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Friday, September 21st, 2018 03:52 AM
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14 जनवरी को क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति, जानें




14 जनवरी को क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति, जानेंSpiritual



भारत देश में हर दिन कोई न कोई त्यौहार होता है। वैसे इन दिनों सभी को 14 जनवरी का इंतज़ार है। खासतौर पर पतंग का शौक रखने वाले व्यक्तियों को। जी हाँ! 14 जनवरी मतलब “संक्राति का पर्व।” आपको बता दें, पौष मास में जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तो उस काल विशेष को ही ‘संक्रांति’ कहते हैं। दरअसल, मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिसका निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार होता है और मकर राशि में प्रवेश करने के कारण यह पर्व ‘मकर संक्रांति’ व ‘देवदान पर्व’ के नाम से जाना जाता है।

जाने इसका कारण

बताया जाता है कि, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए प्रतिवर्ष 55 विकला या 72 से 90 सालों में 1 अंश पीछे रह जाती है। इससे सूर्य मकर राशि में 1 दिन देरी से प्रवेश करता है। करीब 1,700 साल पहले 22 दिसंबर को मकर संक्रांति मानी जाती थी। इसके बाद पृथ्वी के घूमने की गति के चलते यह धीरे-धीरे दिसंबर के बजाय जनवरी में आ गई है।

वहीं पिछले 3 सालों से लगातार संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। 2017 और 2018 में संक्रांति 14 जनवरी को शाम को अर्की होगी। आपको बता दें, मकर संक्रांति से कई पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं।

पं. सोमेश्वर जोशी के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी, भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। यह भी कहा जाता है कि, गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थीं इसलिए मकर संक्रांति पर गंगासागर (कोलकाता, प. बंगाल) में मेला लगता है।

क्या करें विशेष

ध्यान रहें, दान करने का अनंत गुना फल मिलता है। इस दिन तिल, कंबल, सर्दियों के वस्त्र, आंवला, धन-धान्य आदि का दान करें व नदी में स्नान करें।

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