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Wednesday, April 25th, 2018 09:54 PM
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कौन हैं स्वामी असीमानंद जो मक्का मस्जिद ब्लास्ट में बरी हुए हैं?




कौन हैं स्वामी असीमानंद जो मक्का मस्जिद ब्लास्ट में बरी हुए हैं?Social



हैदराबाद की प्रसिद्ध मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट को लेकर आज 11 साल बाद फैसला आया है। आज कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत 5 आरोपियों को बरी कर दिया है। आपको बता दें कि ये फैसला नमापल्ली कोर्ट में सुनाया गया है और स्वामी असीमानंद हिंदू राइट विंग नेता के हैं।

9 लोग मारे गए थे

18 मई 2007 को हुए इस ब्लास्ट में 9 मारे गए थे जबकि 58 घायल हुए थे। बाद में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग में भी कुछ लोग मारे गए थे। आपको बता दें कि एनआईए मामलों की चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र सह विशेष अदालत ने केस की सुनवाई पूरी कर ली है। आपको बता दें कि इस मामले में 10 आरोपियों में से आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

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स्वामी असीमानंद का नाम भी था शामिल

इसमें नबाकुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल है। जिन 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट बनाई गई थी उसमें से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर बाहर हैं और तीन लोग जेल में बंद हैं। 2007 में हुए इस ब्लास्ट की शुरुआती छानबीन पुलिस ने की थी।

दो आरोपी अभी भी हैं फरार

फिर यह केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में 2011 में यह मामला एनआईए को सौंपा गया। इस मामले में कुल 160 चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 54 गवाह मुकर चुके हैं। मस्जिद ब्लास्ट मामले में दो और मुख्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंगरा अभी भी फरार चल रहे हैं।

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कौन है स्वामी असीमानंद

पुलिस के दावे के मुताबिक असीमानंद मूलतः पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। स्वामी बनने से पहले उनका नाम नब कुमार था। साल 1990 से 2007 के बीच वे आरएसएस से जु़ड़ी संस्था वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत प्रचारक प्रमुख रहे। उन्होंने पुरूलिया में काम किय। करीब दो दशक तक मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सक्रिय रहे।

शबरी धाम से जुड़ा विस्फोट में नाम

पुलिस की जानकारी के मुताबिक असीमानंद साल 1995 में गुजरात के डांग जिले के मुख्यालय आहवा आए और हिंदू संगठन के साथ ‘हिंदू धर्म जागरण और शुद्धिकरण’ का काम शुरू किया। यहां उन्होंने शबरी माता का मंदिर बनाया और शबरी धाम स्थापित किया। इसी शबरी धाम से उनका नाम धमाकों में जुड़ा।

पुलिस के दावे के मुताबिक यही वो शबरी धाम है जहां स्वामी ने साल 2006 में धमाकों से पहले शबरी कुंभ का आयोजन किया और धमाकों में शामिल लोग क़रीब 10 दिन तक वहां रहे। चरमपंथी घटनाओं में उनका पहली बार नाम तब आया जब अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में देवेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी हुई।

अजमेर धमाकों में भी था नाम

साल 2007 में हुए अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में भी स्वामी असीमानंद का नाम आया था और इसके बाद मक्का मस्जिद विस्फोट से भी उनका नाम जुड़ा। खैर अब उन्हें दोनों मामलों से बरी कर दिया है और उनके साथ अन्य आरोपी भी बरी हो गए हैं।

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