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Wednesday, October 17th, 2018 04:07 PM
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इंदौर की शिखा शर्मा ने रंगोली में दो देशों के 75 प्रतिभागियों में बाजी मारी




इंदौर की शिखा शर्मा ने रंगोली में दो देशों के 75 प्रतिभागियों में बाजी मारीArt & Culture



भारत में अब भी माना जाता है कि बच्चा अगर पढ़-लिखकर इंजीनियरिंग, मेडीकल या मैनेजमेंट की फील्ड चुने तो वो बहुत पढ़ाकू है और उसका फ्यूचर ब्राइट है। वहीं अगर बच्चा आर्टस लेकर पढ़े तो उसका फ्यूचर खतरे में है या फिर उसे पढ़ने-लिखने में ज़्यादा रूचि नहीं है लेकिन इन सभी बातों को गलत कर दिखाया इंदौर की शिखा शर्मा ने जो बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं लेकिन उन्होंने आर्टस को चुना और आज वे देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाई।

शिखा शर्मा इंदौर की रहने वाली एक आम लड़की है लेकिन उनमे छुपी कला उन्हें ‘आम’ से ‘खास’ बनाती है। हाल ही में शिखा शर्मा ने नेपाल के काठमांडू में एक रंगोली कॉम्पीटिशन में हिस्सा लिया था। इस पूरे कॉम्पीटिशन में उनके अलावा भारत और नेपाल के करीब 75 कलाकारों ने भाग लिया था जिसमें पहले स्थान पर शिखा शर्मा आईं। उनकी इसी उपलब्धि के मौके पर यूथेन्स न्यूज ने उनके साथ एक ख़ास बातचीत की जिसमें शिखा ने कई सारी बातें बताई।

एमबीबीएस छोड़कर चुनी आर्ट्स फील्ड

शिखा ने बताया कि पेंटिंग का शौक उन्हें थोड़ा-बहुत बचपन से था लेकिन उन्हें बचपन में डॉक्टर बनना था तो उनका पूरा ध्यान डॉक्टर बनने पर ही था। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल में एडमिशन के लिए एक साल का गेप लिया और तैयारी की। इसके बाद मेडिकल में सिलेक्शन भी हुआ लेकिन बाहर एडमिशन मिलने के कारण वे नहीं गई। इसके बाद एक साल उन्होंने बीएसी भी की लेकिन फिर समझ आया कि उन्हें ड्राइंग और आर्ट्स में ही फ्यूचर बनाना चाहिए।

खुद का पोर्टेट बनाकर मिला मोटिवेशन

शिखा बताती हैं कि पेंटिंग का जुनून उनके अंदर तब आया जब उन्होंने 25 दिसंबर 2014 को खुद का पोर्टेट बनाया। तब शिखा को लगा कि वे इस फील्ड में अपना करियर बनाए तभी उनके लिए बेहतर होगा। इसके बाद वे पेंटिंग और रंगोली में अपना पूरा ध्यान देने लगी। थोड़े में ही दिनों में वे इस कला में काफी माहिर हो गईं। शिखा रंगोली के अलावा ऑइल पेंटिंग, फेब्रिक पेंटिंग, वॉटर कलर, स्केचिंग करती है। इसके अलावा वे क्ले मॉडलिंग भी करती हैं जिसमें इंदौर में साउथ एशियन प्रतियोगिता में उन्हें इंटरनेशनल अवार्ड मिला था।

75 कलाकारों के बीच ऐसे जीता नेपाल के लोगों का दिल

शिखा ने नेपाल में जो गोल्ड मेडल जीता वो रंगोली के लिए था। यहां 75 कलाकारों के बीच जीतना इतना आसान खेल नहीं था। इस पर शिखा कहती हैं कि हमने वहां रंगोली बनाने के लिए उनके भगवान बुद्ध की पेंटिंग बनाई जो इतनी रियालिस्टिक थी कि वहां के लोगों को काफी पसंद आई। शिवा मनिकपुरी ने भी इस पेंटिंग को बनाने में उनका साथ दिया था।

आर्ट्स में भी आप कर सकते हैं तरक्की

आर्ट्स फील्ड को लेकर शिखा का कहना है कि पहले वे भी डॉक्टर बनना चाहती थीं, काफी मेहनत भी की लेकिन फिर उन्हें लगा कि जब सब लोग वहीं कर रहे हैं तो क्यों न मैं कुछ अलग करू। आज मेरे आर्ट्स फील्ड में होने के कारण कई लोग अपने ड्रीम्स पूरा होते देख पा रहे हैं। मेरे स्टूडेंट्स भी मुझे देखकर समझ पा रहे हैं कि उस भागादौड़ी में उन्हें नहीं लगना। मुझे भी लगता है कि आप इस फील्ड में भी काफी तरक्की कर सकते हैं। काफी आगे तक जा सकते हैं।

तो ये थी इंदौर की शिखा की कहानी जो मेडिकल की पढ़ाई को छोड़कर आज आर्ट्स की फील्ड से इंदौर का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर रही हैं। शिखा की पेंटिंग्स और रंगोली के कई लोग फेन हैं। उन्होंने कुछ दिनों पहले ही बीजेपी सांसद और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की पोर्टेट वाली रंगाल बनाई थी जो काफी खूबसूरत थी।

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