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15/01/2018

नहीं रहे कहानियों के ‘सरताज’, दिल के दौरे से हुई मौत




नहीं रहे कहानियों के ‘सरताज’, दिल के दौरे से हुई मौतSocial

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जब दुनिया में टीवी, रेडियो इंटरनेट और मोबाइल नहीं थे तब किताबों और कहानियां ही मनोरंजन का एकमात्र सहारा हुआ करती थी। ये सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि पढ़ने वाले का ज्ञान भी बढ़ाती थी। इन्हें लिखने वाले लोगों को भी समाज में उच्च दर्जा दिया जाता था। हाल ही में एक ऐसे ही उच्च कथाकार का निधन हुआ है। इनका नाम दूधनाथ सिंह हैं।

दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत

प्रसिद्ध कथाकार दूधनाथ सिंह का गुरुवार देर रात निधन हो गया. पिछले कई दिनों से वह इलाहाबाद के फीनिक्स अस्पताल में भर्ती थे. कैंसर से पीड़ित दूधनाथ सिंह को बुधवार रात दिल का दौरा पड़ा था. उन्हें वेंटीलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया था जहां उन्होंने गुरुवार देर रात 12 बजे अंतिम सांस ली.

प्रोस्टेट कैंसर की भी हुई थी पुष्टि

उनके परिजनों के अनुसार पिछले साल अक्तूबर माह में तकलीफ बढ़ने पर दूधनाथ सिंह को नई दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में दिखाया गया. जांच में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि होने पर उनका वहीं इलाज चला. 26 दिसंबर को उन्हें इलाहाबाद लाया गया. दो-तीन दिन बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें फीनिक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तब से उनका वहीं इलाज चल रहा था.

दो साल पहले हुआ था पत्नी का निधन

दो साल पहले उनकी पत्नी निर्मला ठाकुर का निधन हो गया था. दूधनाथ सिंह अपने पीछे दो बेटे-बहू, बेटी-दामाद और नाती-पोतों से भरा परिवार छोड़ गए हैं. गौरतलब है कि मूल रूप से बलिया के रहने वाले दूधनाथ सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए किया और यहीं वह हिंदी के अध्यापक नियुक्त हुए.

निराला और महादेवी के प्रिय थे दूधनाथ

1994 में सेवानिवृत्ति के बाद से लेखन और संगठन में निरंतर सक्रिय रहे. निराला, पंत और महादेवी के प्रिय रहे दूधनाथ सिंह का आखिरी कलाम ’लौट आओ घर’ था. ’सपाट चेहरे वाला आदमी’, ’यमगाथा’, ’धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएं थीं.

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