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Tuesday, August 14th, 2018 02:55 PM
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आदर्शो की लडाई दर्शाती है मेरी फिल्मे : प्रकाश झा




आदर्शो की लडाई दर्शाती है मेरी फिल्मे : प्रकाश झाEntertainment



मै अपनी फिल्मों में मुद्दे नही, कहानियों को लेके चलता हूं। उनमे कोशिश करता हूं। जनता को पात्रों से ऐसे जोड़ने की, वो उनकी ख़ुशी में खुश हो और उनके विवाद को व्यक्तिगत विवाद की तरह समझ पाए। मेरी कोशिश रहती है की मेरे पात्रों के आदर्श ही उनके ड्रामा का कारण बने। मैंने अपनी फिल्म आरक्षण में ऐसा ही दिखाया है। फिल्म मुद्दे से ज्यादा आदर्शों की लड़ाई पर है। ये बात कही मशहूर डायरेक्टर प्रकाश झा ने यूथेन्स न्यूज़ से, वो हाल ही में शहर में चल रहे फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनने आये थे। संस्था सिने विज़न द्वारा आयोजित फिल्म फेस्टिवल में झा की नेशनल अवार्ड विनिंग फिल्म दामुल प्रदर्शित की गयी थी जिसकी कॉपी झा ने खुद सिने विज़न को उपलब्ध कराई।

सिर्फ फिल्म फेस्टिवल ही नहीं,झा अपनी आगामी फिल्म ’कांस्टेबल’ के लिए इंदौर डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र से मुलाक़ात करने भी आये थे. इस बात का ज़िक्र उन्होंने फिल्म फेस्टिवल में भी किया। उम्मीद की जा रही है की उनकी इस फिल्म में मध्य प्रदेश पुलिस की कुछ झलके देखने को मिलेंगी।

सामाजिक मुद्दों पर राजनीती, आरक्षण, गंगाजल जैसी फिल्में बनाने वाले झा मानते ज़िन्दगी की कुलबुलाहटे उनकी फिल्मो को प्रेरित करती है। हाल ही में वायरल हुए गुजरात दलित के वीडियो पर अफ़सोस जताते हुए उन्होंने कहा की वीडियोस और न्यूज़ से ये कुलबुलाहटें और नज़दीक आ गयी है, बस जरुरत है तो उन कहानियो को अच्छे से दर्शाने की। इन् मुद्दों से विचलित होकर ही झा ने राजनीती में हाथ आजमाया था किन्तु दस साल मेहनत करने पर भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी और 2008 में उन्होंने राजनीती से संन्यास लेकर खुद को फिल्मो के प्रति पूरी तरह से समर्पित कर दिया।

झा एक अच्छे निर्देशक ही नहीं बल्कि अभिनेता भी है और एंकर भी। हर दिन कुछ नया करने का जूनून उन्हें अपने आप को चैलेंज करने पर मजबूर करता है। “एक्टिंग हो या लिखना, ये सब तरीके हैं खुद को अभिव्यक्त करने के। मैं इससे जुड़े हर काम को करने के लिए खुद को तैयार रखता हूं।“ फिलहाल झा अपनी आने वाली फिल्म सत्संग की तैयारी कर रहे है. इस फिल्म के लिए वे बहुत सी धर्म की किताबे पढ़ रहे है।

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