भारत में बैडमिंटन का मौसम पूरे शबाब पर है। जहाँ एक ओर दक्षिण भारत में विश्वविद्यालय स्तर पर युवा प्रतिभाओं का महाकुंभ शुरू हो चुका है, वहीं राजधानी दिल्ली में विश्व स्तरीय खिलाड़ियों के बीच होने वाले बड़े मुकाबलों की बिसात बिछ गई है। राजमहेंद्रवरम में छात्राओं के उत्साह और दिल्ली में पीवी सिंधु व लक्ष्य सेन जैसे सितारों की चुनौतियों के बीच देश में खेल का माहौल गरमा गया है।
युवा प्रतिभाओं का मंच और चिकित्सा विज्ञान का मेल
आंध्र प्रदेश के राजमहेंद्रवरम स्थित जीएसएल मेडिकल कॉलेज में डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (NTRUHS) के तत्वावधान में साउथ जोन इंटर-यूनिवर्सिटी महिला बैडमिंटन टूर्नामेंट 2025-26 की भव्य शुरुआत हुई। मंगलवार को जीएसएल इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस चार दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. चंद्रशेखर ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस प्रतियोगिता का पैमाना काफी व्यापक है, जिसमें दक्षिण भारत के 94 विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 450 खिलाड़ी और 120 कोच हिस्सा ले रहे हैं। यह टूर्नामेंट 9 जनवरी तक चलेगा।
उद्घाटन समारोह में डॉ. चंद्रशेखर ने चिकित्सा छात्रों के लिए खेल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य के डॉक्टरों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। खेल न केवल नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं, बल्कि जीत और हार दोनों को संभालने के लिए मानसिक मजबूती भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि एनटीआरयूएचएस राज्य में छात्र-एथलीटों को सबसे अधिक दैनिक भत्ता प्रदान करता है और राष्ट्रीय स्तर के क्वालीफायर के लिए विशेष कोचिंग की व्यवस्था भी करता है। खेल उत्सव के समानांतर, कुलपति ने जीएसएल की अत्याधुनिक ‘एडवांस्ड बायोस्किल लैब’ का भी उद्घाटन किया, जो छात्रों को रोबोटिक सर्जरी करने में सक्षम बनाएगी। जीएसएल के चेयरमैन डॉ. गन्नी भास्कर राव और प्रिंसिपल डॉ. गुरुनाध सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में यह आयोजन खेल और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के समन्वय का प्रतीक बन गया।
इंडिया ओपन: विश्व चैंपियनशिप की तैयारी और कड़े मुकाबले
जहाँ राजमहेंद्रवरम में भविष्य के सितारे अपनी चमक बिखेर रहे हैं, वहीं दिल्ली में होने वाले योनेक्स-सनराइज इंडिया ओपन सुपर 750 टूर्नामेंट के लिए ड्रा घोषित कर दिए गए हैं। यह टूर्नामेंट भारतीय शटलरों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। खास बात यह है कि अगस्त में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होने वाली बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के लिहाज से इस आयोजन को ‘ड्रेस रिहर्सल’ माना जा रहा है।
पुरुष एकल वर्ग में भारतीय फैंस के लिए स्थिति थोड़ी असमंजस भरी होगी क्योंकि लक्ष्य सेन का सामना हमवतन और पूर्व विश्व जूनियर कांस्य पदक विजेता आयुष शेट्टी से होगा। इस ‘ऑल-इंडियन’ भिड़ंत का मतलब है कि शुरुआती दौर में ही एक भारतीय चुनौती समाप्त हो जाएगी। इस मुकाबले के विजेता को आगे चलकर चीनी ताइपे के चौथी वरीयता प्राप्त चाउ तिएन चेन या जापान के केंटा निशिमोतो जैसी कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। डेनमार्क के एंडर्स एंटोनसेन के हटने के बाद मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने वाले एचएस प्रणय अपने अभियान की शुरुआत पिछले संस्करण के फाइनलिस्ट हांगकांग के ली चेुक यियू के खिलाफ करेंगे।
सिंधु और श्रीकांत के लिए मुश्किल राहें
महिला एकल और अन्य मुकाबलों में भी राह आसान नहीं है। पूर्व विश्व चैंपियन पीवी सिंधु का सामना पहले ही दौर में वियतनाम की थुई लिन्ह गुयेन से होगा। यह मुकाबला सिंधु के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है क्योंकि गुयेन ने हाल ही में उन्हें दो बार हराया है। यदि सिंधु इस बाधा को पार कर लेती हैं, तो अगले दौर में उनका सामना दूसरी वरीयता प्राप्त वांग झी यी या उनकी चीनी टीम की साथी गाओ फेंग जी से हो सकता है। चोट के बाद वापसी कर रही मालविका बंसोड़ अपनी संरक्षित रैंकिंग के साथ चीनी ताइपे की पाई यू पो से भिड़ेंगी। वहीं, एक दिलचस्प मुकाबले में शीर्ष वरीयता प्राप्त एन से यंग का सामना पूर्व विश्व चैंपियन नोजोमी ओकुहारा से होगा।
पुरुषों के अन्य मुकाबलों में पूर्व विश्व नंबर 1 किदांबी श्रीकांत को चीनी ताइपे के लिन चुन-यी से कड़ी टक्कर मिलेगी, जो थॉमस कप कांस्य पदक विजेता टीम के सदस्य हैं। युगल वर्ग की बात करें तो सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी को पहले दौर में अमेरिका की जोड़ी के खिलाफ अपेक्षाकृत आसान शुरुआत मिल सकती है, लेकिन क्वार्टर फाइनल में उन्हें चीनी जोड़ी से कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। वहीं, त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद का सामना थाईलैंड की जोड़ी से होगा। कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक होने वाले हैं।