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Wednesday, May 23rd, 2018 08:51 PM
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इस महिला ने साड़ी को लेकर बदली लोगों की सोच, किया ऐसा कारनामा कि दंग रह जाएंगे आप




इस महिला ने साड़ी को लेकर बदली लोगों की सोच, किया ऐसा कारनामा कि दंग रह जाएंगे आपSocial



आज देश कितना भी विकसित क्यों न हो गया हो, लेकिन लोगों की सोच महिलाओं को लेकर वही है। ऐसे लोगों की सोच को बदलने के लिए पुणे की एक महिला ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि लोगों को जरूर यकीन हो जाएगा कि महिलाएं चाहें तो कुछ भी कर सकती हैं, उनके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं हैं।

दरअसल, पुणे की रहने वाली शीतल राणे आसमान में छलांग लगाते हुए सबको पीछे छोड़ आगे निकल गई हैं। 13 हजार फीट की ऊंचाई से महाराष्ट्रीयन नव्वारी साड़ी पहन छलांग लगाकर उन्होंने एक नया इतिहास रच डाला है। ये कोई आम बात नहीं है। शीतल का कहना है कि वह कुछ अलग करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने नव्वारी साड़ी पहनकर डाइव करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि ये साड़ी 8.25 मीटर लंबी है जो अन्य भारतीय साडिय़ों से काफी ज्यादा है। इसे पहनना ही अपने आप में एक बड़ा चैलेंज है। बता दें कि शीतल पहली एक महिला हैं, जिन्होंने नव्वारी साड़ी पहनकर छलांग लगाई है। उन्होंने यह रिकार्ड थाइलैंड के पटाया में बनाया।

शीतल बताती हैं कि फस्र्ट डाइव में तो वे बहुत डरी हुई थीं, लेकिन उन्हें सुरक्षित लैंड कर लिया। वह साबित करना चाहती थीं कि महिलाएं सिर्फ आम जिन्दगी में ही साड़ी नहीं पहनती बल्कि साड़ी पहनकर कई कारनामें भी कर सकती हैं।

2003 से एडवेंचर स्पोट्र्स की दुनिया में नाम कमा चुकी शीतल को पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है। शायद आपको न पता हो, लेकिन उन्होंने 14 साल के करियर में नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर 707 स्काई डाइव लगाई हैं। आमतौर पर डाइविंग के समय बॉडी फिट कॉस्ट्यृम पहननी होती है। लेकिन कुछ अलग करने का जुनून शीतल पर सवार था। अब तक 17 नेशनल और 6 से ज्यादा इंटरनेशनल रिकॉर्ड उनके नाम हैं।

2004 में लगाई पहली छलांग –

उन्होंने बताया कि अप्रैल 2004 में एडवेंचर स्पोट्र्स की शुरूआत की। तब उन्होंने नॉर्थ पोल पर माइनस 37 डिग्री टेम्प्रेचर में 2400 फीट उऊचाई से छलांग लगाई थी। 2016 में एंटार्टिका में 11, 600 फीट से जंप किया, ऐसा करनी वाली वे दुनिया की पहली यंगेस्ट महिला बन गई हैं।

मिल चुके हैं ये पुरस्कार –
अपने करियर में शीतल 7 महाद्वीपों में डाइविंग कर चुकी हैं। अपने करियर में शीतल 7 महाद्वीपों में स्काइडाइविंग कर चुकी हैं। इसके लिए उन्हें एयरो क्लब ऑफ इंडिया ने पिछले साल FAI साबिहा गोक्सेन मेडल के लिए नॉमिनेट किया था। 2006 में उनको राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से राष्ट्रीय साहस पुरस्कार से और 2011 में राष्ट्रपति प्रतिभा ताई पाटील द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

शादी भी आसमान में-

आपको जानकर हैरत होगी कि शीतल ने अपनी शादी की सभी रस्में भी आसमान में की थीं। उन्होंने स्काईडाइवर वैभव से 2011 में शादी की थी। इसके लिए 750 फीट की ऊंचाई पर हॉट बैलून में शादी की रस्में निभाई। उसके बाद ये देश का पहला सिविलियन कपल बना जो स्काइडाइवर है।

एक न्यूजपेपर ने बदल दी जिन्दगी-

शीतल की जिन्दगी की किस्मत के दरवाजे एक न्यूजपेपर ने खोल दिए। उन्होंने बताया कि वे एक दिन प्रेस की दुकान में कपड़े लेने गईं, तब उनकी नजर उस कपड़े पर लिपटे न्यूजपेपर पर गई जिसमें कमल सिंह ओबड की फोटो छपी थी। कमल उस वक्त पुणे के एनडीए में पोस्टेड थे। उनकी दोस्त के बड़े भाई होने की वजह से शीतल ने कमल से बात की और उनसे अखकबार में छपने की वजह पूछी। तब उन्होंने कहा कि खबर पढ़ें, इस पर शीतल ने ये कहकर फोन काट दिया कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती। बस तभी से उन्होंने ठान लिया कि उन्हें स्काईडाइविंग ही करनी है। दो साल के प्रयास और जिद के बाद शीतल ने आर्टिक सर्कल पर उनके जीवन की पहली स्काईडाइव की।

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