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Thursday, December 14th, 2017 06:45 PM
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तलवार दंपत्ति ने उम्रकैद के फैसले को दी चुनौती, आज होगा फैसला




तलवार दंपत्ति ने उम्रकैद के फैसले को दी चुनौती, आज होगा फैसलाSocial

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सन् 2008 एक ऐसा दिन था, जब किसी मासूम लड़की की हत्या से पूरा देश रो पड़ा था। हम बात कर रहे हैं उस आरूषि तलवार की जिसकी 2008 में अपने नोएडा के फ्लैट में गला कटी हुई लाश मिली। हत्या कैसे हुई ये गुत्थी तो सुलझ नहीं पाई, इस बीच इतनी बातें सामने आईं कि मामला सुलझने के बजाए और उलझता चला गया और ये हत्याकांड आज भी एक रहस्य बनकर रह गया है। तलवार दंपत्ति ने उम्रकैद के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की है।

बता दें कि सीबीआई कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसलिए आज इलाहाबाद हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रहा है। बता दें कि तलवार दंपत्ति को उनकी बेटी आरूषि की हत्या के मामले में सीबीआई कोर्ट ने दोषी माना था। इसके अलावा उन पर जांच को भटकाने का भी आरोप है। इन दिनों तलवार दंपत्ति गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं। इस पूरे मामले में वे अब तक नहीं बता पाए हैं कि अगर मर्डर उन्होंने नहीं किया तो कातिल आखिर था कौन।

जानिए उस काली रात का पूरा सच-

15 मई 2008- ये रात शायद आरूषि की जिन्दगी की आखिरी रात थी। रात में करीब 10 से 12 बजे के बीच आरूषि, मां नुपूर तलवार और पिता राजेश तलवार साथ ही थे। दरअसल, आरूषि चेतन भगत की किताब थ्री मिसटेक्स ऑफ माय लाइफ पढ़ रही थी। दो दिन बाद आरूषि का जन्मदिन था, तो वे इस बात से खुश थीं कि अब सिर्फ दो दिन ही बचे हैं। नुपुर भी उनके कमरे में आ गईं और पिता राजेश तलवार का लैपटॉप वर्क नहीं कर रहा था, इसलिए वो भी आरूषि के कमरे में आकर काम करने लगे। इधर मां-बेटी बात करती रहीं। कुछ देर बाद नुपूर और राजेश तलवार कमरे से चले गए, लेकिन हर बार की तरह इस बार वे बाहर से आरूषि के कमरे का ताला डालना भूल गए। ये बात अब तक रहस्य है कि आखिर तलवार दंपत्ति आरूषि के कमरे का ताला क्यों डालते थे।

16 मई-  16 मई एक ऐसी तारीख जो देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री के तौर पर दर्ज है। नोएडा के एक फ्लैट में एक बेटी का मर्डर हुआ और आरोपों के घेरे में आ गए उसके माता-पिता यानि राजेश और नुपूर तलवार। 14 साल की आरूषि तलवार की उसके नोएडा स्थित जलवायु विहार के घर के बेडरूम में लाश मिली। आरूषि का गला कटा हुआ था। इसलिए सबसे पहले पुलिस को घर के नौकर हेमराज पर शक हुआ।

17 मई- इसके बाद 17 मई को नौकर हेमराज की लाश छत पर पड़ी मिली। हेमराज के कमरे की जांच की गई, तो देखा कि यहां बीयर की बोतलें और तीन गिलास पड़े हुए हैं। बिस्तर भी कुछ यूं मुड़ा हुआ है कि जैसे यहां तीन लोग बैठे हों। ये गुत्थी सुलझ नहीं पाई।

23 मई-  काफी जांच पड़ताल के बाद कुछ सबूतों के आधार पर यूपी पुलिस ने आयुषी और हेमराज के कत्ल के आरोप में तलवार दंपत्ति को हिरासत में लिया।

1 जून-  मर्डर की गुत्थियां उलझती जा रही थीं, इसलिए केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
13 जून- डॉ.राजेश तलवार के कंपाउंडर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। इसके बाद तलावार के दोस्त के नौकर राजकुमार और पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। इन तीनों को आरोपी बनाया गया।

12 जुलाई-  राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल से रिहाई मिली।
12 सितंबर– तीनों आरोपियों को कोर्ट से जमानत पर रिहा किया गया। बता दें कि इस मामले में सीबीआई 90 दिनों तक चार्जशीट फाइल नहीं कर पाई थी।

2009- अगले साल 10 सितंबर 2009 को मर्डर की जांच करने के लिए सीबीआई की दूसरी टीम तैयार की गई।
2010- 29 दिसंबर को सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश की।
2011- जनवरी में राजेश तलवार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ लोअर कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की।
फरवरी- आरूषि के माता-पिता को सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया। 21 फरवरी को दंपत्ति समन खारिज कराने कोर्ट गए।
18-19 मार्च- दोनों की समन रद्द करने की अपील खारिज केर दी गई और कार्यवाही शुरू करने के लिए कहा गया। दोनों पर स्टे भी लगा दिया गया था।
6 जनवरी 2012- कोर्ट ने अब ट्रायल शुरू करने की परमिशन दे दी थी।


11 जनू- गाजियाबाद में स्पेशल ट्रायल शुरू किया गया।
25 नवंबर 2013- गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को आरोपी बताकर उम्रकैद की सजा सुना दी।
2014- दोनों ने उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए इलाहाबाद कोर्ट में अपील की।
11 जनवरी 2017- दोनों की अपील पर फैसला सुरक्षित किया गया।
1 अगस्त – सीबीआई के दावों में विरोधाभास जैसी स्थित को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि दंपत्ति की अपील पर फिर से सुनवाई करेंगे।
8 सितंबर- हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया।

 

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