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Sunday, July 22nd, 2018 11:19 PM
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UGC का सफर खत्म, HEC बनाएगा यूनिवर्सिटी के नियम, जानिए किन मुद्दों पर होगा फोकस




UGC का सफर खत्म, HEC बनाएगा यूनिवर्सिटी के नियम, जानिए किन मुद्दों पर होगा फोकसEducation & Career



हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स को मान्यता देने व नियम बनाने वाली संस्था यूजीसी का सफर अब खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार अब इसकी जगह उच्च शिक्षा आयोग का गठन करने जा रही है। बता दें कि यह पहली बार है जब सरकार ने यूजीसी को गठित करने वाले यूजीसी एक्ट 1965 को भंग किया है। इसकी जगह अब हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया का मसौदा तैयार कर लोगों से भी इस पर उनकी राय मांगी गई है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा ये अहम कदम उठाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। ड्राफ्ट के अनुसार भारत का नया उच्च शिक्षा आयोग पूरी तरह अकादमिक मामलों पर ध्यान देगा, जबकि वित्तीय अधिकार अब भी मंत्रालय के पास ही होंगे। मोदी सरकार मानसून सत्र में इस ड्राफ्ट को पेश कर सकती है।

एचईसी एक्ट 2018 के नाम से जाना जाएगा-

सरकार की ओर से तैयार किए जाने वाले ड्राफ्ट का नाम हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया एक्ट 2018 के नाम से जाना जाएगा। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट में लिखा, ‘मेरी सभी शिक्षाविदों, स्टेकहोल्डर और अन्य लोगों से अपील हैं कि 7 जुलाई शाम 5 बजे तक सुझाव और टिप्पणी दें और reformofugc@gmail.com पर मेल करें।’

ये काम करेगी HEC –

अब एचईसी केंद्रीय, प्राइवेट, डीम्ड टू वी यूनिवर्सिटी के सभी तरह के नियम तय करेगी, ये काम अब तक मंत्रालय करता आ रहा था। इस एक्ट के लागू होने के बाद ऑनलाइन रेगुलेशन डिग्री, नैक रिफॉर्म, यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को एफिलिएशन देना, ओपन डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन आदि का अब सारा काम मंत्रालय नहीं बल्कि एचईसी ही करेगा।

इन मुद्दों पर होगा HEC  का फोकस

एचईसी अपनी नई शुरूआत कई मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कर रहा है। एचईसी का मुख्य उद्देश्य क्वालिटी रिसर्च आदि पर फोकस करना होगा। हर साल एकेडमिक परफॉर्मेंस का इवेलुएशन , रिसर्च को बढ़ावा, पढ़ाई के आधार पर संस्थानों का इवेलुएशन कर मान्यता देना आदि काम शामिल हैं। यदि राज्य इन नियमों का पालन नहीं करते तो फिर मामला केंद्र सरकार के पास जाएगा।

जानिए कितना सख्त होगा HEC

यूजीसी के बजाय एचईसी नियमों को लेकर काफी सख्ती बरतने वाला है। एचईसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों की मनमानी को रोकने के लिए एक्ट में जुर्माने के साथ जेल की सजा का प्रवाधान भी रखा है। ड्राफ्ट में तैयार किए गए रूल्स एंड रेगुलशन का जो यूनिवर्सिटी या कॉलेज पालन नहीं करेगा तो एचईसी उस संस्थान की मान्यता पूरी तरह से रद्द कर देगा। जिस कोर्स या डिग्री में संस्थान नियमों का उल्लंघन करेंगे तो इस कोर्स या डिग्री को पढ़ाने की मंजूरी वापस ले ली जाएगी। ऐसे संस्थानों पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। इतना ही नहीं दोषी पाए जाने पर इन अधिकारियों को सीपीसी के तहत तीन साल या उससे ज्यादा की भी जेल हो सकती है। बता दें कि वर्तमान में, यूजीसी जनता को सूचित करने के लिए अपनी वेबसाइट पर फर्जी संस्थानों के नाम तो जारी करता है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।

डॉ.राधाकृणनन ने रखी थी यूजीसी की नींव-

यूजीसी का इतिहास काफी पुराना है। सन् 1948 में डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णनन की अध्यक्षता में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की नींव रखी गई थी। इसके अंतर्गत देश में शिक्षा की आवश्यकताओं और उनमें सुधार पर काम किए जाने पर विचार किया जाता था। इस आयोग ने सलाह दी थी कि आजादी से पहले बनी यूजीसी को फिर से गठित किया जाए। सन् 1952 में सरकार ने निर्णय लिया कि केंद्रीय और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों को दी जाने वाली वित्तीय सहयोग के मामलों में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के अधीन लाया जाए। इस तरह सन् 1953 में को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने औपचारिक तौर पर यूजीसी की नींव रखी थी। इसके बाद 1956 में जाकर ही यूजीसी को संसद में पारित एक खास विध्ेायक के बाद सरकार के अधीन लाया गया और तभी से औपचारिक तौर पर इसे स्थापित माना गया।

2009 में भी यूजीसी के बंद होने की उठी थी मांग-

इस बार ही नहीं बल्कि इससे पहले सन् 2009 में भी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने एक योजना के तहत यूजसी और अखिल भारतीय शिक्षा परिषद को बंद करके उसके स्थान पर ज्यादा शक्तिशाली प्रधिकरण बनाए जाने की मांग की थी। इसके बाद मार्च 2015 में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने भी कहा था कि यूजीसी अपने मकसद में असफल रहा है , इसे भंग कर दिया जाना चाहिए। तब से इसकी जगह अन्य विकल्प तलाशने का काम जारी है।

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