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15/01/2018

अपने करियर में सक्‍सेस होना है तो जरूर पढ़े स्‍वामी विवेकानंद के ये 3 किस्से




अपने करियर में सक्‍सेस होना है तो जरूर पढ़े स्‍वामी विवेकानंद के ये 3 किस्से

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जैसा की हम सभी जानते है कि हमारे देश में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। अब यह तो पता ही होगा की किस व्यक्ति के जन्मदिन के उपलक्ष्य में यह मनाया जाता है। खैर फ़िक्र ना करे यदि आपको पता नही है की किस व्यक्ति के जन्मदिन के उपलक्ष्य में हमारे देश में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है तो आज हम आपको बता देते है।

दरअसल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंदजी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्र था। स्वामी विवेकानंद देश के पहले युवा थे जिन्होने शिकागों धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और भाईयों और बहनों के संबोधन से सबका दिल जीता था। वे युवाओं के लिए आज भी एक प्रेरणास्त्रोत है। उनकी कही बातें आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करती है। तो चलिए स्‍वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़ी ऐसी कुछ खास बाते बताने जा रहे हैं जिन्होंने उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया।

वैसे तो आप ने स्‍वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े बहुत से किस्से सुने होगे लेकिन आज हम जिन किस्सों के बारे में बताने जा रहे है वे शायद ही इससे पहले आप ने कभी सुने हो। इतना ही नहीं यकीन मानिए इन किस्सों के बाद आप भी अपने जीवन में बड़े-बड़े बदलाव कर लेगें।

जो भी करो पूरी श‍िद्दत से करो

एक बार की बात है स्वामी विवेकानंद अमेरिका में भ्रमण कर रहे थे। तभी एक जगह से गुजरते हुए उन्होंने पुल पर खड़े कुछ लड़कों को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बंदूक से निशाना लगाते देखा। किसी भी लड़के का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था। तब उन्होंने एक लड़के से बंदूक ली और खुद निशाना लगाने लगे। उन्होंने पहला निशाना लगाया और वो बिलकुल सही लगा। फिर एक के बाद एक उन्होंने कुल 12 निशाने लगाए और सभी बिलकुल सटीक लगे। लड़के दंग रह गए और उनसे पूछा, ‘भला आप ये कैसे कर लेते हैं?’ स्वामी विवेकानंद बोले, ‘तुम जो भी कर रहे हो अपना पूरा दिमाग उसी एक काम में लगाओ। अगर तुम निशाना लगा रहे हो तो तम्हारा पूरा ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर होना चाहिए। तब तुम कभी चूकोगे नहीं। अगर तुम अपना पाठ पढ़ रहे हो तो सिर्फ पाठ के बारे में सोचो। मेरे देश में बच्चों को यही करना सिखाया जाता है।’

डर से भागो मत, उसका सामना करो

एक बार स्‍वामी विवेकानंद बनारस में दुर्गा जी के मंदिर से निकल रहे थे कि तभी वहां मौजूद बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया। बंदर उनके नजदीक आकर उन्‍हें डराने लगे। विवेकानंद जी खुद को बचाने के लिए भागने लगे, लेकिन बंदरों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। पास खड़ा एक वृद्ध सन्यासी ये सब देख रहा था। उसने स्वामी विवेकानंद को रोका और बोला, ‘रुको! उनका सामना करो।’ विवेकानंद जी तुरंत पलटे और बंदरों की तरफ बढ़ने लगे। फिर क्‍या था सारे बंदर भाग गए। इस घटना से स्वामी जी को सीख मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक संबोधन में कहा भी, ‘यदि तुम कभी किसी चीज से भयभीत हो, तो उससे भागो मत, पलटो और सामना करो।’ इसलिए स्‍वामी विवेकानंद का हमेशा कहना था कि डर से भागने के बजाए उसका सामना करना चाहिए।

दूसरों के पीछे भागने के बजाए, अपनी मंजिल खुद बनाओ

एक बार की बात है एक व्यक्ति स्वामी जी से बोला, ‘काफी मेहनत के बाद भी मैं सफल नहीं हो पा रहा हूँ ।’ स्वामी जी बोले, ‘तुम मेरे कुत्ते को सैर करा लाओ।’ जब वह वापस आया तो कुत्ता थका हुआ था और उसका चेहरा चमक रहा था। स्वामी जी ने कारण पूछा तो उसने बताया, ‘कुत्ता गली के कुत्तों के पीछे भाग रहा था, जबकि मैं सीधे रास्ते चल रहा था।’ स्वामी जी बोले, ‘यही तुम्हारा जवाब है। तुम अपनी मंजिल पर जाने के बजाय दूसरों के पीछे भागते रहते हो।’

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