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Wednesday, August 15th, 2018 12:19 AM
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अब इस राज्य में भीख मांगने पर नहीं होगी जेल, आया नया नियम




अब इस राज्य में भीख मांगने पर नहीं होगी जेल, आया नया नियमSocial



देश में भीख मांगना संगीन अपराध माना जाता है। अगर सड़कों पर कोई भिखारी भीख मांगते दिखे, तो इसे क्राइम की श्रेणी में रखा जाता है, जिसके लिए भीख मांगने वाले को जेल की सजा भी हो सकती है। लेकिन हाल ही में हाईकोर्ट ने भिक्षावृति को अपराध बनाने वाले कानून बांगे भिक्षावृत्ति रोकथाम 1959 को खारिज कर दिया है। जिसके बाद अब दिल्ली में भीख मांगना अपराध नहीं होगा और न ही अब दिल्ली पुलिस अब भिखारियों को गिरफ्तार कर पाएगी।

इस मामले में कार्यवाही करने वाली मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व सी हरिशंकी की पीठ ने कहा है कि भिक्षावृत्ति के मामले में पुलिस अधिकारियों को पॉवर देने वाले प्रावधान असंवैधानिक हैं। इसलिए इसे खारिज किया गया है।

गरीबों के लिए भीख मांगना अपराध कैसे-

हाईकोर्ट ने 16 मई को कहा था कि सरकार लोगों को नौकरी और रोजगार नहीं दे पा रही है, ऐसे में गरीबी से जूझ रहे लोग क्या करेंगे। उनके पास जिन्दगी जीने का कोई विकल्प भी तो नहीं हैं। महंगाई के कारण गरीबों के बच्चे पढ़ नहीं पा रहे, ऐसे में नौकरी मिलना तो बहुत दूर की बात है। तो गरीब क्या करेगा। उसके लिए भीख मांगना ही उसका रोजगार है। अपने परिवार के लिए कमाना अपराध कैसे हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कही थी।

बता दें कि ये याचिका सोशलिस्ट हर्ष मंदार और कर्णिका साहनी ने दायर की थी। जिसमें उन्होंने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की अपील की थी। इन याचिकाओं में भिखारियों को खाना और चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए भी कहा गया था।


क्या कहता है कानून-

बांबे के कानून के अनुसार पहली बार अगर कोई भिखारी भीख मांगता पकड़ा गया तो उसे एक से तीन साल तक के लिए सुधार घर भेज सकती थी। वहीं दूसरी बार पकड़े जाने पर भिखारी को 10 साल के लिए सुधार घर भेजे जाने का प्रावधान है।  जानकारों की मानें तो दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से भले ही भिखारियों को राहत मिली हो, लेकिन इससे देश में भिक्षावृत्ति की लत बहुत बढ़ जाएगी। अब भिखारी बिना रोक-टोक के सड़कों, स्टेशन और अन्य पब्लिक प्लेसेस पर भीख मांगेगे।

बता दें कि  पश्चिम बंगाल एक ऐसा राज्य है, जहां भिखारियों की संख्या सबसे ज्यादा है। यहां 81 हजार भिखारी रहते हैं। वहीं सबसे कम भिखारी लक्षद्धीप में हैं, यहां मात्र दो भिखारी हैं। ये बात सामाजिक न्यायिक मंत्री थावर चंद गहलोत ने लिखित में दी है। ये सभी आंकड़े 2011 के अनुसार है। पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश में 65 हजार 835 भिखारी हैं। जबकि 30 हजार 218 भिखारियों के साथ आंध्र प्रदेश तीसरे नंबर पर है। बता दें कि भीख मांगना केवल भारत में ही नहीं दुनिया के कई देशों में बैन है।

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