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Monday, July 23rd, 2018 12:11 AM
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UP के 128 विधायक “रिश्वतखोर”, चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा खर्चीले इस राज्य के विधायक




UP के 128 विधायक “रिश्वतखोर”, चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा खर्चीले इस राज्य के विधायकPolitics



देश में चुनावों में जरूरत से ज्यादा खर्च करने का चलन बढ़ा है। कैसे भी चुनाव हों, इसमें नेता जीभर के खर्चा करते हैं, फिर भले ही वह रैली हो या फिर चुनाव प्रचार। पिछले पांच सालों में देश के राज्यों में हुए चुनाव के दौरान भी यही हालात रहे। यहां 11 राज्यों के विधायकों ने चुनाव जीतने के लिहाज से लिमिट से 50 प्रतिशत तक ज्यादा खर्चा कर दिया। ऐसा करने के मामले में दक्षिण भारत का राज्य केरल सबसे आगे रहा। यहां विधायकों ने लिमिट से ज्यादा 70.14 फीसदी खर्च किया।  बता दें कि 2013-18 के बीच हुए चुनावों में विधायकों ने सबसे ज्यादा खर्च चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर किया है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स और नेशनल इलेक्शन वॉच की ओर से जारी हुए रिपोर्ट में 11 राज्यों मे मौजूदा 4120 विधायकों में से 4087 विधायकों के वोट शेयर और चुनाव प्रचार की खर्च राशि के आंकड़े जारी किए हैं।

दूसरे नंबर पर गुजरात-

चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले केरल के बाद दूसरा नंबर आता है गुजरात का। गुजरात के विधायकों ने तय सीमा से ज्यादा 58.7 फीसदी राशि खर्च की है। वहीं उत्तराखंड के विधायकों ने इससे थोड़ा कम लेकिन 5।.8 प्रतिशत राशि खर्च की है। चुनावी खर्च का विश£ेषण किया गया, जिसमें सामने आया कि केरल के विधायकों ने 19.64 लाख रूपए खर्च किए। जबकि गुजरात के हर विधायक पर खर्च की यह राशि 16 लाख रूपए और उत्रिाखंड के हर विधायक पर 16.19 लाख रूपए पाई गई है।

यूपी में रिश्वतखोर सबसे ज्यादा-

रिपोर्ट के अनुसार यूपी में रिश्वतखोर और भ्रष्टाचार में लिप्त नेता सबसे ज्यादा हैं। यहां चुनाव में जीते हुए 1356 विधायकों पर क्रिमिनल केस दर्ज थे, जिनमें से 128 विधायकों पर रिश्वतखोरी, अवैध भुगतान करने के आरोप थे। इसमें बिहार के सबसे ज्यादा 38 विधायक दागी निकले। जबकि कर्नाटक के 20 और उत्तरप्रदेश के 18 विधायक दागी थे।

बता दें कि चुनाव आयोग ने 2014 में लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा के उम्मीदवारों के लिए खर्च करने की लिमिट तय की थी। बड़े राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के लिए 16 से 28 लाख तक रकम तय की गई थी, वहीं छोटे राज्यों में ये राशि 8 लाख रूपए से बड़ाकर अब 20 लाख रूपए कर दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार विधायकों ने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए प्रचार करने में सिर्फ 5 फीसदी रकम खर्च की है।

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