Monday, November 20th, 2017 04:20 AM
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पृथ्वी पुरखों से मिली विरासत नहीं बच्चों की अमानत है।




पृथ्वी पुरखों से मिली विरासत नहीं बच्चों की अमानत है।Education & Career

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हम बात जब बच्चों की करते हैं तो, काफी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। उनके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने की बात करते हैं। ऐसा लगता है जैसे सारा जीवन उन्हीं को समर्पित कर दिया हो। उन्हें बड़ा करना, उनको सभी प्रकार की सुख सुविधाओं से नवाजना, अच्छी से अच्छी पढ़ाई, स्कूल, कोचिंग, साधन उपलब्ध कराना ताकि वे बेहतर जीवन के लिए तैयार हो जाए। शादी-ब्याह से लेकर प्रापर्टी बनाने तक, अच्छी नौकरी तक में अपना जीवन न्यौछावर कर देते हैं। कोशिश इतनी की अपनी क्षमता से अधिक करने का प्रयास रहता है। इतना चिंतन व प्रयास शायद ही पूर्व की पीढ़ी ने अपने बच्चों के लिए किया होगा।

किंतु क्या हम जो कुछ भी कर रहे हैं वो सब वाकई ऐसा है जैसा कि हमें नज़र आ रहा है? हमारा सारा प्रयास बच्चों के लिए हो रहा है, उनकी बेहतरी के लिए हो रहा है या यूं कहें कि उन सभी प्रयासों से उनकी बेहतरी हो रही है क्या? कहीं उनकी आड़ में हम अपना स्वयं का मकसद तो पूरा नहीं कर रहे हैं और हमारे प्रयास उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ तो नहीं कर रहे हैं। ये पृथ्वी जो हमें पुरखों से मिली है, जो विरासत हमें अपने पुरखों से मिली है, जिसमें तमाम प्रकार के साधन व जीविका के जीने व आनंद के लिए उसे हमने संभाला है या उसका दुरूपयोग कर सही अर्थों में आने वाली पीढ़ी के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया हैं वर्तमान में हम नज़र दौड़ाए तो

1. इस समय दिल्ली और उसके आसपास का क्षेत्र स्मॉग और घने कोहरे से परेशान है जिसके कारण कई लोगों की जान भी चली गई। सही मायनों में देखा जाए तो वायु प्रदूषण के असल जिम्मेदार हम सभी हैं। द वर्ल्ड काउंट्स वेबसाइट से मिले आंकड़ों के अनुसार हर साल वायु प्रदूषण के कारण लगभग 7 लाख 49 हजार 960 लोग मर जाते हैं। ये अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है और वायु प्रदूषण नहीं रूका तो ये यूं ही बढ़ता रहेगा।

2. बात अगर पानी की करें तो पूरी दुनिया में लगभग 71 प्रतिशत जमीन पर पानी है और वो पूरा पानी साफ नहीं है। पूरी दुनिया में हर जगह फैक्ट्रियां और कंपनियां है जिनसे निकलने वाले केमिकल से पानी लगातार गंदा होता जा रहा है। हमारी आम ज़िन्दगी में ही इसके कई नुकसान हमें देखने को मिल जाते हैं। इनकी वजह से हम कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। अगर आंकड़ों पर नज़र दौड़ाए तो पूरी दुनिया में लगभग 30 लाख 99 हजार 578 मौतें दूषित पानी की वजह से होती है।

3. आज सुरक्षा भी हमारे लिए एक अहम मुद्दा है। सुरक्षा के लिए दुनियाभर के कई देश काफी सारा पैसा खर्च कर देते हैं। आज अकेले अमेरिका दुनियाभर में सुरक्षा के मामले में 611 बिलियन डॉलर खर्च कर देता है। बात भारत की करें तो भारत अकेले इस पर 55.9 बिलियन डॉलर खर्च कर देता है। इससे हम देश की सुरक्षा तो कर रहे हैं लेकिन इससे फैले विध्वंस के परिणाम हमारे पर्यावरण और हमें भुगतने पड़ रहे हैं।

सही अर्थों में देखा जाए तो ये पृथ्वी पुरखों की विरासत नहीं बल्कि बच्चों की अमानत है जबकि तमाम बातों से तो हमें यही मालूम होता है बात तो बच्चों की करते हैं किंतु उनको हम जो विरासत देकर जाएंगे वो बड़ी ही खतरनाक व भयावह होगी। पैसा होगा किंतु खुशी नहीं होगी, हम दूसरों से लड़ते-मरते रहेंगे। मानवता नाम की चीज़ बिल्कुल खत्म सी होगी। पर्यावरण तो इतना बिगड़ चुका होगा कि हम आकाश में सांस लेने लायक ही नहीं रहेंगे। स्वास्थ का बिगड़ना, साधनों के लिए लड़ाई, संस्कार विहीन हो, अमानवीय हो एक दूसरे से लड़ाई, प्रकृति का प्रकोप यह सब दे रहे हैं हम अपने बच्चों को। क्या आपको लगता है आप अपने बच्चो के लिए सही मायने में चिंतित हैं? क्या आप ऐसा ही सब कुछ उनके लिए छोड़कर जाना चाहते हैं? तो उठें-जागें और करें वो सबकुछ ताकि आपके बच्चे आप पर फक्र कर सकें।

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