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Thursday, August 16th, 2018 05:52 AM
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गुरू पूर्णिमा : डिग्री के बाद क्यों बेरोजगार हैं युवा, इंदौर के गुरूओं ने बताई स्थिति ?




गुरू पूर्णिमा : डिग्री के बाद क्यों बेरोजगार हैं युवा, इंदौर के गुरूओं ने बताई स्थिति ?Education & Career



हम में से सभी की ज़िन्दगी में गुरू का ख़ास योगदान रहा है। काफी लोग अपने गुरूओं का आज भी सम्मान करते हैं, उन्हें याद करते हैं। लेकिन आज के समय में काफी चीज़ें बदल गई हैं। समय और टेक्नोलॉजी तेजी से बदली जिसकी वजह से इस रिश्ते के बीच एक बड़ा गैप आ गया है। स्कूल-कोचिंग के गुरूओं तक तो ठीक है लेकिन कॉलेज में हालात काफी चिंताजनक हैं। इन्हीं चिंताजनक हालातों को लेकर यूथेन्स न्यूज ने गुरू पूर्णिमा के मौके पर इंदौर के कुछ कॉलेजों के प्रोफेसर्स से बात की जिन्होंने वर्तमान हालात हमारे सामने रखे। तो आइए आपको बताते हैं गुरू पूर्णिमा पर क्या है इंदौर के गुरूओं का कहना।

शिक्षा प्रणाली में कमी के कारण बच्चे नियमित नहीं

गुजराती गर्ल्स कॉलेज के प्रिंसिपल गोविंद सिंघल जी ने बताया कि आज के समय में शिक्षक और छात्रों के बीच संपर्क कम ही होता है। अब मुद्दा ये है कि छात्र कॉलेज क्यों नहीं आते। तो प्रश्न हमारी शिक्षा प्रणाली पर उठता है कहीं न कहीं हमारी शिक्षा प्रणाली कमजोर है। छात्रों को ये लगता है कि नियमित रूप से कॉलेज जाने से क्या मतलब। छात्र-छात्राएं सुविधापरस्त हो गए हो। आज वो अपने हिसाब से कई कॉम्पीटिटिव एग्जाम्स की तैयारी कर रहे हैं घर बैठकर। ऐसे में उनका कॉलेज आना कम हो गया। आज छात्र कॉलेज को सिर्फ नियमित परीक्षा का केंद्र मानता है जबकि कॉलेज एक नियमित अध्ययन का केंद्र है।

दूसरी बात ये है कि हमारे यहां का सिलेबस अच्छा है, पढ़ाने वाले भी मौजूद नहीं है लेकिन हमारे यहां आज जो कॉलेज एग्जाम्स में जो पेपर आते हैं वो ऐसे आते हैं वो ऐसे आते हैं जो थोड़ी बहुत पढ़ाई से निकल जाते हैं। इसी के आधार पर विद्यार्थी सोचता है कि इसके लिए ज़्यादा पढ़ाई का कोई मतलब नहीं है। कॉलेज जाने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसे में छात्र-शिक्षक के बीच का संपर्क लगभग खत्म ही हो जाता है और उन्हें जो ज्ञान मिलना चाहिए वो नहीं मिल पाता है।

गुरू पूर्णिमा पर मेरा विद्यार्थियों से यही आहवान है कि आप जो भी कोर्स कर रहे हैं। उसे अपने कैरियर का आधार मानें। अगर आप कॉलेज नहीं आओगे तो आपमें जो नेतृत्व की कला होती है वो नहीं आएगी, विषय के बारे में ज्ञान नहीं मिलेगा। तब आप जब नौकरी के लिए जाओगे तो आप हो सकता है वहां भी असफल रहे। इसलिए आप कॉलेज आए, कॉलेज लाइफ को पढ़ाई से इंजॉय करें मोबाइल से नहीं।

पढ़ाई के साथ जॉब भी बन रही पढ़ाई के लिए परेशानी

क्रिश्चियन कॉलेज के प्रोफेसर डॉक्टर पंकल विरमाल ने बताया कि जब बच्चा कॉलेज में आता है और उसके नए दोस्त बनते हैं तो वो देखता है कि दोस्तों के पास बाइक हैं, किसी के पास मोबाइल है तो यहां उसके शौक भी बड़ते हैं। इन शौक को पूरा करने के लिए और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वो जॉब करने लगता है। ऐसे में वो पढ़ाई से विमुख हो जाता है और कॉलेज नहीं आ पाते। इस तरह वो कॉलेज में जिस पढ़ाई को करने आते हैं उससे दूर हो जाते हैं। जिसका सीधा सा रिजल्ट आता है कि जब आगे वो इस डिग्री को लेकर नौकरी लेने जाते हैं तो वहां फेल होते हैं।

इसके अलावा दूसरा कारण ये है कि कुछ बच्चों का पढ़ाई में इंट्रेस्ट नहीं होता। वे कुछ दिन तो पढ़ते हैं लेकिन बाद या तो कॉलेज आना छोड़ देते हैं या फिर क्लास में पढ़ना छोड़ देते हैं। अपने सहपाठियों के साथ में मस्ती करते हैं, इंजॉय करते हैं। और हमारे देश में सिर्फ डिग्री के दम पर नौकरी मिले जरूरी तो नहीं। आज आप पैसे कमाने के लिए कुछ भी व्यावसाय कर सकते हैं। अगर आपने अच्छा पढ़-लिख लिया है तो आप कोचिंग पढ़ा सकते हैं, खुद की कोचिंग स्कूल खोल सकते हैं। यहां कमाने के लिए स्कोप तो बहुत है लेकिन बच्चों को पढ़ने के प्रति खुद ही अपना इंट्रेस्ट डेवलप करना होगा।

शिक्षा के साथ बच्चों में हुनर की जरूरत है

आईटीआई के प्रोफेसर हरीशचंद्र शर्मा ने बताया कि शिक्षा के मायने कल भी वही थे जो आज है लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से इनको पाने के तरीके थोड़े से बदल जाते हैं। हमने समय के साथ महसूस किया कि हमारे पड़ोसी देश चीन, जापान की शिक्षा और रोजगार में हमसे आगे हैं। वहां का जो एजुकेशन सिस्टम है। वहां तकनीकी शिक्षा को ज़्यादा महत्व दिया है। हमारे प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने भी भारत में कौशन विकास कार्यक्रम शुरू किया। आज हमारे हाथ में शिक्षा का होना तो जरूरी है लेकिन कौशल होना भी जरूरी है। इसलिए भारत में इसे लेकर ज़्यादा जोर दिया जा रहा है। हमारे भारत में भी छात्रों के पास ज्ञान होना चाहिए लेकिन उनके पास हुनर भी होना चाहिए जिससे उनसे उनकी नौकरी अगर छिन भी जाए तो वे अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ सकें।

एजुकेशन पॉलिसी में लें ग्राउंड लेवल के शिक्षकों की मदद

आईटीआई के एनसीसी अधिकारी उदय सिंह चौहान ने बताया कि आज के समय में शिक्षा का क्षेत्र काफी बदल चुका है। पहले के समय में गुरूकुल हुआ करते थे उनके शिष्य हुआ करते थे। आज के समय में न पहले जैसे गुरू हैं और अगर गुरू हैं तो उनके लिए वैसे शिष्य नहीं है। आज के समय में विद्यार्थियों का मुख्य उद्देश्य है कि वे कैसे भी करके डिग्री हासिल करें और नौकरी हासिल करें। इस आपाधापी में वो शॉटकर्ट से अच्छी डिग्री बनाने का रास्ता ढूंढते हैं और इसी कारण उन्हें जैसा ज्ञान मिलना चाहिए वैसा ज्ञान नहीं मिल पाता।

हमारे यहां शिक्षक आज भी काफी अच्छे हैं लेकिन वो जैसा चाहते हैं उन्हें वैसा सपोर्ट मिलता। एक इंसान की पूरी ज़िन्दगी में अनुशासन का काफी महत्व होता है लेकिन बच्चे जब कॉलेज में आते हैं तो उनके लिए मौज मस्ती ही कॉलेज का मतलब होता है। बच्चे यहां भी अनुशाषित रहें। हमारे यहां एक समस्या और है कि कॉलेज में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए उपरी लेवल के अधिकारी ही पॉलिसी लागू करते हैं कभी एक ग्राउंड लेवल के शिक्षक से नहीं पूछा जाता कि उनके बच्चों की क्या परेशानी है और उसे कैसे दूर किया जाए तो जरूरी है कि कॉलेज में अगर कोई पॉलिसी लागू करना है तो उसके लिए शिक्षकों की भी राय लेनी चाहिए।

वहीं एक समस्या हमारे यहां एक ये भी है कि हमारे यहां बच्चों को शिक्षा तो दे देते हैं लेकिन उस ज्ञान को कैसे रिप्रेजेंट किया जाए इसकी विशेष तौर पर कमी है। हमारे यहां के स्टूडेंट्स बहुत नॉलेज रखते हैं लेकिन उसे एक्सप्रेस करना बहुत कम जानते हैं। कुछ दिनों पहले ही भोपाल में पहले ग्लोबल स्किल पार्क में भी यही बात कही गई।

तो मैं बस यही कहना चाहूंगा कि गुरू और शिष्य का रिश्ता ख़ास हैं और इसे ख़ास बनाने के लिए बच्चों में नैतिक मूल्य और संस्कारों का होना बहुत जरूरी है। गुरू भी संस्कारित बनें। बात सिलेबस की है तो सरकार उस पर भी काम कर रही है। अंत में मैं आज के माहौल पर एक शेर कहना चाहूंगा।

अश्क पीने की बात करते हैं
होंठ सीने की बात करते हैं
बेच डाला जमीर लोगों ने
फिर भी जीने की बात करते हैं

पढ़ाई का मकसद पद-प्रतिष्ठा पाना रह गया है

जीएसआईटीएस के प्रोफेसर बीमए मिश्रा ने बताया कि पहले के जमाने में छात्रों की दोस्ती बड़ी पक्की हुआ करती थी। ज़िन्दगी में काफी सारी विपन्नताएं भी हुआ करती थी। इस विपन्नताओं से निकलने के लिए बच्चा मेहनत से पढ़ता था। लेकिन के आज के समय में ये विपन्नताएं नहीं है। सरकार पढ़ाई करने के लिए खूब स्कॉलरशिप दे रही है। सरकार खूब मदद कर रही है जिसके कारण पढ़ाई आसान हो गई। लेकिन इसके उलट ये हुआ कि छात्रों की पढ़ाई के प्रति गंभीरता नहीं रही। आज के समय में पढ़ाई का एकमात्र मकसद रहा है कि पद-प्रतिष्ठा पाना है।

पढ़ाई के साथ पर्सनल लाइफ के डाउट भी कर रहे हैं दूर

सुगनी देवी कॉलेज की प्रोफेसर डॉक्टर अंजली पांडे ने बताया कि आज के समय में शिक्षा का परिदृश्य काफी बदला है। पहले इतनी टेक्नोलॉजी नहीं हुआ करती थी लेकिन अब पढ़ने के लिए कई सारी टेक्नोलॉजी हैं। आज आप अपने स्मार्टफोन पर ही अपनी पढ़ाई कर सकते हैं। स्टूडेंट पढ़ाई में टेक्नोलॉजी का प्रयोग भी कर रहे हैं और अच्छे रिजल्ट ला रहे हैं। जैसा कि हम आज देखते हैं बच्चों में आज भी टीचर्स के प्रति काफी सम्मान है। हमारे यहां के अधिकतर बच्चे आज अच्छी नौकरियां कर रहे हैं। हम शिक्षा देने के साथ-साथ उन्हें पर्सनल लाइफ की प्रॉब्लम्स में भी सहायता करते हैं। जैसे कि मैं एक गर्ल्स कॉलेज में पढ़ाती हूं तो उन्हें सेफ्टी के बारे में, बेड टच के बारे में अवेयर कराती हूं।

गुरू पूर्णिमा के मौके पर इंदौर के गुरूओं ने अपनी विशेष राय रखी जिसमें सामने आया कि कुछ दोष छात्रों का है तो कुछ दोष हमारी एजुकेशन प्रणाली का भी है। आज अगर युवा बेरोजगार घूम रहा है तो इसमें दोनों तरफ से कहीं न कहीं कमी है। यूथेन्स न्यूज की यही पहल है कि इस कमी को दूर किया जाए और युवा प्रयास करे कि वो इस तरह से पढ़ाइ करे जो उसके जीवन में आगे काम आए।

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