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Friday, August 17th, 2018 04:41 PM
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कभी रेलवे ने नौकरी देने से किया था इनकार, आज IAS टॉप कर बनी कलेक्टर प्रांजल




कभी रेलवे ने नौकरी देने से किया था इनकार, आज IAS टॉप कर बनी कलेक्टर प्रांजलEducation & Career



महाराष्ट्र के उल्हास नगर की रहने वाली प्रांजल पाटिल (30) देश की पहली नाबीर्ना आएएस अफसर बन गई हैं। जब वो छह साल की र्थी, तभी से आंखों की रोशनी कम होने लगीभ थी। उनके रेटिना में परेशानी थी। उनके रेटिना में परेशानी थी। बहुत इलाज के बाद भी जब ठीक नहीं हुआ, तब भी प्रपंजल ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई पूरी की। कमला मेहता दादर स्कूल फाॅर ब्लाइंड से मरठी मेे स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट जेवियर काॅलेज में रिसोर्स सेंटर की मदद से आगे की पढ़ाई पूरी की।

इंटरनेशलन रिलेशन में मास्टर की पढ़ाई जेएनयू से पूरी की। फिर एम. फिल और पीएच-डी का आॅफर भी आया, लेकिन उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और 2017 में पहली ही बार में 773 वी रैंक हासिल की। अब मूसरी की लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में ट्रेनिग पूरी हो चुकी हैं। उन्हें करेल की पोस्टिंग मिली है और 28 मई को उन्होने काम संभाल लिया है। यहां आकर वो खुश हैं।

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बोलीं- जो सपने देखने को तैयार हैं, मैं उनका समर्थन करुंगी

अपनी कामयाबी के बाद मुंबई लौटी प्रांजल ने कहा- जो जो कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं, सपने देखने के लिए तैयार हैं, मैं उन सबका समर्थन करुंगी। मैं सबको सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करुंगी। प्रांजल जब 6 साल की थीं, तभी उनकी एक आंख में पेंसिल से चोट लग गई, धीरे-धीरे उनके दोनों आंखों की रोशनी जाती रही, लेकिन पढ़ने आगे बढ़ने की ललक और बढ़ती गई।

12वीं में 85 फीसदी अंक लाने के बाद उन्होंने मुंबई से सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्रवेश लिया। रोज़ उल्लाहसनगर से कॉलेज तक की लगभग 60 किलोमीटर की दूरी लेकिन यहीं से यूपीएससी में बैठने के उनके सपने पलने शुरू हुए। एम, एमफिल और फिलहाल जेएनयू से पीएचडी करते हुए प्रांजल ने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और पहली कोशिश में ही 773 रैंक हासिल किया।

उनकी उपलब्धि से मां खुश हैं, संयत हैं लेकिन बाबा की आंखें छलक आती हैं। उनके पिता एलबी पाटिल ने कहा उसका फोन आया तो उसने पूछा बाबा आपको लगा था कि मैं पास हो जाऊंगी, मैंने कहा हां मुझे पूरा भरोसा था। वहीं मां ज्योति पाटिल का कहना था- वह हमेशा कामयाब रही है, कभी असफल नहीं हुई। हम सबको उस पर पूरा भरोसा था।

कुछ सालों पहले प्रांजल की शादी हुई थी, तब उन्होंने शर्त रखी थी कि वह पढ़ाई नहीं छोड़ेंगी। प्रांजल का कहना है कि उनकी कामयाबी के पीछे उनके पति का बड़ा योगदान है, जिन्होंने हर कदम पर उनका सहयोग दिया।

रेलवे ने किया था नौकरी देने से इनकार

प्रांजल पाटिल ने साल 2016 में अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 733वीं रैंक हासिल की थी. प्रांजल को उस समय भारतीय रेलवे लेखा सेवा (आईआरएएस) में नौकरी आवंटित की गई थी. ट्रेनिंग के समय रेलवे मंत्रालय ने उन्हें नौकरी देने से इनकार कर दिया. रेलवे मंत्रालय ने प्रांजल की सौ फीसदी नेत्रहीनता को कमी का आधार बनाया था.

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