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15/01/2018

मन की बात: आओ करें अब काम की बात




man ki baat

मेरा मन कहता है ऐसा करना चाहिए, मेरा मन कहता है ऐसा होना चाहिए। मेरा मन, मेरा मन… बस, सबके मन में बहुत कुछ होता है, ऐसा होना चाहिए, ये ऐसा करें तो वैसा होगा वगैरह, वगैरह किंतु यह सब तब होगा जब हम कुछ करेंगें। साकार तब होगा जब हम उसे करेंगें, जिसका जो कार्य है वो उसे करे, उसे बखूबी निभाएं बाकि सब तो अपने-आप हो जाएगा।

इन सबका फर्क पड़ता है जब बड़े ऐसा करें। हमारे देश के बड़े वो, जो सत्ता पर काबिज हैं, हमारे देश के बड़े वो जो सरकारी नुमाइंदे हैं, वे सभी अपनी मन की बात तो बड़े अच्छे से बतलाते हैं जैसे सभी संत हो गए। संत के कार्य संतों को करने दीजिए। पहले वे कार्य कीजिए जो आपको करना है, जिसके करने के लिए आपको चुना गया है। चुनाव के वक्त सब याद रहता है। जैसे ही चुनाव पूरे हुए सत्ता पर काबिज हुए कि जनप्रतिनिधि से मालिक बन बैठते हैं। बजाए जगभलाई के जनता को ही नंगा करने में लग जाते हैं उसको ताकत से धकेलने में लग जाते हैं। जनता को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए का उपदेश शुरू हो जाता है। अरे ये जनता का काम जनता को करने दीजिए आपको जो काम सौंपा गया है या जिस कार्य के लिए चुना गया है वे कार्य तो कीजिए।

बात विदेशो से कालेधन लाने की हो, सब भूल देशवासियों को ही नंगा करने में ताकत लगा बैठे। बात देश में विकास करने, देशवासियों की कमाई बढ़ाने, रोजगार पैदा कर सबको काम देने की हो तो वहां सिर्फ भाषण ही मिलते हैं। भाषण से खुशहाली नहीं काम करने से खुशहाली आती है। सरकार तीन साल पूरे होने का जश्न मना रही है। मनाना चाहिए, जिसे खुशी होती है उसे जश्न मनाना चाहिए। यहां सरकार को खुशी हुई, हर तरफ वे ही नज़र आ रहे हैं उन्हें जश्न मनाना चाहिए। वे मना भी रहे हैं लेकिन जनता का क्या? जनता तो परेशान ही नज़र आती है। काम नहीं, पैसा नहीं, चेहरे सबके उतरे हुए हैं। ऐसे में वह जश्न कैसे मनाए। अभी हाल ही में एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने एक स्थान पर अपनी बात कही, ‘‘युवा अधिवक्ताओं को तकलीफदारों के लिए इस प्रकार कार्य करना चाहिए कि उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए।’’ इनके जैसे तमाम बड़े लोगों से पूछे जरा कि आप सभी क्या कर रहे हैं? सभी को दुखों में धकेल नोट कमाने में व्यस्त हैं और आने वाली पीढ़ियों को सीख दे रहे हैं कि उन्हें एक सेवक की भांति कार्य करना चाहिए। पैसे के पीछे न भागकर लोगों की मुस्कान के पीछे भागना चाहिए। ऐसा क्यों? मन की बातें बंद करें, शुरू करें काम की बात ताकि देश का देशवासियों का, विकास हो सके और सबके चेहरे पर खुशियां छाए ताकि सभी जश्न मना सके।

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