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Wednesday, May 23rd, 2018 06:04 PM
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’कर नाटक’ होते कर्नाटक के चुनाव




’कर नाटक’ होते कर्नाटक के चुनावPolitics



कर्नाटक चुनाव देश की राजनीति का एक अहम मुद्दा है और इससे भी बड़ा मुद्दा है इस चुनाव में जीत हासिल करना। देश की कई नामी पार्टियां अपनी ऐड़ी से चोटी का जोर इस चुनाव को जीतने में लगा रही हैं और कई तरह के हथकंडे अपना रही है ताकि वे लोगों को प्रभावित कर सकें और वोट खींच सके। ऐसे में स्थिति बड़ी दिलचस्प और हास्यास्पद हो जाती है। इसी बात को लेकर कर्नाटक के चुनाव पर अपने नजरिए से हमारे लेखक, कवि, पेशे से चार्टड अकाउंटेंट नवीनजी क्या कहते हैं आइए पढ़ते हैं…

कहता चुनाव कर्नाटक का
कर नाटक कर नाटक.
विपक्ष करे गेट बंद
सरकार खोल दे
घोषणा इंसेंटिव के फाटक…
कर नाटक…

सिर्फ नेता ही मस्त हैं
जनता पूरी तरह त्रस्त है
मध्यम वर्गीय तो बन गया
नि री ह जातक….
कर नाटक कर नाटक….

मन मोहन ने बात नहीं सुनी
अब इनके मन की बात सुनते रहो…
अच्छे दिन के सपने दिखाए थे क्यों
पूछो मत, चुपचाप ढूंढते रहो…
सिर्फ जी हुजूरी करो…
कोई विश्लेषण या कंप्लेंट नहीं…
सिर्फ अंधभक्ति करो
ना भेजो कोई लानत….
कहता चुनाव कर्नाटक का
कर नाटक कर नाटक….

लेखक – नवीन ‘निर्मल’

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