page level


Thursday, December 14th, 2017 05:02 PM
Flash




कभी कार्पेंटर रहे टुंडा ने 65 की उम्र में 18 साल की लड़की से की थी शादी




कभी कार्पेंटर रहे टुंडा ने 65 की उम्र में 18 साल की लड़की से की थी शादी

Sponsored




लंबे समय से फरार चल रहे 1996 सोनीपत बम ब्लास्ट मामले में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई है। अदालत ने टुंडा को सोमवार को अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने साथ ही टुंडा को आदेश दिया है कि वह सभी पीड़ितों को 50-50 हजार रुपये दे। बता दें कि सोनीपत में 28 दिसंबर 1996 को दो जगह पर हुए बम धमाकों में टुंडा का हाथ था। इस भयानक धमाके में एक दजर्न लोग घायल हुए थे। टुंडा जितना खतरनाक बॉम मेकर है, उनकी जिन्दगी की कहानी भी काफी दिलचस्प है। तो आइए हम आपको बताते हैं कि कैसे टुंडा बन गए एक बॉम मेकर।

अब्दुल करीम टुंडा का जन्म 1943 में दरियागंज के एक बहुत गरीब परिवार में हुआ था। घर चलाने के लिए उन्होंने सबसे पहले भड़ई यानि कारपेंटर का काम शुरू किया। उनकी पहली शादी 1964 में गाजियाबाद की लड़की से हुई। इसके बाद वे 1982 में अहमदाबारद आ गए जहां उन्होंने कार्पेन्टरी का काम किया। यहां वे मस्जिद की देखभाल भी करते साथ ही बच्चों को कुरान भी पढ़ाया करते थे। उनकी दूसरी शादी मुमताज से हुई। उनके एक लड़का है इरशान। 1989 का समय ऐसा था जब उन्होंने वापस अपने घर लौटना पड़ा। इस वक्त टुंडा की उम्र करीब 65 थी। इस उम्र में टुंडा ने बांग्लादेश में तीसरी शादी रचाई वो भी 47 साल की छोटी लड़की से। 16 साल की आसमा से शादी रचाने के पीछे टुंडा की क्या पॉलिसी थी, ये तो पता नहीं लेकिन इस शादी से उन्हें 6 बच्चे हुए। रोचक बात तो ये है कि टुंडा का सबसे बड़ा बेटा 53 साल का है और सबसे छोटे बेटे की उम्र अभी मात्र 7 साल है।

40 की उम्र में बना जेहादी-

हर आतंकी बचपन से ही आतंकी नहीं होता। टुंडा की आतंकी बनने की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह 40 की उम्र में जिहादी बना। 1993 में मुंबई ब्लास्ट के एक साल बाद उसने बांग्लादेश में उसने बॉम बनाना सीखा। 1998 तक वह बॉम बनाने में इतना परिपक्व हो गया था कि पाकिसतान के लश्कर के आतंकी कैंप में युवाओं को भी बॉम बनाने की ट्रेनिंग देने लगा। वहां रहते हुए ही वे कई आतंकी संगठनों के संपर्क में आया था। बता दें कि 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भी वह बम ब्लास्ट करने की कोशिश में था। लेकिन वह कामियाब नहीं हो सका।

इन आतंकवादियों से रहे संबंध-

टुंडा के भाई अब्दुल मलिक ने बताया कि पाकिस्तान में रहते हुए टुंडा के कई आतंकी संगठनों से संबंध रहे हैं। जिसमें आईएसआई, जैश -ए-मोहम्मद, इंडियन मुजाएउद्दीन, बब्बर खालसा और भी कई। साथ ही उनके संबंध आतंकी हासिफ सईद, मौलाना मसूद अजहर, जकी-उर-रहमान-लक्वी, दाउद इब्राहम और भी कई वॉन्टेड टैरेरिस्ट से थे। इससे पहले वह रोहिंग्या ऑपरेटिव्स से भी जुड़ा हुआ था। बता दें कि लैट कमांडर्स रेहान अलियाज जफर और अजम चीमा से भी जुड़ा हुआ था।

अब्दुल करीम से ऐसे बने टुंडा-

पुलिस के अनुसार टुंडा ने कुछ दिनों तक दिल्ली के एक बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की भी नौकरी की है। खबरों से मिली जानकारी के अनुसार अब्दुल करीम 1985 में राजस्थान के टॉक शहर में जाकर काम करना शुरू किया। टॉक में एक पाइप बम बनाने के दौरान उसका हाथ कट गया, जिससे उसका नाम टुंडा पड़ गया।

यह है पूरा मामला-

दरअसल सोनीपत में 28 दिसंबर 1996 को दो जगहों पर बम विस्फोट हुए। इस संबंध में इंद्रा कॉलोनी निवासी सज्जन सिंह के बयान पर मामला दर्ज किया गया। सज्जन सिंह ने बताया कि वह अपने दोस्त के साथ फिल्म देखने पहुंचा था, तीाी वहां बम ब्लास्ट हो गया, जहां दजर्न भर लोग घायल हो गए थे। 2013 में दिल्ली पुलिस ने टुंडा को भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया था। उत्तर प्रदेश के पिलखुआ का रहने वाल टुंडा मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली, रोहतक और जालंधर में हुए हमलों का आरोपी है। इन हमलों में 20 से अधिक लोग मारे गए थे और 400 से अधिक लोग घायल हो गए। सैयद अब्दुल करीम उर्फ टुंडा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैएबा का संदिग्ध आतंकी है।

Sponsored






Loading…

You may also like

No Related News

Subscribe

यूथ से जुड़ी इंट्रेस्टिंग ख़बरें पाने के लिए सब्सक्राइब करें