Monday, November 20th, 2017 09:13 AM
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RBI ने इस्लामिक बैंकिंग को नामंजूर, जानिए क्या है इसकी ख़ासियत




RBI ने इस्लामिक बैंकिंग को नामंजूर, जानिए क्या है इसकी ख़ासियतBusiness

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नोटबंदी को पूरा एक साल हो गया। जनता ने भी काफी तकलीफ उठा ली और अब उनके लिए कुछ सुकून भरे पल आए हैं। सुकून भरे पल भारत में और भी आ सकते थे लेकिन आरबीआई ने अभी अपने एक फैसले से उसे आपसे दूर कर दिया है। दरअसल हम बात कर रहे हैं आरबीआई के लिए एक अहम फैसले की।

नोटबंदी के बाद आरबीआई के पास इस्लामिक बैंकिंग को भारत में लागू करने का प्रस्ताव आया था जिस पर आरबीआई को अपनी सहमति देनी थी लेकिन अब आरबीआई ने इस पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि भारत में इस्लामिक बैंकिंग को लागू करने की कोई जरूरत नहीं है। यहां पर सभी नागरिकों को विस्तृत और समान रूप से बैंकिंग व्यवस्था उपलब्ध है।

क्या है इस्लामिक बैंकिंग

इस्लामिक बैंकिंग नाम आपके लिए भले ही नया हो लेकिन इसे दुनियाभर के 75 देशों में लागू किया जा चुका है। इस्लामिक बैंकिंग में शरिया के अनुसार ब्याज मुक्त बैंकिंग होती है क्योंकि इस्लाम के अनुसार रीबा यानि ब्याज को हराम माना गया है। इस्लामिक बैंकिंग को सउदी अरब, मलेशिया, कुवैत, कतर, ईरान, स्विट्जरलैंड, जॉर्डन, यमन, यूके, इंडोनेशिया जैसे देशों में अपनाया जाता है।

हमारी बैंक से अलग है नियम

इस्लामिक बैंक आपको बैंक की तरह ही है जिस तरह आप अपने बैंक में पैसे जमा करते हैं उसी तरह निकाल भी सकते हैं। उसी तरह का नियम इस्लामिक बैंकिंग में भी है लेकिन फर्क इतना है कि जिस तरह भारत में पैसे जमा करने पर ब्याज मिलता है उस तरह इस्लामिक बैंकिंग में ब्याज कमाने की अनुमति नहीं है लेकिन अगर आपके अकाउंट में पैसा पड़ा हो और इससे बैंक का फायदा हो रहा हो तो बैंक आपको कुछ न कुछ जरूर गिफ्ट करता है।

# यूथेन्स न्यूज की इस स्टोरी में पढ़िए इस्लामिक बैंकिंग के बारे में सब कुछ

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