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Sunday, December 17th, 2017 05:39 PM
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40 प्रतिशत ने भरा ‘जीरो जीएसटी’, बड़े करदाताओं से आया ज़्यादा राजस्व




40 प्रतिशत ने भरा ‘जीरो जीएसटी’, बड़े करदाताओं से आया ज़्यादा राजस्वBusiness

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जीएसटी यानि ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’, इसके आने से सरकार को उम्मीद थी कि पूरे देश में अब एक ही टैक्स लागू होगा लेकिन इसके लागू होने के बाद जनता को पता चला कि यहां तो एक ही चीज़ पर तीन तरह का टैक्स लग रहा है अगर कहीं होटल में खाना खाना है तो उसके लिए होटल के हिसाब से जीएसटी देना होगा।

सरकार को जीएसटी को लेकर बड़ी उम्मीद थी कि इससे कारोबारियों और जनता से टैक्स वसूलने में काफी आसानी होगी लेकिन जनता के लिए ये अब भी उलझा हुआ ही माझरा है। हाल ही में जीएसटी रिटर्न को लेकर आई एक रिपोर्ट एक चौंकाने वाला खुलासा करती है। वार्ता पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 40 प्रतिशत अप्रत्यक्ष करदाताओं ने ‘जीरो जीएसटी’ रिटर्न किया है।

22 लाख व्यापारियों ने भरा जीरो जीएसटी
जीएसटी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार जुलाई के लिए 54 लाख बिजनेस इकाइयों ने जीएसटी रिटर्न दाखिल किया है जिसमें से 40 फीसदी अर्थात 22 लाख बिजनेस इकाइयों ने जीरो रिटर्न दाखिल किया है और कोई कर नहीं चुकाया। इसके अलावा बचे हुए व्यपारियों में से 32 लाख कारोबारियों में से अधिकांश पर नकद देनदारी बनती ही नहीं क्योंकि वे जीएसटी लागू होने के पहले के सेवा कर या उत्पाद शुल्क के क्रेडिट के हकदार हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
इस मामले में सरकारी आंकड़े देखे जाएं तो उनके अनुसार 23 लाख करदाताओं में से 70 पर्सेन्ट ने एक रूपया से लेकर 33 हजार रूपए तक के बीच कर चुकाया हैं। देश की करीब 0.3 प्रतिशत यानि 10 हजार कंपनियों से दो तिहाई जीएसटी राजस्व इक्ठ्ठा हुआ है। जुलाई में जीएसटी से करीब 94 हजार करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह हुआ था।

बड़े करदाताओं से आ रहा ज़्यादा जीएसटी
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी परिषद की 22वीं बैठक के बाद कहा कि 94 से 95 फीसदी जीएसटी राजस्व बड़े करदाताओं से आ रहे हैं। 90 फीसदी से अधिक करदाता एक करोड़ रुपये से कम वार्षिक कारोबार की श्रेणी वाले हैं और उनमें से अधिकांश शून्य या बहुत कम कर देते हैं। 72 लाख लोगों ने पहले जीएसटीएन पंजीयन कराया था और करीब 25 से 26 लाख नये लोगों ने इसके लिए पंजीयन कराया है।

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