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Thursday, December 14th, 2017 02:41 PM
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बाबाओं और धर्मगुरुओं के स्टाल्स से कुछ बदला सा है दिल्ली का पुस्तक मेला




बाबाओं और धर्मगुरुओं के स्टाल्स से कुछ बदला सा है दिल्ली का पुस्तक मेलाArt & Culture

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दिल्ली के प्रगति मैदान में अभी पुस्तक मेला चल रहा है। इस बार इस पुस्तक मेले में कुछ नया और अनोखा देखने को मिल रहा है। किसी भी पुस्तक मेले का ख्याल अगर आपके मन में आएगा तो आप क्या इमेजिन करेंगे? अलग अलग स्टाल्स के सेल्फ में सजी हुई किताबे, कुछ नई किताबों की महक भी दिमाग में आती है। इस बार दिल्ली के पुस्तक मेले में लोगो का स्वागत कुछ अलग हो रहा है। मेले में प्रवेश करते ही अगरबत्ती की खुशबू और मंत्रोच्चार की रिकॉर्डेड ध्वनि सुनाई दे रही है।

दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे 23वें दिल्ली पुस्तक मेले में आने वाले लोगों को पुस्तकों के अलावा भी कुछ अलग देखने को मिल रहा है और वो है यहाँ लगे बाबाओं और महात्माओं के स्टाल्स जिनमे धार्मिक साहित्य तो मिल ही रहा है ध्यान और योग की व्यवस्था भी है, आने वाले लोग बाबाओं और धर्मगुरुओं के ये स्टाल देख ताज्जुब कर रहे हैं और जिज्ञासा भी है जानने की, इन स्टाल्स पर लोगों की भीड़ भी खूब लग रही है।

इस पुस्तक मेले में गुरु महाराज घसीटा राम ‘कंत’, अखिल भारतीय संतमत सत्संग, राधा स्वामी सत्संग, परम पूज्य माताजी निर्मला देवी, गौड़ीय वेदांत प्रकाशन, शिरडी साई ग्लोबल फ़ाउंडेशन से लेकर रामकृष्ण मिशन, पतंजलि का दिव्य प्रकाशन और गीताप्रेस गोरखपुर तक के स्टाल लगे हैं। हॉल में अन्दर जाने के कुछ देर बाद ही ऐसा लगता है, जैसे आप अचानक किसी मंदिर में आ गए हैं

यहाँ आने वाले पाठक भी अलग अलग प्रकार के आते हैं, इस पुस्तक मेले में आपको युवा, बच्चे, बुजुर्ग सभी मिल जायेंगे जो किताबों के शौकीन हैं लेकिन कुछ ऐसे युवा भी मिल जायेंगे जिनको देख कर आपको ताज्जुब होगा कि किताबों में इन युवाओं की पसंद धार्मिक साहित्य में है। मेले में आई रुचिका स्टूडेंट हैं और रामायण पढ़ने में उनकी दिलचस्पी है। वो ऐसे ही एक स्टाल पर रामायण उलट पुलट रहीं थीं। वो कहती हैं, “मैंने तुलसी की रामायण पढ़ी है, अब वाल्मीकि की रामायण पढ़ना चाहती हूं, ये जानने के लिए कि उसमें क्या अलग है?” ऐसे ही सिर के बाल साफ़ करवाए और चुटिया रखे दर्शनशास्त्र में एम।फ़िल, देवेंद्र भारतीय साधू के वेष में हैं, लेकिन उनकी ख़रीद सूची में डिकेंस की किताब देख किसी को भी हैरानी हो सकती है। पर वो बेझिझक कहते हैं, “डिकेंस मैंने पहले भी पढ़ा है, मुझे वो बेहद पसंद हैं।”

हॉल के एक कोने में दलित और बौद्ध साहित्य का एक स्टाल लगा है। यहां बुद्ध की तस्वीरें, पंचशील का झंडा, बुद्ध और अम्बेडकर की किताबें सजी हुई हैं। यहां अपेक्षाकृत लोगों की भीड़ भी दिख रही है। मुस्लिम धर्म की अहमदिया शाखा का भी एक स्टाल यहां लगा हुआ है। अहमदिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष फ़िरोज़ अहमद नईम का कहना है कि ‘उनकी संस्था यहां शांति का प्राचार कर रहे हैं।’

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