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Wednesday, April 25th, 2018 09:51 PM
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जल संरक्षण में पिछड़ी सरकार, जलस्तर लुढ़का




जल संरक्षण में पिछड़ी सरकार, जलस्तर लुढ़काSocial



कमलेश पांडे –  देश में जल संरक्षण के तमाम उपाय नाकाफी साबित हुए हैं और धीरे धीरे पूरा देश जल संकट की ओर बढ़ रहा है। इस बात की चुगली कोई और नहीं, बल्कि खुद सरकार द्वारा जारी आंकड़े ही कर रहे हैं। बताया गया है कि देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में दो प्रतिशत की कमी आई, जो चिंता की बात है। शुक्र है कि कुछ राज्यों में जल संरक्षण के उपाय सफलीभूत हुए हैं, अन्यथा स्थिति और बिगड़ सकती थी। सवाल है कि जब अप्रैल माह में ही यह स्थिति है तो मई-जून में क्या हालत होगी, समझा जा सकता है। इसलिए यदि पेयजल संकट के आसन्न खतरों से निबटना है तो न केवल सरकार, बल्कि आमलोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा, अन्यथा हालात बेकाबू हो सकते हैं।

दरअसल, गत 12 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के अधिकांश प्रमुख जलाशयों में 40.857 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 25 प्रतिशत है। यह 5 अप्रैल को समाप्‍त समाप्‍त में 27 प्रतिशत पर था। 12 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के अंत में यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 84 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 90 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ भी देते हैं।

यदि क्षेत्रवार देखा जाए तो कहीं पर स्थिति सुखद है तो कहीं पर दुःखद। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं, जहां 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 3.62 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 20 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 23 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 27 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है। यही नहीं, पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।

पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं, जहां 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 7.83 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 42 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 49 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 36 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है।

पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं जहां 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.69 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 28 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 34 प्रतिशत था। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 32 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है ।

मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं, जहां 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 12.31 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 43 प्रतिशत था। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 30 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।

दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं, जहां 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.41 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 16 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 12 प्रतिशत था। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 22 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से बेहतर है, और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।

इस प्रकार, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बराबर है उनमें हिमाचल प्रदेश शामिल है। लेकिन हैरत की बात है कि इसी अवधि के लिए पिछले वर्ष की तुलना में कम संग्रहण करने वाले राज्यों में पंजाब, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं, जिनमें कई तो बड़े और राजनैतिक रूप से प्रभावशाली प्रदेश हैं। इसलिए इस मामले में यदि समय रहते ही सरकार नहीं सुधरी तो उसे भारी सियासी खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।

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