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Sunday, July 22nd, 2018 05:43 AM
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दिल्ली पर कौन करेगा “राज”, केजरीवाल या बैजल, आज होगा फैसला




दिल्ली पर कौन करेगा “राज”, केजरीवाल या बैजल, आज होगा फैसलाPolitics



राजधानी दिल्ली पर आखिर कौन राज करेगा, एलजी अनिल बेजल या फिर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, इसका फैसला आज हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की संविधन पीठ आज इसका फैसला कर देगी। करीब एक महीने तक चली इस सुनवाई के बाद पिछले साल 6 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इस संबंध में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब दिल्ली सरकार- केंद्र अधिकार विवाद पर फैसला सुबह साढ़े बजे आने की संभावना है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस ए के सिकरी, जस्टिस ए, एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल है।

यह है पूरी लड़ाई

दिल्ली सरकार ने दलील दी कि दिल्ली का दर्जा दूसरे केंद्रशासित क्षेत्रों से अलग है।  दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार है, ऐसे में चुनी हुई सरकार को कुछ तो अधिकार चाहिए। उसका कहना था कि उपराज्यपाल संविधान और लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं। उनके पास कोई अधिकार नहीं है, लेकिन वह संवैधानिक दायरे से बाहर जाकर कार्य कर रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 239 AA के तहत दिल्ली में विधानसभा का प्रावधान किया है। विधानसभा को फैसला लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

एलजी बन रहे रोढ़ा

 सरकार के हर फैसले में एलजी रोड़ा अटका रहे हैं। एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार (दिल्ली सरकार) जनादेश के मुताबिक काम कर सके, इसके लिए जरूरी है कि आर्टिकल 239AA की समग्र व्याख्या हो। एलजी के रवैये के चलते राजधानी में कोई भी अधिकारी मुख्यमंत्री और मंत्रियों के निर्देश का पालन नहीं कर रहा है

राज्य नहीं है दिल्ली- केंद्र सरकार

केंद्र की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने जिरह की। उन्होंने कहा कि संविधान में ये स्पष्ट है कि दिल्ली एक केंद्र शासित क्षेत्र है। इसे राज्य की तरह नहीं देखा जा सकता। राष्ट्रपति के प्रतिनिधि उपराज्यपाल की भूमिका यहां सबसे अहम है। लेकिन यहां मंत्रिमंडल के निर्णय ही नहीं, उसकी चर्चा के एजेंडे की भी जानकारी एलजी को दी जानी ज़रूरी है।

कोर्ट ने यह की टिप्पणी-

सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि आर्टिकल 239AA के तहत उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के कई फैसलों से असहमति रखने का अधिकार रखते है। पब्लिक आर्डर, ज़मीन, कानून व्यवस्था जैसे विषयों पर उन्हें कहीं ज़्यादा अधिकार हासिल है, लेकिन दिल्ली के लोगों के हित मे राज्य सरकार और एलजी को मिल कर काम करना चाहिए। एलजी दिल्ली सरकार की फाइलों को लंबे समय तक लटका नही सकते। मतभेद की स्थिति में उपराज्यपाल को फाइलों पर कारण सहित जवाब देना चाहिए। अगर किसी मसले को लेकर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच मतभेद है, तो उसे राष्ट्रपति के पास भेज जाना चाहिए।

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