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Wednesday, October 17th, 2018 02:42 AM
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बैंक में जमा पूरी रकम की सुरक्षा की नहीं होती “गारंटी”, जान लीजिए ये नियम….




बैंक में जमा पूरी रकम की सुरक्षा की नहीं होती “गारंटी”, जान लीजिए ये नियम….Business



आज के दौर पर हर कोई अपना पैसा सुरक्षित रखना चाहता है, इसके लिए वह बैंक पर ज्यादा भरोसा करता है। उसे पूरा विश्वास होता है कि बैंक में चाहे वह कितनी भी रकम जमा कर दे, यहां उसका पैसा सुरक्षित रहेगा। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। आपको शायद न पता हो, लेकिन बैंक में जमा पूरा पैसा सुरक्षित नहीं होती। इसकी कोई गारंटी भी बैंक नहीं देती। अगर आपका एक बैंक में 1 लाख रूपए से ज्यादा पैसा जमा है, तो बैंक इसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। लिहाजा बैंक कभी दिक्कत में आ जाए, तो आपका ये पैसा भी डूब सकता है। इसलिए बैंक में पैसा जमा कराने से पहले कुछ नियमों को जान लें, तो बेहतर होगा।

1 लाख की ही होती है सुरक्षा की गारंटी-

बैंक में खाताधारकों की सिर्फ 1 लाख रुपए की जमा ही सुरक्षित होती है। इसमें मूलधन और ब्‍याज दोनों को शामिल किया जाता है। इसको इस तरह समझा जा सकता कि अगर आपका 80 हजार रुपए मूलधन है और 20 हजार ब्‍याज है तो अापका पूरा पैसा सुरक्षित है। लेकिन अगर आपका बैंक में 1 लाख रुपए जमा है और 20 हजार रुपए का ब्‍याज हो गया है, तो आपका 1.20 लाख रुपए नहीं केवल 1 लाख रुपए ही सुरक्षित है। इतना ही नहीं, अगर आपका एक ही बैंक की कई ब्रांच में खाता है तो सभी खातों में जमा अमाउंट जोड़ा जाएगा और केवल 1 लाख तक जमा को ही सुरक्षित माना जाएगा।

RBI के नियमों के अनुसार एक व्‍यक्ति अगर एक से ज्‍यादा बैंकों में अकाउंट रखता है, तो उसको हर बैंक में 1 लाख रुपए तक की जमा की सुरक्षा मिलती है। यानी अगर उसका एक-एक लाख तक का अमाउंट कई बैंकों में है जमा है तो उसे हर बैंक से पूरा पैसा मिलेगा, लेकिन अगर किसी भी बैंक में 1 लाख रुपए से ज्‍यादा जमा है तो फिर सिर्फ 1 लाख रुपए की जमा ही सुरक्षित मानी जाएगी।

ये हैं नियम

अगर आपका एक अकाउंट सिंगिल नाम से हैं, और दूसरा अकाउंट ज्‍वाइंट नाम से है, जिसमें आपका पहला नाम है। तो यह दोनों अकाउंट एक ही मानें जाएंगे। इन अकाउंट में कुल जमा को एक व्‍यक्‍ति का ही जमा माना जाएगा। लेकिन अगर आपका सिंगिल नाम से एक अकाउंट है और दूसरा अकाउंट ज्‍वाइंट नाम से है, लेकिन ज्‍वाइंट अकाउंट में आपना नाम दूसरा है, तो यह अकाउंट आपका नहीं माना जाएगा। जिसका पहला नाम होगा उसका ज्‍वाइंट अकाउंट माना जाएगा। अगर कभी दिक्‍कत आई तो इसी नियम से आपको क्‍लेम दिया जाएगा।

हालांकि भारत में अब तक किसी बैंक के साथ ऐसी स्थिति नहीं बनी है, बैंक डिफॉल्ट का कोई इतिहास भी नहीं है। लेकिन कभी भविष्य में बैंक डिफॉल्ट कर जाता है, तो उस स्थिति में अकाउंट होल्डर की लीगल पजेशन क्या है ये उसे मालूम होना बहुत जरूरी है। यह नियम केवल उसी स्थिति में लागू होता है।

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