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Tuesday, September 25th, 2018 12:48 AM
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गणेशजी से सीखें करियर और एजुकेशन के गुण




गणेशजी से सीखें करियर और एजुकेशन के गुणEducation & Career



इन दिनों गणपति की धूम पूरे देश में हैं। पूरा देश गणपति उत्सव को पूरे जोश और उत्साह के साथ मना रहा है। पूरे दस दिनों तक देश में उत्साह तथा धूमधाम की लहर रहेगी। ऐसे में स्टूडेंट्स और युवा पूरे जोश के साथ गणपति उत्सव में लगे हुए है। ये उत्सव गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चर्तुदशी को समाप्त होता है। गणेश चतुर्थी को हम गणेशजी को घरों में, मोहल्लों में, कालोनियों में, जगह-जगह पांडाल बनाकर स्थापित करते है। और दस दिनो तक बड़ी ही श्रद्धाभक्ति के साथ उनकी पूजा करते है। गणेशजी बुद्धि तथा ज्ञान के देवता है। साथ ही वे एक अच्छे लेखक भी है। गणेशजी में ऐसी कई बाते है जिन्हे जानकर या अपनाकर हम अपने जीवन में आगे बड़ सकतें है। और सफल हो सकतें है। गणेशजी से संबंधित कुछ गुण है जो युवाओं और स्टूडेंट्स में अपने करियर और एजुकेशन मे हेल्पफुल साबित होंगे।

बड़ा सोचे- गणेशजी का सिर तो सभी ने देखा होगा। देखने में बहुत बड़ा है। पर ये उनकी बड़ी सोच और क्षमता का प्रतीक है। गणेशजी का बड़ा सिर हमें इस बात की प्रेरणा देता हैं कि हमें जितना हो सके अच्छा और संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। जिसके कारण हम अच्छा और बड़ा सोच सकें। हमेशा अपनी सोच को बड़ा रखना चाहिए। जिससे कि जिंदगी में आगे अवसरों और विकल्पों की कमी ना रहे। विश्व के महान व्यक्ति भी इसी गणेशजी के इस प्रतीक इस बात पर चलकर अपने जीवन में सफल हुए है। कुछ महान लोगों नें भी इसी बातों पर जोर दिया है।

बड़ा सोचो, जल्दी सोचो, आगे सोचो, सोच पर कभी किसी का एकाधिकार नही होता है।- धीरूभाई अंबानी

इंसान अपने विचारो से निर्मित प्राणी है, वो जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है। – महात्मा गांधी

Thing should be madeas simple, but not any simpler.-Albert Einstein

इससे पहले की सपने सच हो आपको सपने देखने होंगे। – अब्दुल कलाम

महान सपने देखने वालों के महान सपने पूरे होत है। – अब्दुल कलाम

अच्छे श्रोता बने– गणेशजी के बड़े कान तो सभी को भाते है। लेकिन उनके ये बड़े कान एक अच्छे श्रोता बनने का प्रतीक है। गणेशजी अपने बड़े कानो से ज्यादा से ज्यादा सुनते थे। और फिर अपनी राय रखते थे। इसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में सबकी बाते सुनना चाहिए। और एक अच्छे श्रोता बनना चाहिए। एक अच्छा श्रोता बनना काफी आसान है लेकिन एक अच्छा वक्ता बनना काफी मुश्किल है। पर अच्छा वक्ता बनने के लिए आपका एक अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है। आप जितना ज्यादा लोगों से चीजे सीखेंगे उतना ही अच्छा आप बोल पायेंगे। अगर आप किसी को सुन नही सकतें उस विषय पर बोलेंगे कैसे। इसलिए एक अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है।

अभी कुछ दिन पहले ही हुए 4 सितंबर के दिन भारत के प्रधानमंत्री ने शिक्षक दिवस के एक दिन पहले बच्चो से बात की जिसमें उन्होने कहा कि यदि आप एक अच्छे लीडर या वक्ता बनना चाहते है तो पहले एक अच्छे श्रोता बने। पहले लोगो की सुने उसके बाद अपनी राय रखे। आप जितने अच्छे श्रोता बनेंगे। उतना ही आप अच्छा बोल पायेंगे। मेरे बिना कागज के स्पीच देने के पीछे भी यही राज है कि मै एक अच्छा श्रोता हूं। अगर मै एक अच्छा श्रोता नही होता तो मुझे भी स्पीच देने में कागजो की आवश्यकता होती।

विनम्रता-गणेशजी बहुत ताकतवर थे पर उन्होने एक छोटे से चूहे को अपना वाहन क्यो बनाया। क्योंकि वे स्वभाव से उतने ही विनम्र थे जितने वे ताकतवर थे। वे संसार की छोटी से छोटी चीजो से भी विनम्रता से पेश आते थे। ऐसें ही हमें भी किसी को भी अपने से छोटा समझकर उसके आगे अपनी ताकत का प्रदर्शन नही करना चाहिए। अपनी ताकत अपने अंदर ही समेट कर रखना चाहिए तथा सही वक्त आने पर उसका उपयोग करना चाहिए। आजकल ये बड़ा ट्रेंड हो चला है कि अगर आप जरा सी भी उपलब्धि हासिल कर लेते है तो उसे सबको बताने में अपनी एनर्जी बर्बाद करते है। हमें गणेशजी की तरह विनम्रता को अपनाना चाहिए। जरा सी सफलता पर शोर नही मचाना चाहिए। इस देश में कई ऐसे लोग है जो विनम्रता के बल पर अपनी ताकत का लोहा मनवा चुके है।
जैसे- महात्मा गांधी, इन्होने बिना हिंसा किए। चुपचाप अपना आंदोलन करते रहे। किसी भी प्रकार की हिंसा इन्होने अपने आंदोलनों में नही होने दी। और आखिर में अंग्रेजो को इनकी ताकत को मानना ही पढ़ा।

धैर्य-गणेशजी का बड़ा पेट उनके धैर्य का प्रतीक है। जितना बड़ा उनका पेट था, उससे कही ज्यादा वे धैर्यशाली थे। हर काम, हर विपत्ति का वे बड़े ही धैर्य के साथ हल करते थे।

एक बार जब गणेशजी के पिताजी शंकरजी ने उनके दोनो बेटो गणेश और कार्तिकेय की परीक्षा ली जिसमें दोनो को पूरे विश्व का भ्रमण करक सबसे पहले आना था। कार्तिकेय के पास वाहन के रूप में मोर था । वे तुरंत ही उड़कर विश्व भ्रमण पर निकल गये। गणेशजी के पास वाहन के रूप में चूहा था। तो वे इतनी जल्दी तो भ्रमण नही कर सकतें थे। पर उन्होने धैर्य रखा और अपनी बुद्धि के इस्तेमाल से अपने पिता द्वारा दी गई परीक्षा में अव्वल आये। ऐसा ही हमारे सााि भी होता है। हम भी कठिन परिस्थितियों में जब धैर्य से काम नही लेते तो काम बिगड़ जाते है। यदि हम कभी एग्जाम दे रहे है या इंटरव्यू दे रहे है तो उस समय हमें बहुत से प्रश्नो के उत्तर नही आते है। पर उस समय हड़बड़ाहट में हमे कुछ भी नही बोलना और लिखना चाहिए। बल्कि धैयपूर्वक उस प्रश्न को हल करना चाहिए।

लीडरशिप- गणेशजी का एक नाम बड़ा ही लोकप्रिय है। ‘‘विनायक’’ उनका ये इस बात का प्रतीक है कि आप का कोई भी लीडर नही है आप स्वयं अपने लीडर हो। गणेशजी भी कभी किसी पर निर्भर नही रहते थे। उन्हे जो करना होता था। वो स्वयं ही कर लेते थे। इसी तरह हमें भी अपने जिन्दगी में आगे बड़ने के लिए किसी लीडर की आवश्यकता नही होना चाहिए। आप अपने दम पर मेहनत करके आगे बड़े। कभी-कभी एग्जाम के दिनों में हम दोस्तो तथा कोचिंग सेंटरो पर कुछ ज्यादा ही निर्भर हो जाते है ऐसे में हमारा आत्मविश्वास कम होता जाता है। जिससे हम अच्छा प्रदर्शन नही कर पाते। हमे आत्मनिर्भर बनने पर जोर देना चाहिए। पहले से परिस्थितयों के अनुसार खुद को तैयार कर लेना चाहिए।

माना कि अंधेर घना है पर दीया जलाना कहा मना है। – नरेंद्र मोदी

दोस्तो हम गणेशजी तो हर बार स्थापित करते है लेकिन उनकी विशेषताओं को भी जीवन में लाकर अपनी जिंदगी को कामयाब बना सकतें है। कामयाबी की इसी उम्मीद को लेकर आप सभी को इस गणपति उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं
गणपति बप्पा मोरियां

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