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Friday, December 15th, 2017 09:13 PM
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करवा चौथ : चांद की पूजा करने के पीछे की कहानी




करवा चौथ : चांद की पूजा करने के पीछे की कहानीArt & Culture

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हिंदू परंपरा के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। इस बार करवा चौथ 19 अक्टूबर यानी बुधवार को है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं चांद की पूजा करके अपना व्रत खोलती हैं। लेकिन कभी-कभी मन में ये सवाल उठता है कि इस दिन चांद की ही पूजा क्यों की जाती है। आपके मन में भी उठता होगा। इस संबंध में कई कहानियां और किवदंतियां हैं। करवा चौथ के दिन चांद की पूजा करने के पीछे एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। तो आइए जानते हैं क्या है चांद की पूजा करने के पीछे की कहानी और मनोवैज्ञानिक कारण।

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प्राचीन कथा

रामचरितमानस के लंका काण्ड के अनुसार, जिस समय भगवान श्रीराम समुद्र पार कर लंका में स्थित सुबेल पर्वत पर उतरे और श्रीराम ने पूर्व दिशा की ओर चमकते हुए चांद को देखा तो अपने साथियों से पूछा – चांद में जो कालापन है, वो क्या है? सभी ने अपनी-अपनी समझ के अनुसार जवाब दिया। किसी ने कहा चांद में पृथ्वी की छाया दिखाई देती है। किसी ने कहा राहु की मार के कारण चांद में कालापन है तो किसी ने कहा कि आकाश की काली छाया उसमें दिखाई देती है। तब भगवान श्रीराम ने कहा ’’विष यानी ज़हर चांद का बहुत प्यारा भाई है। इसीलिए उसने विष को अपने हृदय में जगह दे रखी है, जिसके कारण चांद में कालापन दिखाई देता है। अपनी विष से भरी किरणों को फैलाकर वह उन पुरूषों और महिलाओं को जलाता है जो एक-दूसरे से दूर हैं।

मनोवैज्ञानिक कारण

इस पूरी कहानी के पीछे का मनोवैज्ञानिक पक्ष ये है कि जो पति-पत्नी किसी कारण से एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं, चांद की विष भरी किरणें उन्हें और भी ज्यादा दुख पहुंचाती हैं। इसलिए करवा चौथ के दिन चांद की पूजा कर महिलाएं ये कामना करती हैं कि किसी भी कारण से उन्हें अपने पति से अलग न होना पड़े। यही कारण है कि करवा चौथ के दिन चांद की पूजा की जाती है।

इसलिए पति को छलनी में देखती है पत्नी

परंपरा के अनुसार, करवा चौथ की पूजा करते समय सबसे पहले विवाहित महिलाएं छलनी से चांद को देखती हैं और बाद में अपने पति को। ऐसा करने के पीछे कोई वैज्ञानिक तर्क नहीं होता बल्कि पत्नी के दिल की भावना होती है। पत्नी जब छलनी से अपने पति को देखती है तो उसका मतलब ये होता है कि मैंने अपने दिल के सभी विचारों और भावनाओं को छलनी में छानकर शुद्ध कर लिया है जिससे मेरे मन के सभी दोष दूर हो चुके हैं और अब मेरे दिल में पूरी तरह से आपके लिए सच्चा प्यार ही शेष है। यही प्यार में आपको समर्पित करती हूं और अपना व्रत पूरा करती हूं।

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