मुंबई स्थित देश के सुप्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में आगामी माघी गणेश जयंती को लेकर भव्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इन तैयारियों के चलते मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। भगवान गणेश की मूर्ति पर किए जाने वाले विशेष अनुष्ठान, जिसे ‘सिंदूर लेपन’ कहा जाता है, के कारण मंदिर के गर्भगृह को पांच दिनों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। यह प्रक्रिया बुधवार, 7 जनवरी 2026 से शुरू होकर 11 जनवरी तक चलेगी। इस दौरान भक्त अपने आराध्य के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर सकेंगे। माघी गणेश जयंती, जिसे माघी जयंती के नाम से भी जाना जाता है, इस वर्ष 22 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो बुद्धि, समृद्धि और नई शुरुआत के देवता माने जाते हैं।
वैकल्पिक दर्शन व्यवस्था और माघी जयंती
भले ही मुख्य विग्रह के दर्शन पांच दिनों तक प्रतिबंधित रहेंगे, लेकिन मंदिर प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित न हो। इस अवधि के दौरान मंदिर परिसर में भगवान गणपति की एक तस्वीर स्थापित की जाएगी, जिसके दर्शन कर भक्त अपना माथा टेक सकेंगे और आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। सिंदूर लेपन की रस्म और मंदिर की सजावट का कार्य पूरा होने के बाद, भक्त माघी जयंती के पावन अवसर पर अपने आराध्य के भव्य स्वरूप के दर्शन कर पाएंगे। यह त्योहार हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और इसके लिए मंदिर में विशेष साज-सज्जा की जाती है।
बुधवार को गणेश पूजन की महिमा
एक ओर जहां सिद्धिविनायक में विशेष तैयारियों का दौर जारी है, वहीं हिंदू धर्म में प्रत्येक बुधवार का दिन गणपति बप्पा की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश प्रथम पूज्य देव हैं और किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उनकी स्तुति के बिना अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं, इसीलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। विशेष रूप से बुधवार के दिन पूजा-पाठ और आरती करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
भगवान श्री गणेश की आरती
भक्त चाहे मंदिर में हों या अपने घर पर, आरती के माध्यम से प्रभु को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। पूजा के अंत में आरती का गायन वातावरण को भक्तिमय बना देता है और मन को शांति प्रदान करता है। यहां भगवान श्री गणेश की वह आरती प्रस्तुत है, जिसका पाठ करके आप अपनी पूजा को पूर्ण कर सकते हैं:
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥