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Thursday, December 14th, 2017 06:32 PM
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श्रवण को है ये कैसी बीमारी, डॉक्टर के पास भी नहीं है इलाज




श्रवण को है ये कैसी बीमारी, डॉक्टर के पास भी नहीं है इलाजHealth & Food

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टेक्रोलॉजी के जमाने में भले ही आज साइंस ने कितनी भी तरक्की कर ली हो, लेकिन डॉक्टर आज भी कुछ बीमारियोंं का इलाज करने में फेल साबित हो रहे हैं। कह सकते हैं कि जहां साइंस एडवांस हो रही है, वहीं इंसानों में अजीबो- गरीब तरह की बीमारियां भी पैदा हो रही है। वो भी ऐसी जिसका इलाज न तो साइंस के पास है, यहां तक की डॉक्टर्स तक इन बीमारियों का नाम ही नहीं सूझता। हाल ही में एक 6 साल के बच्चे का मामला सामने आया है, जिसमें इस बच्चे को अजीब बीमारी है। बच्चा बचपन से इस बीमारी कर गिरफ्त में है, लेकिन इसका अब तक कोई इलाज नहीं मिल सका है और उसने अब तक इस बीमारी के लिए कोई दवा भी नहीं ली है। डॉक्टरों को उसकी इस बीमारी का भी नाम पता नहीं है। मजबूरी अब श्रवण के पैरेंट्स एक्सपेरीमेंट्स तक के लिए उसे सौंपने के लिए तैयार हो गए हैं, ताकि भविष्य में किसी बच्चे को इस स्थिति से न गुजरना पड़े।

श्रवण गर्ग के पिता नितिन गर्ग छत्तीसगढ़ में एक मोबाइल शॉप चलाते हैं। वह बताते हैं कि जब से श्रवण का जन्म हुआ तब से लेकर अब तक वे कई डॉक्टर्स से इलाज करा चुके हैं, पर किसी डॉक्टर को इस बीमारी का नाम तक नहीं पता, तो इलाज कैसे होगा।
रवण के दोनों पैर उसके शरीर से भी ज्यादा भारी हैं। इस कारण उसे चलने-पिुरने में तकलीफ होती है। यही वजह है कि वह बिस्तर पर ही रहता है। श्रवण के पैरेंट्स के पास मेडिकल साइंस की विफलता के बाद किस प्रकार की मनोस्थिति होगी ये उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। नितिन गर्ग के दो टी और एक छोटा बेटा श्रवण है।

नितिन गर्ग का कहना है कि बचपन में जब श्रवण के मां पायल की डिलीवरी के दौरान सोनेाग्राफी कराई गई थी, उसमें साफ समझ आ रहा था। लेकिन अगर डॉक्टर लापरवाही न करते तो शायद हमारा निर्णय बदल जाता। श्रवण के जन्म लेने के बाद से हमने उसे बिलासपुर, दिल्ली, इंदौर से लेकर कोयम्बट्टर तक के अस्पतालों में दिखा लिया लेकिन न तो किसी के पास इलाज है आर न ही इसकी कोई दवा। डॉक्टर बस यही कहते हैं कि आप तो इनकी सेवार कीजिए बस।
श्रवण अपनी उम्र के बच्चों की तरह मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ्य है। हालांकि वह अब तक स्कूल नहीं जा पाया है, लेकिन वह पढ़ाई में होशियार है। श्रवण के पिता के अनुसार – उन्हें ये डर है कि जब श्रवण बड़ा होगा और उसे अपनी इस बीमारी के बारे में पता चलेगा तो उसकी मानसिक स्थिति क्या होगी।

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