग्रहों का कुल वजन 1,323 किलोग्राम है। इसरो के अधिकारियों के मुताबिक 30 सैटेलाइट को 505 किलोमीटर की सूर्य की समकालीन कक्ष (एसएसओ) में प्रक्षेपित किया जाएगा। एक माइक्रो सैटेलाइट 359 किलोमीटर की एसएसओ में स्थापित किया जाएगा। इस पूरे लॉन्च में दो घंटे 21 सेकेंड का वक्त लगेगा। इससे पहले भी इसरो एक साथ 104 सैटेलाइट का प्रक्षेपण कर विश्व रिकॉर्ड बना चुका है।

PSLV-C40 में C-40 नंबर है। इसरो पीएसएलवी की फ्लाइट को एक नाम देता है। ये उनके क्रम के आधार पर होता है। पहली बार 1993 में PSLV ने पहली लॉन्चिंग की थी लेकिन वह असफल रही थी। उसके बाद पिछले 24 साल से पीएसएलवी हर बार सफर रहा सिर्फ 31 अगस्त 2017 के। 31 अगस्त 2017 को पीएसएलवी- C-39 की लॉन्चिंग असफल रही थी।

जानिए क्या हैं मिशन के फायदे:

– यह कार्टोसेट-2 यिरीज का दूसरा उपग्रह है, जिसे कक्षा में स्थापित किया जा रहा है।
– इसमें पैक्रोमेटिक और मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरे भी लगे हैं, जो हाई क्वालिटी की तस्वीरें लेने में सक्षम है।
– इन तस्वीरों का यूज भू-मानचित्र बनाने, रोड नेटवर्क की निगरानी में होगा।
– जमीन के सतह में आने वाले बदलावों की निगरानी भी इन तस्वीरों के जरिए हो सकेगी।
– ये सैटैलाइट भारतीय सेना की ताकत बनेगी। बता दें कि इसरो इससे पहले ऐसी ही एक सैटेलाइट लांच कर चुका है जिससे भारतीय सेना को सर्जिकल स्ट्राइक में मदद मिली थी।
– ये सैटेलाइट दुश्मनों की नापाक हरकतों पर भी नजर रखेगा, इसलिए इसे जासूस सैटेलाइट भी माना जा रहा है।
– मौसम की सही जानकारी देने में ये सैटेलाइट बहुत सक्षम है। इससे भूंकप और तूफान की जानकारी पहले से मिल सकेगी।

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